जोधपुर एम्स रेजिडेंट डॉ. रामनरेश यादव की मौत: ओपीडी ठप, जांच समिति गठित
सारांश
मुख्य बातें
जोधपुर एम्स में एनेस्थीसिया विभाग के 29 वर्षीय रेजिडेंट डॉक्टर रामनरेश यादव की मंगलवार, 23 सितंबर 2026 को ड्यूटी के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद संस्थान में गहरा तनाव व्याप्त है। रेजिडेंट डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ ने विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया है, जिसके चलते ओपीडी सेवाएं बाधित हो गई हैं और रिपोर्टों के अनुसार सर्जरी व अन्य मेडिकल सेवाओं पर भी असर पड़ा है।
मौत की परिस्थितियाँ
रिपोर्टों के अनुसार, डॉ. यादव मंगलवार को ड्यूटी के दौरान अचानक ऑपरेशन थिएटर (ओटी) से चले गए। दोपहर 1 बजे उन्हें एम्स के रेस्टरूम के बाथरूम में बेहोश हालत में पाया गया। साथी डॉक्टरों ने तत्काल प्राथमिक उपचार देने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।
पुलिस को सूचित किया गया और शव को बाद में एम्स की मोर्चरी में रखा गया। परिजनों को भी सूचना दे दी गई। रिपोर्टों के मुताबिक, घटनास्थल पर एक इंजेक्शन और एक सिरिंज मिली, जिससे ड्रग ओवरडोज की प्रारंभिक आशंका जताई जा रही है। हालांकि, मौत का सही कारण अभी जारी जांच और मेडिकल परीक्षण पर निर्भर है।
विरोध-प्रदर्शन और मांगें
डॉ. यादव की मौत के बाद बुधवार देर रात रेजिडेंट डॉक्टरों ने कैंपस में कैंडल लाइट मार्च निकाला और अपने साथी को श्रद्धांजलि दी। प्रदर्शनकारियों ने एंट्री गेट पर व्हीलचेयर और स्ट्रेचर रखकर रास्ता बाधित किया। एम्स प्रशासन को कैंपस के पब्लिक-एड्रेस सिस्टम के ज़रिए मरीजों को ओपीडी बाधित होने की सूचना देनी पड़ी।
प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों ने मौत के हालात की निष्पक्ष एवं गहन जांच, जिम्मेदार व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध कार्रवाई और सोशल मीडिया पर चर्चित ₹5 करोड़ के मुआवजे की माँग रखी है। गौरतलब है कि ये मुआवज़े की माँग सोशल मीडिया पर उठाई जा रही है, न कि किसी आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल द्वारा।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
एम्स प्रशासन ने डीन (एकेडमिक) की अध्यक्षता में एक आंतरिक जांच समिति गठित की है। रेजिडेंट डॉक्टरों की शिकायतों को दूर करने के लिए एक अलग समिति भी बनाई गई है। पुलिस इस मामले में स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है। इन उपायों के बावजूद विरोध-प्रदर्शन अभी भी जारी है।
डॉक्टरों की व्यथा और सोशल मीडिया
सोशल मीडिया पर एक रेजिडेंट डॉक्टर का भावुक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें वे साथियों, फैकल्टी और शिक्षकों से एकजुट होकर आवाज़ उठाने की अपील कर रहे हैं। वीडियो में रेजिडेंट डॉक्टरों की लंबी ड्यूटी और काम के दबाव से जुड़ी चिंताएँ भी उजागर की गई हैं। डॉक्टर यह भी स्वीकार करते हैं कि डर के कारण कई साथी चुप रहते हैं और खुद भी समय पर आवाज़ न उठाने के लिए खेद व्यक्त करते हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में रेजिडेंट डॉक्टरों की कार्यस्थल सुरक्षा और ओवरवर्क की समस्या पहले से ही बहस के केंद्र में है।
डॉ. यादव: एक परिचय
डॉ. रामनरेश यादव मूल रूप से अलवर के बड़ा जोड़ इलाके के रहने वाले थे। उन्होंने एम्स जोधपुर से एमबीबीएस पूरा किया था और उसी संस्थान में एनेस्थीसिया में पोस्टग्रेजुएट की पढ़ाई कर रहे थे। उनके बड़े भाई एम्स दिल्ली में डॉक्टर बताए जाते हैं, जबकि उनके पिता पैतृक गाँव में रहते हैं। उनकी असामयिक मौत से साथी डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ में गहरा दुख और आक्रोश है।
जांच समितियों की रिपोर्ट और पुलिस की विवेचना के नतीजे ही इस मामले की दिशा तय करेंगे।