ईरान-अमेरिका वार्ता: पेजेश्कियन बोले — 'तय दायित्वों का पालन ही सफलता की कुंजी'
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने 23 जून 2026 को स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ चल रही परमाणु वार्ता की सफलता पूरी तरह इस बात पर टिकी है कि दोनों पक्ष 'तय दायित्वों का पूरी निष्ठा से पालन' करें। तेहरान लंबे समय से 'प्रतिबद्धता के बदले प्रतिबद्धता' के सिद्धांत पर जोर देता रहा है, और पेजेश्कियन केताज़ा बयान ने इस रुख को एक बार फिर रेखांकित किया है।
पेजेश्कियन का एक्स पोस्ट: क्या कहा राष्ट्रपति ने
राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में लिखा, 'वार्ता की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि जिन दायित्वों पर सहमति जताई है, उनका पालन पूरी निष्ठा से किया जाए। पूर्ण प्रतिबद्धता दिखाई जाए।' उन्होंने आगे जोड़ा, 'इस दिशा में प्रगति का आकलन स्वीकृत जिम्मेदारियों के व्यावहारिक अनुपालन के आधार पर किया जाएगा। सहमत टेक्स्ट से बाहर दिए गए बयान वार्ता को आगे बढ़ाने में मदद नहीं करते।'
हालांकि पेजेश्कियन ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनका इशारा किस बयान की ओर था, लेकिन पिछले 48 घंटों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कई टिप्पणियों का ईरानी अधिकारियों ने खंडन किया है। इनमें यह दावा भी शामिल है कि ईरान परमाणु निरीक्षणों की अनुमति देने पर सहमत हो गया है और जारी किए जाने वाले किसी भी धन का उपयोग अमेरिकी कृषि उत्पादों की खरीद के लिए होगा।
गालीबाफ का कड़ा रुख: बातचीत भी संघर्ष का हिस्सा
इस बीच, स्विट्जरलैंड से लौटे ईरानी संसद के अध्यक्ष बाघेर गालीबाफ ने वार्ता को संघर्ष का ही एक विस्तार बताया। विमान में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, 'युद्ध के मैदान में मिली सफलता तब तक स्थायी राजनीतिक और कानूनी उपलब्धि नहीं बनती, जब तक उसे कूटनीति के जरिए आगे नहीं बढ़ाया जाए।' गालीबाफ ने स्पष्ट किया, 'बातचीत भी लड़ाई का एक तरीका है और संघर्ष को आगे बढ़ाने का जरिया। ईरान वार्ता को कमजोरी नहीं, बल्कि अपने हितों की रक्षा के लिए अपनाई गई रणनीति के रूप में देखता है।'
होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नया रुख
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर गालीबाफ ने एक महत्वपूर्ण संकेत दिया — यह अहम समुद्री मार्ग अब युद्ध-पूर्व स्थिति में नहीं लौटेगा। उनके अनुसार इसका प्रबंधन आगे ईरान अपने तरीके से करेगा, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन जारी रहेगा। यह बयान वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस जलमार्ग से दुनिया के कच्चे तेल का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है।
अमेरिका पर भरोसे का सवाल
स्विट्जरलैंड में अमेरिका के साथ तकनीकी वार्ता के पहले दौर के बाद गालीबाफ ने अमेरिका पर अविश्वास को बेबाकी से जाहिर किया। उन्होंने कहा, 'हमने कभी अमेरिकियों पर भरोसा नहीं किया, आज भी नहीं करते और भविष्य में भी सावधान रहना ही समझदारी होगी।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच परमाणु समझौते की संभावना को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उम्मीदें और आशंकाएं दोनों बनी हुई हैं।
आगे की राह
ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता का यह दौर नाजुक मोड़ पर है। तेहरान का 'प्रतिबद्धता के बदले प्रतिबद्धता' का सिद्धांत और वाशिंगटन की घोषणाओं पर ईरानी खंडन यह संकेत देते हैं कि दोनों पक्षों के बीच सार्वजनिक बयानबाजी और वार्ता-मेज पर की जा रही बातचीत में अभी भी गहरी खाई है। आने वाले हफ्तों में वार्ता की अगली कड़ी यह तय करेगी कि यह कूटनीतिक प्रयास किस दिशा में जाता है।