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पीएमसीएच में डॉक्टरों पर रॉड से हमला, जेडीए अध्यक्ष बोले — अस्पताल परिसर में भी नहीं है सुरक्षा

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पीएमसीएच में डॉक्टरों पर रॉड से हमला, जेडीए अध्यक्ष बोले — अस्पताल परिसर में भी नहीं है सुरक्षा

सारांश

पटना के पीएमसीएच में मरीज के परिजनों ने डॉक्टरों पर रॉड से हमला किया — एक डॉक्टर आईसीयू में है, दूसरा परीक्षा नहीं दे सका। जेडीए ने संस्थागत एफआईआर और सुरक्षा सुधार की माँग रखी है। बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में यह घटना डॉक्टरों की सुरक्षा के सवाल को एक बार फिर केंद्र में ला देती है।

मुख्य बातें

पीएमसीएच पटना में 20 अगस्त की रात मरीज के परिजनों ने डॉक्टरों पर रॉड से हमला किया।
एक घायल डॉक्टर को आईसीयू में भर्ती कराया गया; चोट के कारण वह अपनी परीक्षा भी नहीं दे सके।
आरोपियों ने कथित तौर पर 10 से 15 बाहरी लोगों को बुलाकर अस्पताल परिसर के बाहर चाय की दुकान पर हमला किया।
जेडीए ने अज्ञात हमलावरों के खिलाफ संस्थागत एफआईआर और अस्पताल में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की माँग की।
प्रबंधन से बातचीत के बाद जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल खत्म कर काम पर लौटने का निर्णय लिया, लेकिन सुरक्षा की चिंता बनी हुई है।

पटना के पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीएमसीएच) में 20 अगस्त को डॉक्टरों पर हुए हमले के बाद जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल शुरू कर दी। अस्पताल परिसर के बाहर चाय की दुकान पर मौजूद मेडिकल छात्रों पर रॉड से हमला किया गया, जिसमें एक डॉक्टर की हालत गंभीर बताई जा रही है और उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया है। बाद में पीएमसीएच प्रबंधन के साथ बातचीत के बाद जूनियर डॉक्टरों ने फिलहाल काम पर लौटने का निर्णय लिया, हालाँकि सुरक्षा की माँग अभी भी बनी हुई है।

घटनाक्रम: कैसे भड़की हिंसा

पीएमसीएच के सुपरिंटेंडेंट डॉ. राजीव कुमार सिंह ने बताया कि बुधवार रात करीब 10 बजे एक गंभीर रूप से बीमार मरीज की मौत हो गई। मरीज के परिजनों ने इलाज से पहले लिखित रूप में यह स्वीकार किया था कि उन्हें मरीज की गंभीर स्थिति की जानकारी है और वे इलाज के लिए सहमत हैं।

मृत्यु के कुछ घंटे बाद मरीज के कुछ रिश्तेदारों ने ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर के साथ हाथापाई शुरू कर दी। मौके पर मौजूद सुरक्षा गार्ड ने किसी तरह डॉक्टर को बचाया। डॉ. सिंह के अनुसार, इसके बाद आरोपी अन्य लोगों के साथ दोबारा अस्पताल परिसर में पहुँचे।

चाय की दुकान पर हमला, एक डॉक्टर आईसीयू में

पीएमसीएच जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (जेडीए) के अध्यक्ष डॉ. सत्यम ने बताया कि जूनियर डॉक्टर लाइब्रेरी से निकलकर पास की चाय की दुकान पर गए थे। इमरजेंसी वार्ड में पहले हुई बहस को बातचीत से शांत करा दिया गया था, लेकिन आरोपियों ने इसे प्रतिष्ठा का मुद्दा बना लिया और कथित तौर पर 10 से 15 बाहरी लोगों को बुला लिया।

डॉ. सत्यम के अनुसार, चाय की दुकान पर मौजूद डॉक्टरों पर रॉड से हमला किया गया। घायल डॉक्टर की स्थिति गंभीर है और उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया है। यह भी उल्लेखनीय है कि घायल डॉक्टर की परीक्षा थी, जिसकी उन्होंने तैयारी की थी, लेकिन चोट के कारण वह परीक्षा नहीं दे सके।

