पीडीए यात्रा पर BJP का पलटवार: 'तरबूज की प्रकृति' वाले अखिलेश जनता को गुमराह नहीं कर पाएंगे
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेताओं ने 24 सितंबर 2026 को समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव की रायबरेली से शुरू हुई पीडीए रथ यात्रा पर कड़ा हमला बोला। BJP नेताओं ने आरोप लगाया कि यह यात्रा लोगों को भ्रमित करने का प्रयास है और जनता सपा नेता का 'असली चेहरा' भली-भांति पहचानती है।
भाजपा सांसद प्रदीप वर्मा का 'तरबूज' वाला तंज
BJP सांसद और उत्तर प्रदेश के सह प्रभारी प्रदीप कुमार वर्मा ने पीडीए यात्रा पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अखिलेश यादव चुनाव के समय भगवान कृष्ण, बजरंगबली और भगवान राम का रूप धारण कर लेते हैं, लेकिन उनकी प्रकृति 'तरबूज जैसी' है — ऊपर से कुछ और, भीतर से कुछ और। उनके अनुसार, सपा की राजनीति का मूल आधार केवल एक समाज विशेष और एक धर्म विशेष का तुष्टीकरण रही है। वर्मा ने कहा, 'बार-बार नाटक कर, अपने चेहरे पर मुखौटा लगाकर जनता को ठगा नहीं जा सकता।'
वर्मा ने आगे दावा किया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में राष्ट्रवाद की लहर चल रही है, जिसके सामने ऐसी यात्राएं प्रभावहीन रहेंगी।
मुकेश सहनी के बयान पर BJP की प्रतिक्रिया
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी के विवादित बयान पर भी BJP सांसद प्रदीप कुमार वर्मा ने तीखा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता सहनी को पहले ही 'ठिकाने लगा चुकी है' और ऐसे नेता हिंसा की भाषा बोलकर भारत को अशांत करने का सपना देखते हैं। वर्मा ने आरोप लगाया कि इस तरह के बयान देश को नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसी अस्थिरता की ओर धकेलने की सोची-समझी योजना का हिस्सा हैं।
नकवी का निशाना: पीडीए की परिभाषा तय करें पहले
BJP के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने अखिलेश यादव की यात्रा को शुभकामनाएं देते हुए भी चुटीला कटाक्ष किया। नकवी ने कहा कि सरकार बनाने की इच्छा रखना कोई बुरी बात नहीं, लेकिन सपा नेता पहले पीडीए की स्पष्ट परिभाषा तो तय कर लें। उनके अनुसार, हर पड़ाव पर पीडीए का अर्थ बदलने से जनता में भ्रम की स्थिति बनती है।
नकवी ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, 'इस यात्रा के तार में अभी से शॉर्ट सर्किट दिखाई दे रहा है — वही शॉर्ट सर्किट उन्हें झटके पर झटका दे रही है।'
राजनीतिक संदर्भ: यूपी की राजनीति में पीडीए की अहमियत
गौरतलब है कि अखिलेश यादव ने पिछड़े (P), दलित (D) और अल्पसंख्यक (A) वर्गों को एकजुट करने के उद्देश्य से पीडीए गठजोड़ की अवधारणा को अपनी राजनीतिक रणनीति का केंद्र बनाया है। रायबरेली से शुरू हुई यह रथ यात्रा इसी कड़ी का हिस्सा मानी जा रही है। यह ऐसे समय में आई है जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की आहटें तेज होने लगी हैं और BJP तथा सपा दोनों अपनी-अपनी जमीन मजबूत करने में जुटी हैं।
BJP का यह पलटवार संकेत देता है कि पीडीए यात्रा को सत्तारूढ़ दल राजनीतिक रूप से कितनी गंभीरता से ले रहा है। आने वाले दिनों में यात्रा जैसे-जैसे अन्य जिलों में पहुँचेगी, राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और तेज होने की संभावना है।