8 नवंबर 2026
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अखिलेश यादव की पीडीए यात्रा पर यूपी मंत्रियों का पलटवार, बोले — 'यह सिर्फ चुनावी जुमला है'

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अखिलेश यादव की पीडीए यात्रा पर यूपी मंत्रियों का पलटवार, बोले — 'यह सिर्फ चुनावी जुमला है'

सारांश

अखिलेश यादव ने रायबरेली से 'पीडीए यात्रा' शुरू की — और भाजपा ने तत्काल पलटवार करते हुए इसे 'परिभाषाहीन जुमला' बताया। 2027 के उत्तर प्रदेश चुनाव का असली दंगल अभी से शुरू हो गया है।

मुख्य बातें

अखिलेश यादव ने 24 सितंबर 2026 को रायबरेली से 'पीडीए यात्रा' की शुरुआत की।
सपा कार्यकर्ताओं ने रायबरेली में पोस्टर लगाए जिनमें अखिलेश को भगवान राम और भगवान कृष्ण के रूप में दर्शाया गया।
मंत्री दयाशंकर सिंह ने पीडीए को 'जुमला' बताया, कहा — अखिलेश खुद इसकी परिभाषा को लेकर भ्रमित हैं।
मंत्री कपिलदेव अग्रवाल ने आरोप लगाया कि अखिलेश साढ़े चार साल सिर्फ ट्वीट करते रहे।
मंत्री ओपी राजभर ने रायबरेली के सीओ-विवाद का ज़िक्र करते हुए यात्रा को 'बेलगाम कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने की कोशिश' बताया।
यह यात्रा 2027 यूपी विधानसभा चुनावों से पहले सपा की राजनीतिक तैयारी का हिस्सा है।

समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को उत्तर प्रदेश के रायबरेली से पार्टी की 'पीडीए यात्रा' की शुरुआत की। 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले शुरू हुई इस यात्रा पर उत्तर प्रदेश सरकार के कई मंत्रियों ने तीखी प्रतिक्रिया दी और इसे महज एक 'चुनावी नारा' बताया।

पोस्टर विवाद और यात्रा की शुरुआत

यात्रा आरंभ होने से पहले सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने रायबरेली में कई स्थानों पर पोस्टर और होर्डिंग लगाए। इन पोस्टरों में अखिलेश यादव को भगवान राम और भगवान कृष्ण के रूप में चित्रित किया गया था। साथ ही सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव और संविधान निर्माता डॉ. बी.आर. अंबेडकर की तस्वीरें भी इन पोस्टरों में शामिल थीं। इन पोस्टरों को लेकर सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने तत्काल आपत्ति जताई।

मंत्रियों की तीखी प्रतिक्रिया

उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि सपा को प्रदेश की जनता के सामने यह स्पष्ट करना होगा कि वे वास्तव में 'पीडीए' किसे कह रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा अब तक 'पीडीए' को परिभाषित करने में नाकाम रही है और केवल अपना रूप बदलकर जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रही है।

मंत्री कपिलदेव अग्रवाल ने कहा कि अखिलेश यादव को पीडीए, जातियों, धर्मों, राम मंदिर जैसे मुद्दों की चिंता केवल चुनाव नज़दीक आने पर होती है। उन्होंने तंज कसा कि 'पिछले साढ़े चार वर्षों तक वे केवल ट्वीट करते रहे।' अग्रवाल ने दावा किया कि राज्य में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति जनता का भरोसा लगातार बढ़ रहा है।

मंत्री दयाशंकर सिंह ने सीधे तौर पर कहा कि 'पीडीए सिर्फ एक जुमला है।' उन्होंने यह भी कहा कि खुद अखिलेश यादव इस शब्द की परिभाषा को लेकर भ्रमित हैं — 'कभी वे कहते हैं पी का मतलब पिछड़ा है, कभी पंडित; कभी ए का मतलब अल्पसंख्यक बताते हैं, कभी आधी आबादी।'

