पुणे बिल्डिंग हादसा: मोशी में मलबे से 1 शव बरामद, 9 लोग सुरक्षित, NDRF का बचाव अभियान जारी
सारांश
मुख्य बातें
पिंपरी-चिंचवड़ के मोशी स्थित वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट में बुधवार, 9 जुलाई 2025 को हुए भीषण इमारत हादसे के बाद गुरुवार को भी राहत और बचाव अभियान पूरी तेज़ी से जारी रहा। अधिकारियों के अनुसार, मलबे से अब तक एक शव बरामद किया जा चुका है, जबकि 9 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), भारतीय सेना और स्थानीय एजेंसियों की संयुक्त टीमें अब भी मलबे में दबे लोगों की तलाश में जुटी हैं।
हादसे का घटनाक्रम
बुधवार दोपहर पुराने कचरे (लिगेसी वेस्ट) का एक बड़ा ढेर अचानक तीन मंजिला इमारत पर गिर गया, जिससे पूरी इमारत ढह गई। यह इमारत एंटनी लारा रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी द्वारा संचालित 14 मेगावाट के वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट के ऊपर बनी हुई थी। यह कंपनी पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम (PCMC) के साथ साझेदारी में इस संयंत्र का संचालन करती है।
हादसे के समय कंपनी के कई कर्मचारी इमारत में मौजूद थे। PCMC ने शुरुआत में बताया था कि करीब 23 लोग मलबे में फंसे हो सकते हैं, जिनमें से 5 लोग बचाव दल के पहुँचने से पहले ही खुद बाहर निकलने में सफल रहे। हादसे के कुछ घंटों के भीतर 7 लोगों को सुरक्षित निकाला गया, और देर रात 2 और लोगों को बचाया गया — जिससे कुल बचाए गए लोगों की संख्या 9 हो गई।
NDRF की चुनौतियाँ और अभियान की स्थिति
NDRF की 5वीं बटालियन के कमांडेंट एसबी सिंह ने बताया कि गुरुवार सुबह मलबे से एक शव बरामद किया गया है, जबकि दो अन्य शवों का भी पता चल चुका है। उन्होंने कहा, 'एनडीआरएफ अपनी पूरी कोशिश कर रही है। हमने हाथों से खुदाई कर एक संकरी जगह बनाई है और उसी रास्ते से अंदर पहुँच रहे हैं। अब तक तीन शवों का पता चल चुका है, जिनमें से एक को बाहर निकाल लिया गया है।'
सिंह ने बताया कि दूसरा शव दूर से दिखाई दे रहा है, लेकिन उसे निकालने में अभी और समय लगेगा। इमारत करीब 45 डिग्री तक झुक चुकी है, जिससे बचावकर्मियों को संकरे रास्तों से रेंगते हुए अंदर जाना पड़ रहा है।
भारी मशीनें क्यों नहीं हो रहीं इस्तेमाल
कमांडेंट एसबी सिंह ने स्पष्ट किया कि भारी मशीनों का उपयोग जानबूझकर नहीं किया जा रहा है, क्योंकि उनसे उत्पन्न कंपन से पहले से अस्थिर इमारत दोबारा गिर सकती है। उन्होंने कहा, 'हमारी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इमारत दोबारा न गिर जाए। अगर ऐसा हुआ तो बचावकर्मी भी मलबे में फंस सकते हैं। हम यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि अंदर फंसे लोगों पर और मलबा न गिरे।' इसी कारण मलबा हाथों से धीरे-धीरे हटाया जा रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि लाइफ डिटेक्टर, अकॉस्टिक सेंसर और स्निफर डॉग्स जैसे आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया गया, लेकिन अब तक मलबे के नीचे किसी जीवित व्यक्ति के होने के संकेत नहीं मिले हैं।
बचाव में लगी एजेंसियाँ
इस अभियान में NDRF, भारतीय सेना, पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम फायर ब्रिगेड, पुणे महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (PMRDA) फायर ब्रिगेड और पुलिस की संयुक्त टीमें लगातार काम कर रही हैं। बचाव अभियान की कठिनाई और इमारत की अस्थिरता को देखते हुए यह अभियान लंबा खिंच सकता है। जैसे-जैसे मलबा हटाया जाएगा, हताहतों की संख्या में बदलाव की आशंका बनी हुई है।