जेडीए की माँगें और सुरक्षा पर सवाल

जेडीए अध्यक्ष डॉ. सत्यम ने माँग की है कि अज्ञात हमलावरों के खिलाफ संस्थागत एफआईआर दर्ज की जाए और अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को मज़बूत किया जाए। उन्होंने अस्पताल में तैनात गार्डों की भूमिका और अधिकारों पर भी सवाल उठाए हैं — उनका कहना है कि सुरक्षा कर्मचारियों को पर्याप्त अधिकार दिए जाने चाहिए, ताकि किसी भी हमलावर को समय रहते रोका जा सके।

डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि अस्पताल परिसर में वे सुरक्षित नहीं हैं, तो भविष्य में इससे भी गंभीर घटना हो सकती है। गौरतलब है कि यह घटना ऐसे समय में आई है जब देशभर में डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर बहस जारी है।

हड़ताल खत्म, लेकिन चिंता बरकरार

पीएमसीएच प्रबंधन के साथ बातचीत के बाद जूनियर डॉक्टरों ने फिलहाल काम पर लौटने का फैसला किया है। हालाँकि, डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि अस्पताल में सुरक्षा उनकी प्रमुख चिंता बनी हुई है। बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में यह घटना प्रशासन और राज्य सरकार पर ठोस कार्रवाई का दबाव बनाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और हर बार आश्वासन के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। असली सवाल यह है कि बिहार का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल रात के समय बाहरी भीड़ को परिसर में घुसने से क्यों नहीं रोक सका। सुरक्षा गार्डों को 'पर्याप्त अधिकार' देने की माँग इस बात का संकेत है कि मौजूदा व्यवस्था में गार्ड खुद असहाय महसूस कर रहे हैं। जब तक संस्थागत जवाबदेही और कानूनी ढाँचा मज़बूत नहीं होगा, डॉक्टर हड़ताल करते रहेंगे और मरीज भुगतते रहेंगे।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएमसीएच पटना में डॉक्टरों पर हमला कैसे हुआ?
बुधवार रात करीब 10 बजे एक मरीज की मौत के बाद उसके परिजनों ने पहले ड्यूटी डॉक्टर से हाथापाई की, फिर कथित तौर पर 10 से 15 बाहरी लोगों को बुलाकर अस्पताल परिसर के बाहर चाय की दुकान पर मौजूद मेडिकल छात्रों पर रॉड से हमला किया। एक डॉक्टर की हालत गंभीर है और उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया है।
जेडीए ने पीएमसीएच प्रबंधन से क्या माँगें रखी हैं?
पीएमसीएच जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (जेडीए) ने अज्ञात हमलावरों के खिलाफ संस्थागत एफआईआर दर्ज करने, अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था मज़बूत करने और सुरक्षा गार्डों को पर्याप्त अधिकार देने की माँग की है।
क्या पीएमसीएच में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल खत्म हो गई?
हाँ, पीएमसीएच प्रबंधन के साथ बातचीत के बाद जूनियर डॉक्टरों ने फिलहाल हड़ताल खत्म कर काम पर लौटने का फैसला किया है। हालाँकि, उन्होंने स्पष्ट किया है कि अस्पताल में सुरक्षा उनकी प्रमुख चिंता बनी हुई है।
मरीज के परिजनों ने डॉक्टरों पर हमला क्यों किया?
एक गंभीर रूप से बीमार मरीज की मौत के बाद परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया, जबकि अस्पताल प्रबंधन के अनुसार परिजनों ने इलाज से पहले लिखित रूप में मरीज की गंभीर स्थिति की जानकारी स्वीकार की थी। इमरजेंसी वार्ड में पहले हुई बहस को शांत करा दिया गया था, लेकिन बाद में आरोपियों ने इसे प्रतिष्ठा का मुद्दा बनाकर बाहरी लोगों को बुला लिया।
पीएमसीएच में डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर आगे क्या होगा?
जेडीए ने चेतावनी दी है कि यदि ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में इससे भी गंभीर घटना हो सकती है। संस्थागत एफआईआर और सुरक्षा सुधार की माँगें प्रबंधन के सामने रखी गई हैं, और इन पर कार्रवाई की प्रतीक्षा है।
राष्ट्र प्रेस
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