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ईरान परमाणु हथियार नहीं चाहता: राष्ट्रपति पेजेश्कियन का दुनिया को भरोसा, अमेरिका से बातचीत में प्रगति

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ईरान परमाणु हथियार नहीं चाहता: राष्ट्रपति पेजेश्कियन का दुनिया को भरोसा, अमेरिका से बातचीत में प्रगति

सारांश

ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने परमाणु हथियारों से दूरी का खुला ऐलान किया — ठीक उस वक्त जब अमेरिकी विदेश सचिव रुबियो ने नई दिल्ली से होर्मुज़ पर 'अच्छी खबर' का संकेत दिया। यह कूटनीतिक हलचल बताती है कि ईरान-अमेरिका परमाणु गतिरोध एक नए मोड़ पर है।

मुख्य बातें

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने 24 मई को कहा कि ईरान परमाणु हथियार नहीं चाहता और दुनिया को इसका भरोसा दिलाने के लिए तैयार है।
पेजेश्कियन ने स्पष्ट किया कि SNSC के ढाँचे और सुप्रीम लीडर की अनुमति के बिना कोई नीतिगत निर्णय नहीं होगा।
अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो ने नई दिल्ली में कहा कि अमेरिका-ईरान कूटनीति में उल्लेखनीय प्रगति हुई है और होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर जल्द सकारात्मक खबर संभव है।
रुबियो ने राष्ट्रपति ट्रंप के उस रुख को दोहराया कि ईरान के पास कभी परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए।
पेजेश्कियन ने घरेलू मोर्चे पर नागरिकों से ऊर्जा दक्षता अपनाने की अपील की और सरकार की प्राथमिकता जनता की आजीविका बताई।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने रविवार, 24 मई को स्पष्ट किया कि उनका देश परमाणु हथियार हासिल करने का इरादा नहीं रखता और वह इस बात का भरोसा दुनिया को दिलाने के लिए पूरी तरह तैयार है। तेहरान में इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (IRIB) के अधिकारियों के साथ एक बैठक में उन्होंने यह बयान दिया, जो ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता के नए दौर के बीच अत्यंत महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।

मुख्य घोषणा: परमाणु हथियार नहीं चाहते

पेजेश्कियन ने कहा, 'हम ऐलान करते हैं कि हम दुनिया को यह भरोसा दिलाने के लिए तैयार हैं कि हम न्यूक्लियर हथियार नहीं चाहते।' उन्होंने यह भी कहा कि ईरान क्षेत्रीय अस्थिरता का स्रोत नहीं है, बल्कि उनके अनुसार इज़रायली शासन 'ग्रेटर इज़रायल' की योजना पर काम कर रहा है और वही युद्ध एवं अशांति को बनाए रखने के लिए हर अवसर का उपयोग कर रहा है।

पेजेश्कियन ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान में सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (SNSC) के ढाँचे के बाहर और सुप्रीम लीडर के समन्वय व अनुमति के बिना कोई भी नीतिगत निर्णय नहीं लिया जाएगा — यह बयान उस समय आया जब अमेरिका के साथ कूटनीतिक संपर्क तेज़ हो रहे हैं।

अमेरिका-ईरान कूटनीति में प्रगति

इसी बीच, नई दिल्ली में अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो ने भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक प्रयासों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। रुबियो ने संकेत दिया कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य के संदर्भ में आने वाले कुछ घंटों में सकारात्मक समाचार आ सकते हैं।

रुबियो ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस रुख को भी दोहराया कि ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए — यह वाशिंगटन की दीर्घकालिक नीति की पुनः पुष्टि है।

घरेलू प्राथमिकताएँ और जनता से अपील

पेजेश्कियन ने IRIB अधिकारियों के साथ बैठक में ईरानी जनता की आर्थिक कठिनाइयों को भी स्वीकार किया। उन्होंने कहा, 'सरकार की प्राथमिकता लोगों की रोज़ी-रोटी पक्का करना है। समस्याओं के बावजूद अधिकारी लोगों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं।'

उन्होंने नागरिकों की बचत की सराहना की और उनसे ऊर्जा व ईंधन के उपयोग में दक्षता अपनाने की अपील की — यह बयान ऐसे समय में आया जब ईरान पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण गंभीर आर्थिक दबाव झेल रहा है।

व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर अप्रत्यक्ष वार्ता के कई दौर हो चुके हैं। 2015 के JCPOA समझौते से अमेरिका के 2018 में बाहर निकलने के बाद से दोनों देशों के संबंध अत्यंत तनावपूर्ण रहे हैं। पेजेश्कियन का यह स्वर अपेक्षाकृत नरम माना जा रहा है, हालाँकि उन्होंने इज़रायल पर निशाना साधना जारी रखा।

आने वाले दिनों में होर्मुज़ जलडमरूमध्य और परमाणु वार्ता पर कोई ठोस घोषणा इस कूटनीतिक प्रक्रिया की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे केवल इरादे की घोषणा के रूप में देखा जाना चाहिए — सत्यापन तंत्र का कोई उल्लेख नहीं है। उल्लेखनीय है कि SNSC और सुप्रीम लीडर की केंद्रीयता पर ज़ोर देकर राष्ट्रपति ने परोक्ष रूप से अपनी सीमित स्वायत्तता भी स्वीकार की — जो किसी भी समझौते की दीर्घकालिक विश्वसनीयता पर सवाल उठाती है। रुबियो का होर्मुज़ पर 'अच्छी खबर' का संकेत दिलचस्प है, पर ठोस घोषणा के अभाव में यह कूटनीतिक दबाव की रणनीति भी हो सकती है। 2015 के JCPOA के बाद की घटनाओं को देखते हुए, बिना पारदर्शी सत्यापन ढाँचे के किसी भी समझौते की स्थायित्व पर संदेह स्वाभाविक है।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने परमाणु हथियारों के बारे में क्या कहा?
राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने 24 मई को कहा कि ईरान दुनिया को यह भरोसा दिलाने के लिए तैयार है कि वह परमाणु हथियार नहीं चाहता। यह बयान तेहरान में IRIB अधिकारियों के साथ एक बैठक में दिया गया।
अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता में अभी क्या स्थिति है?
अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो ने नई दिल्ली में कहा कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक प्रयासों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उन्होंने होर्मुज़ जलडमरूमध्य के संदर्भ में जल्द सकारात्मक खबर आने का भी संकेत दिया।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य का इस वार्ता से क्या संबंध है?
होर्मुज़ जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अत्यंत संवेदनशील मार्ग है जिस पर ईरान का नियंत्रण है। रुबियो के बयान से संकेत मिलता है कि इस जलमार्ग की स्थिति को लेकर कोई कूटनीतिक सहमति बन सकती है।
ईरान में परमाणु नीति पर अंतिम निर्णय कौन लेता है?
पेजेश्कियन ने स्वयं स्पष्ट किया कि ईरान में सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (SNSC) के ढाँचे के बाहर और सुप्रीम लीडर के समन्वय व अनुमति के बिना कोई भी नीतिगत निर्णय नहीं लिया जाएगा। इसका अर्थ है कि राष्ट्रपति की भूमिका सीमित है।
ईरान की घरेलू आर्थिक स्थिति पर पेजेश्कियन ने क्या कहा?
पेजेश्कियन ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता नागरिकों की आजीविका सुनिश्चित करना है और अधिकारी चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं। उन्होंने नागरिकों से ऊर्जा व ईंधन के उपयोग में दक्षता अपनाने की भी अपील की।
राष्ट्र प्रेस
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