ईरान दबाव में नहीं झुकेगा — पेजेश्कियन का पाक PM शरीफ से फोन पर कड़ा संदेश
सारांश
Key Takeaways
- ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने पाक PM शहबाज शरीफ से फोन पर कहा — ईरान दबाव और धमकियों के आगे नहीं झुकेगा।
- अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जारेड कुशनर का पाकिस्तान दौरा रद्द, यह दूसरी बार है जब वार्ता टली।
- ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा — ईरान चाहे तो सीधे फोन करे, 18 घंटे यात्रा में समय बर्बाद नहीं होगा।
- पेजेश्कियन ने अमेरिका के समुद्री प्रतिबंधों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन बताया।
- ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से नाकेबंदी हटाने को वार्ता की पूर्व शर्त बताया।
- पेजेश्कियन ने फारस की खाड़ी के सभी पड़ोसी देशों के साथ आपसी सम्मान पर आधारित संबंध बनाने की इच्छा जताई।
तेहरान, 26 अप्रैल 2025 — ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि ईरान किसी भी दबाव या धमकी के आगे झुककर शांति वार्ता में शामिल नहीं होगा। यह बयान उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ हुई टेलीफोन वार्ता में दिया, जो इस संकट में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। अर्द्ध-सरकारी समाचार एजेंसी मेहर ने इस बातचीत का विवरण सार्वजनिक किया।
पेजेश्कियन का कड़ा रुख — अमेरिका पर सीधा निशाना
पेजेश्कियन ने कहा कि "वार्ता और सीजफायर के दौरान भी अमेरिका नियमों का उल्लंघन करता रहा" — यह व्यवहार उसकी बलपूर्वक सब कुछ हासिल करने की प्रवृत्ति को उजागर करता है। उन्होंने वाशिंगटन के तथाकथित समुद्री प्रतिबंधों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर का खुला उल्लंघन बताया।
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अमेरिका और इजरायल के बीच किसी नए टकराव के क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता पर गंभीर परिणाम होंगे। इस तरह के धमकी भरे बयानों और कदमों ने कूटनीतिक प्रयासों में अमेरिका की नीयत पर गहरा संदेह पैदा कर दिया है।
खाड़ी देशों से रिश्ते मजबूत करने की पहल
पेजेश्कियन ने शहबाज शरीफ के साथ बातचीत में फारस की खाड़ी के दक्षिणी तटीय देशों सहित सभी पड़ोसी देशों के साथ "आपसी सम्मान के आधार पर" संबंध सुदृढ़ करने की इच्छा जताई।
उन्होंने उम्मीद व्यक्त की कि ये देश "बाहरी हस्तक्षेप के बिना" मिलकर क्षेत्र में शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देंगे। यह बयान ऐसे समय में आया है जब सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे खाड़ी देशों के साथ ईरान के संबंधों में हाल के वर्षों में उतार-चढ़ाव देखा गया है।
अमेरिकी दूतों का दौरा रद्द — वार्ता फिर ठप
यह बातचीत ऐसे नाज़ुक दौर में हुई जब अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित संघर्ष विराम वार्ता एक बार फिर अटक गई है। अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जारेड कुशनर का ईरान से बातचीत के लिए पाकिस्तान जाने का दौरा रद्द कर दिया गया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा — "मैंने अपने दूतों को पाकिस्तान न जाने का निर्देश दिया है। 18 घंटे यात्रा में बर्बाद कर बेकार की बातें नहीं करनी। अगर ईरान बात करना चाहता है तो बस एक फोन करे।" हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस फैसले का मतलब ईरान के खिलाफ नई सैन्य कार्रवाई नहीं है।
गौरतलब है कि यह दूसरी बार है जब दोनों देशों की बैठक टली। इससे पहले ईरान ने वार्ता से इनकार करते हुए कहा था कि पहले अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट से नाकेबंदी हटाए, तभी कोई बातचीत संभव होगी।
गहरा विश्लेषण — असली दांव क्या है?
यह संकट केवल कूटनीतिक बयानबाज़ी तक सीमित नहीं है। होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया का लगभग 20%25 तेल व्यापार गुजरता है — किसी भी तनाव की स्थिति में वैश्विक ऊर्जा बाजार पर तत्काल असर पड़ता है। भारत जैसे देश, जो ईरान और खाड़ी से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करते हैं, इस टकराव के अप्रत्यक्ष शिकार बन सकते हैं।
विरोधाभास यह है कि ट्रंप प्रशासन एक तरफ वार्ता की बात करता है और दूसरी तरफ समुद्री प्रतिबंध जारी रखता है — यही द्विचरित्रता ईरान को वार्ता मेज से दूर रखती है। पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका भी दबाव में है क्योंकि अमेरिकी दूतों के दौरे रद्द होने से इस्लामाबाद की कूटनीतिक साख पर सवाल उठते हैं।
आगे क्या होगा?
फिलहाल दोनों पक्षों के बीच सीधी बातचीत की संभावना क्षीण दिखती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अमेरिका समुद्री प्रतिबंधों पर कोई ठोस रियायत नहीं देता, ईरान वार्ता की मेज पर नहीं लौटेगा। पेजेश्कियन का यह बयान आने वाले हफ्तों में कूटनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।