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ईरान की कड़ी चेतावनी: दबाव में नहीं झुकेंगे, वार्ता के लिए वादों का पालन अनिवार्य

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ईरान की कड़ी चेतावनी: दबाव में नहीं झुकेंगे, वार्ता के लिए वादों का पालन अनिवार्य

सारांश

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने कहा है कि ईरानी जनता किसी भी दबाव में नहीं झुकेगी। उन्होंने अमेरिका के साथ संबंधों में वादों के पालन को बातचीत की आधारशिला बताया। अमेरिका की नीतियों पर चिंता व्यक्त करते हुए ईरान ने वार्ता के दूसरे दौर में शामिल होने से इनकार कर दिया है।

मुख्य बातें

ईरान के राष्ट्रपति ने दबाव में नहीं झुकने का संकल्प लिया है।
अमेरिका के साथ वार्ता का आधार वादों का पालन है।
ईरान की अनुपस्थिति का कारण अमेरिका की मांगें हैं।
युद्धविराम उल्लंघन के मामलों में ईरान ने अमेरिका की नीतियों की आलोचना की।

नई दिल्ली, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने स्पष्ट किया है कि ईरानी जनता किसी भी प्रकार के दबाव या बल के सामने नहीं झुकेगी। अमेरिका के साथ संबंधों के संदर्भ में उन्होंने यह बताया कि किसी भी प्रभावी बातचीत की नींव वादों के पालन पर निर्भर करती है।

पेजेशकियान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "वादे निभाना ही सार्थक बातचीत का आधार है। ईरान में अमेरिकी सरकार के प्रति गहरा ऐतिहासिक अविश्वास मौजूद है, और अमेरिकी अधिकारियों द्वारा दिए जा रहे गैर-रचनात्मक और विरोधाभासी संकेत इस बात का संकेत देते हैं कि वे ईरान के समर्पण की अपेक्षा कर रहे हैं। ईरानी लोग बल और दबाव के आगे नहीं झुकते।"

इसके अलावा, ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए ने रिपोर्ट किया कि मौजूदा परिस्थितियों में बातचीत से सकारात्मक परिणाम की उम्मीद कम है। इसीलिए, ईरान ने अमेरिका के साथ शांति वार्ता के दूसरे दौर में भाग लेने से मना कर दिया है।

आईआरएनए ने अपने अंग्रेजी अकाउंट पर पोस्ट किया कि वार्ता के दूसरे दौर में ईरान की अनुपस्थिति का कारण अमेरिका की "अत्यधिक मांगें, अव्यवहारिक अपेक्षाएं, बार-बार अपने रुख में बदलाव, विरोधाभासी बयान और समुद्री नाकाबंदी" हैं। ईरान का मानना है कि यह नाकाबंदी युद्धविराम का उल्लंघन है।

तेहरान में एक साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि हमने अगले दौर की बातचीत को लेकर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है।

बघाई ने अमेरिका की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि वॉशिंगटन एक ओर कूटनीति की बात करता है, जबकि दूसरी ओर उसके कदम इसके विपरीत हैं। युद्धविराम की शुरुआत से ईरान को अमेरिका की तरफ से निरंतर शिकायतों और खराब नीयत का सामना करना पड़ा है।

उन्होंने कहा कि शुरुआत में अमेरिका का कहना था कि लेबनान युद्धविराम का हिस्सा नहीं है, जबकि इसके विपरीत दावे किए जा रहे थे।

तस्नीम न्यूज एजेंसी के अनुसार, बघाई ने बताया कि समझौता होने के बावजूद ईरान को होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री गतिविधियों में बाधाओं का सामना करना पड़ा, जिसमें एक ईरानी व्यापारिक जहाज पर अमेरिका का हमला भी शामिल है, जिसे उन्होंने युद्धविराम का उल्लंघन और आक्रामक कदम बताया।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह महत्वपूर्ण है कि दोनों पक्ष आपसी समझदारी के लिए वादों का पालन करें।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरान ने अमेरिका के साथ वार्ता में भाग क्यों नहीं लिया?
ईरान ने अमेरिका की अत्यधिक मांगें और अव्यवहारिक अपेक्षाओं के कारण वार्ता के दूसरे दौर में भाग लेने से मना किया है।
मसूद पेजेशकियान का अमेरिका के प्रति क्या रुख है?
पेजेशकियान ने अमेरिका के साथ संबंधों में गहरा ऐतिहासिक अविश्वास व्यक्त किया है और कहा है कि ईरानी जनता दबाव में नहीं झुकेगी।
राष्ट्र प्रेस
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