पीडीए रथ यात्रा: अखिलेश यादव बछरावां से रायबरेली तक, BJP पर पिछड़ों के अपमान का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को बछरावां से रायबरेली तक पीडीए रथ यात्रा की शुरुआत की। सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने प्रयागराज में कहा कि यह यात्रा उत्तर प्रदेश के पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज के सम्मान की बहाली का आगाज़ है। यूपी में विधानसभा चुनाव से पहले इस यात्रा के साथ-साथ पोस्टर वार भी तेज़ हो गया है।
पीडीए रथ यात्रा का उद्देश्य
सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद के अनुसार, उत्तर प्रदेश में पिछड़े वर्ग के साथ लगातार अन्याय हो रहा है — न केवल आरक्षण के मामले में, बल्कि सामाजिक सम्मान के स्तर पर भी। उन्होंने कहा, 'जिस तरह से रायबरेली में हमारे पिछड़ी जाति के विधायकों को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के इशारे पर प्रशासन द्वारा अपमानित करने का काम किया गया, वह बेहद निंदनीय है। इसीलिए सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने निर्णय लिया है कि पीडीए रथ यात्रा की शुरुआत वहीं से होगी, जहाँ पिछड़ों को अपमानित किया गया।'
अखिलेश यादव ने बछरावां से यात्रा शुरू करने के बाद रायबरेली पहुँचकर उस विधायक के आवास पर जाकर चाय पी, जिन्हें कथित तौर पर प्रशासनिक स्तर पर अपमानित किए जाने की बात सामने आई थी।
पोस्टर वार: श्रीकृष्ण बनाम 'माफिया' का विवाद
यात्रा से पहले रायबरेली में एक पोस्टर को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया, जिसमें अखिलेश यादव को श्रीकृष्ण के रूप में चित्रित किया गया था। दूसरी तरफ, BJP ने 'अखिलेश के माफिया, माफिया के अखिलेश' जैसे नारों वाले पोस्टर लगाए। इस पर सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने कहा, 'कार्यकर्ताओं, पीडीए समाज और आम जनता की जो भावनाएँ होती हैं, वे उन्हें अपने पोस्टरों में व्यक्त करते हैं — यह उनकी अपनी श्रद्धा है। समाजवादी पार्टी इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेगी।'
BJP पर प्रत्यक्ष हमला
फखरुल हसन चांद ने BJP पर सीधा प्रहार करते हुए कहा कि जो लोग अखिलेश यादव की पिछड़ों की लड़ाई से बेचैन हो रहे हैं, वे वही हैं जो दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों को अपमानित करने और उनका हक छीनने का काम करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि सपा और पीडीए समाज BJP के पोस्टरों से विचलित होने वाला नहीं है।
आगे क्या होगा
यह रथ यात्रा उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सपा की पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक (PDA) गठजोड़ रणनीति की एक बड़ी कड़ी मानी जा रही है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब प्रदेश में जातीय समीकरण राजनीतिक दलों के लिए निर्णायक कारक बने हुए हैं। आने वाले हफ्तों में इस यात्रा के और चरण शुरू होने की संभावना है, जिससे चुनावी तापमान और बढ़ेगा।