20 अगस्त 2026
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पटना पीएमसीएच में डॉक्टरों पर रॉड से हमला, जेडीए अध्यक्ष बोले — अस्पताल में भी सुरक्षित नहीं हैं डॉक्टर

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पटना पीएमसीएच में डॉक्टरों पर रॉड से हमला, जेडीए अध्यक्ष बोले — अस्पताल में भी सुरक्षित नहीं हैं डॉक्टर

सारांश

पटना के पीएमसीएच में मरीज के परिजनों ने रात को 10-15 बाहरी लोगों के साथ आकर जूनियर डॉक्टरों पर रॉड से हमला किया। एक डॉक्टर आईसीयू में हैं और अपनी परीक्षा भी नहीं दे सके। जेडीए ने संस्थागत एफआईआर और सुरक्षा सुधार की माँग के साथ हड़ताल शुरू की, जो बाद में बातचीत के बाद वापस ली गई।

मुख्य बातें

पटना पीएमसीएच में 20 अगस्त 2026 की रात मरीज के परिजनों ने जूनियर डॉक्टरों पर रॉड से हमला किया।
हमले में घायल डॉक्टर को आईसीयू में भर्ती कराया गया; चोट के कारण वह अपनी परीक्षा भी नहीं दे सके।
आरोपियों ने पहले की बहस को 'प्रतिष्ठा का मुद्दा' बनाकर 10 से 15 बाहरी लोग बुलाए और चाय की दुकान पर हमला किया।
जेडीए ने संस्थागत एफआईआर दर्ज करने और अस्पताल परिसर में सुरक्षा मज़बूत करने की माँग की।
प्रबंधन से बातचीत के बाद जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल वापस ली, लेकिन सुरक्षा चिंता बरकरार है।

बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीएमसीएच) में 20 अगस्त 2026 को जूनियर डॉक्टरों पर बर्बर हमले की घटना ने चिकित्सा जगत में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया। मरीज के परिजनों द्वारा अस्पताल परिसर में रॉड से हमला किए जाने के बाद पीएमसीएच जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (जेडीए) ने तत्काल हड़ताल का ऐलान किया, हालाँकि प्रबंधन के साथ बातचीत के बाद डॉक्टर काम पर लौट आए।

घटनाक्रम: कैसे भड़की हिंसा

पीएमसीएच के सुपरिंटेंडेंट डॉ. राजीव कुमार सिंह ने बताया कि बुधवार रात करीब 10 बजे इमरजेंसी वार्ड में भर्ती एक गंभीर रूप से बीमार मरीज की मृत्यु हो गई। मरीज के परिजनों ने इलाज से पूर्व लिखित सहमति दी थी, जिसमें उन्होंने मरीज की गंभीर स्थिति को स्वीकार किया था। मृत्यु के कुछ घंटों बाद परिजनों के कुछ सदस्यों ने ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर के साथ हाथापाई शुरू कर दी, जिन्हें मौके पर मौजूद गार्ड ने किसी तरह बचाया।

डॉ. सिंह के अनुसार, इसके बाद आरोपी कुछ अन्य लोगों को साथ लेकर दोबारा अस्पताल परिसर में घुस आए। उस समय कुछ मेडिकल छात्र पास की चाय की दुकान पर बैठे थे, जिन पर हमला कर दिया गया।

जेडीए अध्यक्ष का बयान और गंभीर आरोप

जेडीए अध्यक्ष डॉ. सत्यम ने बताया कि जूनियर डॉक्टर लाइब्रेरी से निकलकर पास की चाय की दुकान पर गए थे। इमरजेंसी वार्ड में पहले हुई बहस को बातचीत से शांत करा दिया गया था, लेकिन आरोपियों ने इसे प्रतिष्ठा का मुद्दा बना लिया और 10 से 15 बाहरी लोगों को बुला लिया। डॉ. सत्यम ने आरोप लगाया कि चाय की दुकान पर मौजूद डॉक्टरों पर रॉड से हमला किया गया।

घटना में घायल डॉक्टर की स्थिति गंभीर बताई गई है और उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया है। जेडीए अध्यक्ष ने बताया कि घायल डॉक्टर की उस दिन परीक्षा भी थी, जिसकी उन्होंने तैयारी की थी, लेकिन चोट के कारण वह परीक्षा नहीं दे सके।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

