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ट्रंप पर भरोसा नहीं, ईरान को कड़ा जवाब देना चाहिए: मौलाना साजिद रशीदी

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ट्रंप पर भरोसा नहीं, ईरान को कड़ा जवाब देना चाहिए: मौलाना साजिद रशीदी

सारांश

मौलाना साजिद रशीदी ने एक साथ कई संवेदनशील मुद्दों पर बेबाक राय रखी — ट्रंप को अविश्वसनीय बताया, ईरान को जवाबी कार्रवाई की नसीहत दी, और यूसीसी व वक्फ बोर्ड पर सरकार से जवाब माँगा। उनकी टिप्पणियाँ विपक्ष की 'नरम हिंदुत्व' रणनीति पर भी तीखा प्रहार करती हैं।

मुख्य बातें

मौलाना साजिद रशीदी ने 9 जुलाई को कहा कि डोनाल्ड ट्रंप के बयानों पर भरोसा नहीं किया जा सकता क्योंकि वे बार-बार अपना रुख बदलते हैं।
उन्होंने ईरान से अपने नेताओं की हत्या का जवाब देने और अमेरिका व इज़रायल के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने की वकालत की।
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर आरोप लगाया कि दोनों दल हिंदू मतदाताओं को नाराज़ न करने के लिए राम मंदिर चंदा विवाद पर चुप हैं।
महाराष्ट्र यूसीसी पर कहा कि बिना व्यापक जन-परामर्श के इसे लागू करना उचित नहीं होगा।
वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों के प्रस्ताव पर कहा कि मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए जल्दबाज़ी न की जाए।

नई दिल्ली, 9 जुलाईमौलाना साजिद रशीदी ने अमेरिका-ईरान तनाव पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों पर भरोसा करना संभव नहीं है, क्योंकि वे समय-समय पर अपने रुख बदलते रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को अपने शीर्ष नेताओं पर हुए हमलों का ठोस जवाब देना चाहिए और अमेरिका तथा इज़रायल के विरुद्ध कड़ा रुख अपनाना चाहिए।

ट्रंप की विश्वसनीयता पर सवाल

मौलाना रशीदी ने कहा कि ट्रंप ने भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर भी अलग-अलग समय पर परस्पर विरोधी बयान दिए हैं, जो उनकी विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं। उनके अनुसार, यह समझ से परे है कि ईरान बार-बार अमेरिकी आश्वासनों पर भरोसा क्यों करता है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ईरान के नेताओं की हत्या के बाद भी तेहरान की ओर से अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं आई, जो उनकी दृष्टि में उचित नहीं है।

राम मंदिर चंदा विवाद और विपक्ष की चुप्पी

राम मंदिर चंदा घोटाले के आरोपों पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की चुप्पी के संदर्भ में मौलाना रशीदी ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और समाजवादी पार्टी अब नरम हिंदुत्व की राजनीति की ओर झुक रही हैं। उनके अनुसार, दोनों दल ऐसे किसी भी विवादित मुद्दे पर बयान देने से परहेज़ कर रहे हैं जिससे हिंदू मतदाता नाराज़ हो सकते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सच को राजनीतिक लाभ-हानि की परवाह किए बिना सामने रखा जाना चाहिए।

महाराष्ट्र में यूसीसी और जन-परामर्श की ज़रूरत

महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की कोशिशों पर मौलाना रशीदी ने कहा कि संविधान के अनुसार राज्यों को यूसीसी लागू करने का अधिकार है। किंतु उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इसे लागू करने से पूर्व राज्य के सभी वर्गों और समुदायों की राय लेना अनिवार्य है। बिना व्यापक जन-परामर्श के इसे थोपना उचित नहीं होगा। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि मुस्लिम समुदाय के अधिकारों का सम्मान सुनिश्चित किया जाए।

धार्मिक खर्च में समानता की माँग

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मौलाना रशीदी ने स्वीकार किया कि पहले की सरकारों के दौर में कुछ मुस्लिम युवा गलत रास्ते पर चले गए थे और अब बदलाव आया है। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि सरकार मंदिरों, कांवड़ यात्रा, दिवाली या तीर्थ यात्राओं पर सार्वजनिक धन खर्च करती है, तो कब्रिस्तानों की बाउंड्री वॉल जैसी बुनियादी सुविधाओं पर भी समान ध्यान दिया जाना चाहिए। उनके अनुसार सरकार को सभी धार्मिक समुदायों के साथ एकसमान व्यवहार करना चाहिए।

वक्फ बोर्ड विवाद और सर्वोच्च न्यायालय

उत्तर प्रदेश में वक्फ कानून के तहत वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने के प्रस्ताव पर मौलाना रशीदी ने कहा कि यह मामला अभी सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए किसी भी तरह की जल्दबाज़ी उचित नहीं होगी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अन्य धार्मिक संस्थाओं या मंदिर प्रबंधन समितियों में मुसलमानों को सदस्य नहीं बनाया जाता, तो वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने की आवश्यकता क्यों है। उनके अनुसार यह एक बड़ा और जायज़ सवाल है जिसका जवाब सरकार को देना होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो तेहरान और वाशिंगटन दोनों से संतुलन साधती है। घरेलू स्तर पर, विपक्ष पर 'नरम हिंदुत्व' का आरोप लगाना यह दर्शाता है कि अल्पसंख्यक समुदाय खुद को राजनीतिक रूप से अनाथ महसूस कर रहा है। वक्फ और यूसीसी पर उनके सवाल वैध हैं, लेकिन व्यापक संवाद के बिना ये केवल प्रतिक्रियात्मक राजनीति बनकर रह जाते हैं।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना साजिद रशीदी ने ट्रंप के बारे में क्या कहा?
मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप के बयानों पर भरोसा नहीं किया जा सकता क्योंकि वे समय-समय पर अपना रुख बदलते रहे हैं। उन्होंने भारत और प्रधानमंत्री मोदी को लेकर भी ट्रंप के परस्पर विरोधी बयानों का उदाहरण दिया।
ईरान को लेकर मौलाना रशीदी का क्या रुख है?
मौलाना रशीदी ने कहा कि ईरान को अपने शीर्ष नेताओं पर हुए हमलों का जवाब देना चाहिए और अमेरिका तथा इज़रायल के खिलाफ कड़ा रुख अपनाना चाहिए। उनके अनुसार, ईरान का बार-बार अमेरिकी आश्वासनों पर भरोसा करना समझ से परे है।
महाराष्ट्र में यूसीसी पर मौलाना रशीदी की क्या राय है?
मौलाना रशीदी ने कहा कि संविधान के अनुसार राज्यों को यूसीसी लागू करने का अधिकार है, लेकिन इसे लागू करने से पहले सभी वर्गों और समुदायों का व्यापक जन-परामर्श अनिवार्य है। बिना सहमति के इसे थोपना उचित नहीं होगा।
वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों के प्रस्ताव पर उनका क्या कहना है?
मौलाना रशीदी ने कहा कि यह मामला अभी सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए सरकार को अदालत का अंतिम फैसला आने तक प्रतीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मंदिर प्रबंधन समितियों में मुसलमानों को जगह नहीं दी जाती, तो वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की क्यों ज़रूरत है।
राम मंदिर चंदा विवाद पर विपक्ष की चुप्पी को लेकर उन्होंने क्या कहा?
मौलाना रशीदी ने कहा कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी नरम हिंदुत्व की राजनीति की ओर बढ़ रही हैं और हिंदू मतदाताओं को नाराज़ न करने के लिए इस विवाद पर चुप हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सच को राजनीतिक लाभ-हानि की परवाह किए बिना सामने रखना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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