पटना पीएमसीएच में डॉक्टरों पर रॉड से हमला, जेडीए अध्यक्ष बोले — अस्पताल में भी सुरक्षित नहीं हैं डॉक्टर
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीएमसीएच) में 20 अगस्त 2026 को जूनियर डॉक्टरों पर बर्बर हमले की घटना ने चिकित्सा जगत में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया। मरीज के परिजनों द्वारा अस्पताल परिसर में रॉड से हमला किए जाने के बाद पीएमसीएच जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (जेडीए) ने तत्काल हड़ताल का ऐलान किया, हालाँकि प्रबंधन के साथ बातचीत के बाद डॉक्टर काम पर लौट आए।
घटनाक्रम: कैसे भड़की हिंसा
पीएमसीएच के सुपरिंटेंडेंट डॉ. राजीव कुमार सिंह ने बताया कि बुधवार रात करीब 10 बजे इमरजेंसी वार्ड में भर्ती एक गंभीर रूप से बीमार मरीज की मृत्यु हो गई। मरीज के परिजनों ने इलाज से पूर्व लिखित सहमति दी थी, जिसमें उन्होंने मरीज की गंभीर स्थिति को स्वीकार किया था। मृत्यु के कुछ घंटों बाद परिजनों के कुछ सदस्यों ने ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर के साथ हाथापाई शुरू कर दी, जिन्हें मौके पर मौजूद गार्ड ने किसी तरह बचाया।
डॉ. सिंह के अनुसार, इसके बाद आरोपी कुछ अन्य लोगों को साथ लेकर दोबारा अस्पताल परिसर में घुस आए। उस समय कुछ मेडिकल छात्र पास की चाय की दुकान पर बैठे थे, जिन पर हमला कर दिया गया।
जेडीए अध्यक्ष का बयान और गंभीर आरोप
जेडीए अध्यक्ष डॉ. सत्यम ने बताया कि जूनियर डॉक्टर लाइब्रेरी से निकलकर पास की चाय की दुकान पर गए थे। इमरजेंसी वार्ड में पहले हुई बहस को बातचीत से शांत करा दिया गया था, लेकिन आरोपियों ने इसे प्रतिष्ठा का मुद्दा बना लिया और 10 से 15 बाहरी लोगों को बुला लिया। डॉ. सत्यम ने आरोप लगाया कि चाय की दुकान पर मौजूद डॉक्टरों पर रॉड से हमला किया गया।
घटना में घायल डॉक्टर की स्थिति गंभीर बताई गई है और उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया है। जेडीए अध्यक्ष ने बताया कि घायल डॉक्टर की उस दिन परीक्षा भी थी, जिसकी उन्होंने तैयारी की थी, लेकिन चोट के कारण वह परीक्षा नहीं दे सके।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
डॉ. सत्यम ने कहा कि यदि अस्पताल परिसर में डॉक्टर सुरक्षित नहीं हैं, तो भविष्य में इससे भी गंभीर घटनाएँ हो सकती हैं। उन्होंने माँग की है कि अज्ञात हमलावरों के विरुद्ध संस्थागत एफआईआर दर्ज की जाए और अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को मज़बूत किया जाए। उन्होंने अस्पताल में तैनात गार्डों की भूमिका और अधिकारों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सुरक्षा कर्मचारियों को पर्याप्त अधिकार दिए जाने चाहिए, ताकि किसी भी हमलावर को समय रहते रोका जा सके।
हड़ताल और प्रबंधन की प्रतिक्रिया
हमले की खबर फैलते ही पीएमसीएच के जूनियर डॉक्टरों ने तत्काल हड़ताल शुरू कर दी। पीएमसीएच प्रबंधन के साथ बातचीत के बाद जूनियर डॉक्टरों ने फिलहाल काम पर लौटने का फैसला किया है। हालाँकि, डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि अस्पताल में सुरक्षा उनकी प्रमुख चिंता बनी हुई है और जब तक ठोस कदम नहीं उठाए जाते, असंतोष बरकरार रहेगा।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर बहस तेज़ है। गौरतलब है कि कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना के बाद से अस्पतालों में चिकित्सकों की सुरक्षा एक राष्ट्रीय मुद्दा बन चुकी है। पीएमसीएच प्रशासन पर दबाव है कि वह संस्थागत एफआईआर दर्ज कराए और दीर्घकालिक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करे।