डॉ. सत्यम ने कहा कि यदि अस्पताल परिसर में डॉक्टर सुरक्षित नहीं हैं, तो भविष्य में इससे भी गंभीर घटनाएँ हो सकती हैं। उन्होंने माँग की है कि अज्ञात हमलावरों के विरुद्ध संस्थागत एफआईआर दर्ज की जाए और अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को मज़बूत किया जाए। उन्होंने अस्पताल में तैनात गार्डों की भूमिका और अधिकारों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सुरक्षा कर्मचारियों को पर्याप्त अधिकार दिए जाने चाहिए, ताकि किसी भी हमलावर को समय रहते रोका जा सके।

हड़ताल और प्रबंधन की प्रतिक्रिया

हमले की खबर फैलते ही पीएमसीएच के जूनियर डॉक्टरों ने तत्काल हड़ताल शुरू कर दी। पीएमसीएच प्रबंधन के साथ बातचीत के बाद जूनियर डॉक्टरों ने फिलहाल काम पर लौटने का फैसला किया है। हालाँकि, डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि अस्पताल में सुरक्षा उनकी प्रमुख चिंता बनी हुई है और जब तक ठोस कदम नहीं उठाए जाते, असंतोष बरकरार रहेगा।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर बहस तेज़ है। गौरतलब है कि कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना के बाद से अस्पतालों में चिकित्सकों की सुरक्षा एक राष्ट्रीय मुद्दा बन चुकी है। पीएमसीएच प्रशासन पर दबाव है कि वह संस्थागत एफआईआर दर्ज कराए और दीर्घकालिक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करे।

संपादकीय दृष्टिकोण

और संस्थागत सुरक्षा तंत्र विफल साबित हो रहा है। गार्ड मौजूद था, फिर भी आरोपी दोबारा परिसर में घुसकर हमला कर सके — यह सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामी को उजागर करता है। जेडीए की संस्थागत एफआईआर की माँग उचित है, क्योंकि व्यक्तिगत शिकायतें अक्सर दबाव में वापस ले ली जाती हैं। असली सवाल यह है कि क्या बिहार सरकार इस घटना को एक प्रणालीगत समस्या के रूप में देखेगी या महज़ एक स्थानीय विवाद मानकर टाल देगी।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएमसीएच पटना में डॉक्टरों पर हमला कैसे हुआ?
बुधवार रात एक मरीज की मृत्यु के बाद उसके परिजनों ने पहले इमरजेंसी वार्ड में ड्यूटी डॉक्टर से हाथापाई की, फिर 10 से 15 बाहरी लोगों को बुलाकर चाय की दुकान पर बैठे जूनियर डॉक्टरों पर रॉड से हमला किया। एक डॉक्टर गंभीर रूप से घायल हैं और आईसीयू में भर्ती हैं।
जेडीए ने क्या माँगें रखी हैं?
पीएमसीएच जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (जेडीए) ने अज्ञात हमलावरों के विरुद्ध संस्थागत एफआईआर दर्ज करने, अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था मज़बूत करने और गार्डों को पर्याप्त अधिकार देने की माँग की है।
क्या जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल अभी भी जारी है?
नहीं। पीएमसीएच प्रबंधन के साथ बातचीत के बाद जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल वापस लेकर काम पर लौटने का फैसला किया है। हालाँकि, उन्होंने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा उनकी प्रमुख चिंता बनी हुई है।
घायल डॉक्टर की स्थिति क्या है?
हमले में घायल डॉक्टर की स्थिति गंभीर बताई गई है और उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया है। चोट के कारण वह अपनी निर्धारित परीक्षा भी नहीं दे सके।
पीएमसीएच प्रबंधन ने इस घटना पर क्या कहा?
सुपरिंटेंडेंट डॉ. राजीव कुमार सिंह ने बताया कि मरीज के परिजनों ने इलाज से पहले लिखित सहमति दी थी और मरीज की गंभीर स्थिति से वाकिफ थे। प्रबंधन ने जूनियर डॉक्टरों से बातचीत कर हड़ताल समाप्त कराई, लेकिन सुरक्षा सुधार के ठोस उपायों की घोषणा अभी तक नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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