बड़ा फैसला: NDPS कोर्ट ने रिया चक्रवर्ती के बैंक खाते अनफ्रीज करने का आदेश दिया
सारांश
Key Takeaways
- NDPS स्पेशल कोर्ट, मुंबई ने 25 अप्रैल 2025 को रिया चक्रवर्ती, शोविक चक्रवर्ती और संध्या चक्रवर्ती के बैंक खाते अनफ्रीज करने का आदेश दिया।
- ICICI बैंक, Axis बैंक और Kotak Mahindra बैंक में चक्रवर्ती परिवार के खाते 2020 से फ्रीज थे।
- कोर्ट ने पाया कि NCB ने NDPS एक्ट की धारा 68F के तहत 30 दिनों के भीतर सक्षम प्राधिकारी से अनुमोदन नहीं लिया।
- कोर्ट ने स्पष्ट किया कि समयसीमा में अनुमोदन न मिलने पर फ्रीजिंग आदेश कानूनी रूप से अमान्य हो जाते हैं।
- यह मामला 2020 में सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु के बाद उभरे ड्रग्स एंगल से जुड़ा है।
- मुख्य NDPS मामले की सुनवाई अभी जारी है और NCB उच्च न्यायालय में अपील कर सकती है।
मुंबई, 26 अप्रैल 2025 — सुशांत सिंह राजपूत ड्रग्स केस में अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती को बड़ी कानूनी राहत मिली है। नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) स्पेशल कोर्ट, मुंबई ने 25 अप्रैल 2025 को एक ऐतिहासिक आदेश में रिया चक्रवर्ती, उनके भाई शोविक चक्रवर्ती और माँ संध्या चक्रवर्ती के बैंक खातों को तत्काल अनफ्रीज करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने NDPS एक्ट की धारा 68F के तहत निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया।
किन बैंकों में खुलेगा एक्सेस?
कोर्ट के आदेश के बाद अब चक्रवर्ती परिवार को ICICI बैंक, Axis बैंक और Kotak Mahindra बैंक में जमा अपनी राशि और खातों तक पूरी पहुँच मिल जाएगी। ये खाते वर्ष 2020 में NCB की जांच के दौरान फ्रीज किए गए थे, जब सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु के बाद ड्रग्स एंगल की जांच शुरू हुई थी।
करीब पाँच वर्षों तक परिवार इन खातों तक पहुँच से वंचित रहा। यह आदेश न केवल रिया चक्रवर्ती के लिए व्यक्तिगत राहत है, बल्कि NDPS कानून के तहत जांच एजेंसियों की जवाबदेही पर भी एक महत्वपूर्ण टिप्पणी है।
कोर्ट ने क्यों दिया यह आदेश?
NDPS एक्ट की धारा 68F के अनुसार किसी भी संपत्ति या बैंक खाते को फ्रीज करने के बाद 30 दिनों के भीतर सक्षम प्राधिकारी से अनुमोदन लेना अनिवार्य है। कोर्ट ने पाया कि NCB ने इस अनिवार्य प्रक्रिया का पालन नहीं किया।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जब निर्धारित समयसीमा के भीतर सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति नहीं ली जाती, तो ऐसे फ्रीजिंग आदेश कानूनी रूप से निरर्थक हो जाते हैं और उन्हें बनाए नहीं रखा जा सकता। यह फैसला NCB की कार्यप्रणाली पर एक गंभीर सवाल उठाता है।
मामले की पृष्ठभूमि
जून 2020 में अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मुंबई स्थित अपने आवास पर मृत्यु के बाद यह केस सुर्खियों में आया था। मृत्यु की परिस्थितियों की जांच के दौरान ड्रग्स एंगल उभरा, जिसमें रिया चक्रवर्ती और उनके भाई शोविक का नाम सामने आया। NCB ने जांच के तहत परिवार के बैंक खाते फ्रीज कर दिए और यह तर्क दिया कि वित्तीय लेनदेन पर रोक से सबूतों की छेड़छाड़ को रोका जा सकेगा।
रिया चक्रवर्ती ने इस कार्रवाई को शुरू से ही कानूनी रूप से चुनौती दी और दावा किया कि खाते बिना उचित प्रक्रिया के फ्रीज किए गए। अब पाँच साल बाद कोर्ट ने उनके तर्क को सही माना है।
गहन विश्लेषण: NCB की कार्यप्रणाली पर सवाल
यह मामला केवल रिया चक्रवर्ती तक सीमित नहीं है। यह फैसला एक व्यापक प्रश्न उठाता है — क्या जांच एजेंसियाँ हाई-प्रोफाइल मामलों में कानूनी प्रक्रिया की अनदेखी करती हैं? NDPS एक्ट की धारा 68F एक स्पष्ट और बाध्यकारी प्रावधान है, फिर भी NCB ने इसका पालन नहीं किया — यह प्रशासनिक लापरवाही या जानबूझकर की गई चूक, दोनों ही स्थितियों में गंभीर है।
गौरतलब है कि इस केस में मीडिया ट्रायल भी चरम पर था। रिया चक्रवर्ती को सार्वजनिक रूप से जिस तरह से निशाना बनाया गया, उसकी व्यापक आलोचना हुई थी। अब जब कोर्ट ने NCB की प्रक्रियागत खामी को स्वीकार किया है, तो यह उन सभी के लिए एक सबक है जो जांच एजेंसियों की हर कार्रवाई को अंतिम सत्य मान लेते हैं।
तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो भारत में NDPS एक्ट के तहत संपत्ति फ्रीज करने की शक्ति का दुरुपयोग कोई नई बात नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय कई बार यह स्पष्ट कर चुका है कि जांच एजेंसियाँ कानूनी दायरे में रहकर काम करें, लेकिन जमीन पर स्थिति अलग दिखती है।
आगे क्या होगा?
NDPS स्पेशल कोर्ट के इस आदेश के बाद अब यह देखना होगा कि NCB इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देती है या नहीं। यदि NCB ने अपील नहीं की, तो बैंक खाते जल्द ही अनफ्रीज हो जाएंगे। इसके साथ ही रिया चक्रवर्ती के खिलाफ चल रहे मुख्य NDPS मामले की सुनवाई भी जारी रहेगी।
यह फैसला भारतीय न्याय प्रणाली में प्रक्रियागत अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है और यह स्थापित करता है कि कानून की नजर में प्रक्रिया का पालन उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि जांच का परिणाम।