रायबरेली में यात्रा को लेकर सवाल

मंत्री ओपी राजभर ने अखिलेश यादव के रायबरेली दौरे पर निशाना साधते हुए कहा कि वे वहाँ अपने 'बेलगाम कार्यकर्ताओं' का मनोबल बढ़ाने गए हैं। उन्होंने एक पुरानी घटना का उल्लेख किया जिसमें सपा के जिला अध्यक्ष ने एक सीओ (सर्कल ऑफिसर) को 'चूड़ियाँ पहनने' को कहा था। ओपी राजभर ने कहा कि इस तरह की 'गुंडई' की संस्कृति ही सपा के लिए 2027 में घातक साबित होगी।

राजनीतिक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर सभी प्रमुख दलों ने अपनी जमीनी तैयारियाँ तेज़ कर दी हैं। गौरतलब है कि सपा ने 2024 के लोकसभा चुनावों में 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति के तहत प्रदेश में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया था। भाजपा नेतृत्व अब इसी रणनीति को 'परिभाषाहीन' और 'भ्रामक' साबित करने में जुटा है।

आने वाले महीनों में यह यात्रा कितना जनसमर्थन जुटा पाती है और सपा 'पीडीए' को किस रूप में ठोस राजनीतिक एजेंडे में बदलती है — यही तय करेगा कि 2027 में यह यात्रा सियासी इतिहास बनाती है या केवल एक और रैली बनकर रह जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और भाजपा इसीलिए इसे 'परिभाषाहीन' बताने में पूरी ताकत लगा रही है। मंत्रियों की यह एकसुरी प्रतिक्रिया आकस्मिक नहीं, बल्कि एक सुनियोजित काउंटर-नैरेटिव की शुरुआत है। असली प्रश्न यह है कि क्या सपा 'पीडीए' को एक ठोस, मापनीय राजनीतिक एजेंडे में बदल सकती है — या यह केवल एक लोकप्रिय संक्षिप्तीकरण बनकर रह जाएगा जिसकी कोई स्थायी परिभाषा न हो। पोस्टर-विवाद यह भी दर्शाता है कि सपा के ज़मीनी कार्यकर्ता अभी भी ऐसे प्रतीकात्मक कदम उठाते हैं जो पार्टी की केंद्रीय रणनीति को नुकसान पहुँचा सकते हैं।
RashtraPress
8 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अखिलेश यादव की 'पीडीए यात्रा' क्या है?
'पीडीए यात्रा' समाजवादी पार्टी की एक राजनीतिक जनसंपर्क यात्रा है जो 24 सितंबर 2026 को रायबरेली से शुरू हुई। इसका उद्देश्य 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को एकजुट करना बताया जा रहा है।
यूपी मंत्रियों ने पीडीए यात्रा को 'जुमला' क्यों कहा?
मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि अखिलेश यादव खुद 'पीडीए' की परिभाषा को लेकर असंगत बयान देते रहे हैं — कभी 'पी' का मतलब पिछड़ा, कभी पंडित बताया। उनका तर्क है कि स्पष्ट परिभाषा के बिना यह केवल एक चुनावी नारा है, कोई ठोस राजनीतिक एजेंडा नहीं।
रायबरेली में सपा के पोस्टरों पर क्यों हुआ विवाद?
यात्रा से पहले लगाए गए पोस्टरों में अखिलेश यादव को भगवान राम और भगवान कृष्ण के रूप में चित्रित किया गया था। भाजपा नेताओं ने इसे धार्मिक प्रतीकों के राजनीतिक दुरुपयोग के रूप में देखा और इस पर आपत्ति जताई।
यह यात्रा 2027 चुनावों के लिए कितनी महत्वपूर्ण है?
सपा ने 2024 के लोकसभा चुनावों में पीडीए रणनीति के तहत उत्तर प्रदेश में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया था। 2027 की विधानसभा जीत के लिए इसी आधार को व्यापक बनाना सपा की प्राथमिकता है, और यह यात्रा उसी दिशा में पहला बड़ा कदम मानी जा रही है।
ओपी राजभर ने रायबरेली सीओ-विवाद का क्यों जिक्र किया?
मंत्री ओपी राजभर ने आरोप लगाया कि रायबरेली में सपा के जिला अध्यक्ष ने एक सर्कल ऑफिसर को 'चूड़ियाँ पहनने' की बात कही थी और उन पर हमले की नौबत आई थी। उनका कहना था कि अखिलेश इसी तरह के 'बेलगाम' कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने रायबरेली जा रहे हैं, जो 2027 में पार्टी के लिए घातक साबित होगा।
राष्ट्र प्रेस
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