पेट्रोल, डीजल और एटीएफ निर्यात पर विंडफॉल टैक्स बढ़ा: डीजल ₹25.5, एटीएफ ₹22 प्रति लीटर
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 3 अगस्त 2026 को पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लागू विंडफॉल टैक्स में तत्काल प्रभाव से बड़ी बढ़ोतरी कर दी है — पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) तीनों पर संशोधित दरें लागू हो गई हैं। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में जारी उतार-चढ़ाव और ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनावों के बीच उठाया गया यह कदम घरेलू बाज़ार में ईंधन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से है। सरकार के अनुसार, संशोधित शुल्क दरें सोमवार से प्रभावी हो गई हैं।
नई दरें: क्या बदला
पेट्रोल पर निर्यात शुल्क ₹2.5 प्रति लीटर से बढ़ाकर ₹3.5 प्रति लीटर कर दिया गया है। डीजल पर दो अलग-अलग करों को मिलाकर कुल शुल्क ₹15.5 प्रति लीटर से बढ़ाकर ₹25.5 प्रति लीटर कर दिया गया है — यानी मात्र 15 दिनों में ₹10 प्रति लीटर की भारी वृद्धि।
एटीएफ पर निर्यात शुल्क ₹14.5 प्रति लीटर से बढ़ाकर ₹22 प्रति लीटर कर दिया गया है। विमानन क्षेत्र के लिए यह बढ़ोतरी उल्लेखनीय है, क्योंकि एटीएफ की लागत सीधे एयरलाइनों के परिचालन व्यय को प्रभावित करती है।
पिछले बदलावों का क्रम
यह संशोधन पिछले महीने की श्रृंखला में नवीनतम कड़ी है। 16 जुलाई को जारी वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के तहत डीजल पर शुल्क ₹8.5 से बढ़ाकर ₹15.5 प्रति लीटर और एटीएफ पर ₹7.5 से बढ़ाकर ₹14.5 प्रति लीटर किया गया था। उसी समय पेट्रोल पर शुल्क ₹4 से घटाकर ₹2.5 प्रति लीटर किया गया था ताकि क्षेत्रीय संतुलन बना रहे।
इससे पहले जुलाई के एक अन्य संशोधन में पेट्रोल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एसएईडी) ₹1.5 से बढ़ाकर ₹4 प्रति लीटर किया गया था, जबकि डीजल पर ₹14 से घटाकर ₹8.5 प्रति लीटर और एटीएफ पर ₹12.5 से घटाकर ₹7.5 प्रति लीटर किया गया था। यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय रिफाइनिंग मार्जिन में उल्लेखनीय उछाल देखा जा रहा था।
सरकार का तर्क
सरकार का कहना है कि विंडफॉल टैक्स का मुख्य उद्देश्य घरेलू बाज़ार में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना है। जब अंतरराष्ट्रीय कीमतें ऊँची होती हैं, तो निजी रिफाइनरियाँ घरेलू आपूर्ति की जगह निर्यात को प्राथमिकता दे सकती हैं — विंडफॉल टैक्स इस प्रवृत्ति पर अंकुश लगाता है। गौरतलब है कि ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनावों ने वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति शृंखला में अनिश्चितता बढ़ा दी है।
आगे क्या
विंडफॉल टैक्स की दरें आमतौर पर पखवाड़े-दर-पखवाड़े समीक्षा के आधार पर तय होती हैं, इसलिए वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में किसी भी बड़े बदलाव के साथ अगली समीक्षा में और संशोधन संभव है। निजी रिफाइनरियों और विमानन उद्योग के हितधारक इन दरों पर बारीकी से नज़र रखेंगे।