ईरान का अमेरिका को सख्त संदेश: थोपने की कोशिशें होंगी विफल
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नई दिल्ली, 15 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा है कि उनका देश युद्ध नहीं बल्कि संवाद चाहता है। आईआरएनए न्यूज एजेंसी के अनुसार, उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका की अपनी इच्छा थोपने या ईरान को सरेंडर करने की कोई भी कोशिश निष्फल होगी।
ईरान में स्कूलों और कॉलेजों पर इजरायल और अमेरिका के हमलों पर राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने कहा, "अंतरराष्ट्रीय कानून और इंसानियत के उसूलों के दायरे में, आम लोगों, अमीर लोगों और बच्चों को निशाना बनाने और स्कूल तथा अस्पतालों जैसे आवश्यक केंद्रों को नष्ट करने का क्या औचित्य है?"
पेजेश्कियन ने टेलीग्राम पर बयान देते हुए कहा, "ईरान युद्ध या अस्थिरता नहीं चाहता है और हमेशा दूसरे देशों के साथ संवाद और अच्छे सहयोग की बात करता है। लेकिन, किसी और की इच्छाओं को थोपने और ईरान को सरेंडर करने के लिए मजबूर करने की कोशिशें हमेशा नाकाम होंगी। ईरानी लोग ऐसा तरीका कभी नहीं अपनाएंगे।"
ईरान के विज्ञान मंत्री ने तेहरान में एयरोस्पेस रिसर्च इंस्टीट्यूट के दौरे के दौरान कहा कि ईरान एक ऐसे दुश्मन का सामना कर रहा है जो नैतिकता, कानून या किसी भी अन्य सिस्टम का सम्मान नहीं करता। अमेरिका-इजरायल ने मिलकर 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया था।
संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि माइक वाल्ट्ज ने कहा कि अमेरिका इस बात पर जोर दे रहा है कि ईरान अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम को पूरी तरह से बंद कर दे।
वाल्ट्ज ने फॉक्स न्यूज पर वॉशिंगटन की तेहरान से की गई मांगों को लेकर कहा, "आप न्यूक्लियर प्रोग्राम नहीं चला सकते।" उन्होंने यह भी कहा कि जब तक तेहरान होर्मुज स्ट्रेट में नेविगेशन बहाल नहीं कर देता, तब तक अमेरिका ईरान पर अपनी नेवल नाकाबंदी जारी रखने को तैयार है।
उन्होंने पुष्टि की कि अमेरिका ईरान पर जलमार्ग खोलने के लिए दबाव बना रहा है। वाल्ट्ज ने कहा, "ईरान वैश्विक अर्थव्यवस्था में जीतने वालों और हारने वालों को चुनने का हकदार नहीं है।"