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अमेरिका से बातचीत आत्मसमर्पण नहीं: ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियन, होर्मुज स्ट्रेट पर नई योजना भी सामने

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अमेरिका से बातचीत आत्मसमर्पण नहीं: ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियन, होर्मुज स्ट्रेट पर नई योजना भी सामने

सारांश

ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने अमेरिका से वार्ता को आत्मसमर्पण मानने से इनकार किया, जबकि ट्रंप ने एक ही दिन 'अच्छे हालात' और 'जबरदस्त कार्रवाई' दोनों कहे। 60 दिन की एमओयू अवधि समाप्त होने के बाद वार्ता की दिशा अधर में है और ईरानी संसद होर्मुज स्ट्रेट पर नई प्रतिबंध योजना पर विचार कर रही है।

मुख्य बातें

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने 20 अगस्त को तेहरान में कहा कि अमेरिका से बातचीत आत्मसमर्पण नहीं है।
वार्ता के लक्ष्यों में युद्ध विराम, नौसैनिक नाकेबंदी हटाना, जब्त संपत्ति की वापसी और परमाणु वार्ता शामिल हैं।
18 जून को हस्ताक्षरित एमओयू के तहत 60 दिन की बातचीत अवधि सोमवार को समाप्त हो गई; आगे की राह अनिश्चित।
डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को ईरान पर 'जबरदस्त आर्थिक कार्रवाई' की घोषणा की, जबकि उसी दिन पहले हालात 'बहुत अच्छे' बताए थे।
ईरानी संसद की समिति ने होर्मुज स्ट्रेट से दुश्मन और जासूसी जहाजों को रोकने की मसौदा योजना की सामान्य रूपरेखा को मंजूरी दी; इजरायली जहाज भी प्रतिबंध के दायरे में।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने 20 अगस्त को तेहरान में एक सम्मेलन में स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ चल रही वार्ता को आत्मसमर्पण के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। राष्ट्रपति कार्यालय की वेबसाइट पर जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, पेजेश्कियन ने ईरान की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।

पेजेश्कियन का रुख: सम्मान के साथ बातचीत

पेजेश्कियन ने कहा, 'बातचीत की प्रक्रिया में, हम अपनी पूरी ताकत के साथ और समझदारी, सम्मान और जरूरत को ध्यान में रखते हुए कदम-दर-कदम आगे बढ़ रहे हैं।' उन्होंने वार्ता के उद्देश्यों को भी स्पष्ट किया — 'हमारा लक्ष्य युद्ध खत्म करना, ईरान-विरोधी नौसैनिक नाकेबंदी हटाना, देश की जब्त की गई संपत्ति को जारी करना और फिर परमाणु वार्ता करना है।' यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव एक नाज़ुक मोड़ पर है।

ट्रंप का दोहरा संदेश: 'बहुत अच्छे हालात' और फिर 'जबरदस्त कार्रवाई'

स्थानीय मीडिया ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को प्रशासन के शीर्ष दूतों से ईरान के साथ बातचीत रोकने को कहा। इसके कुछ ही घंटों बाद बुधवार को ट्रंप ने ईरान पर 'जबरदस्त आर्थिक कार्रवाई' की घोषणा की — जबकि उसी दिन पहले उन्होंने कहा था कि हालात 'बहुत अच्छे' हैं। यह विरोधाभासी संकेत वाशिंगटन की नीति में अनिश्चितता को उजागर करते हैं।

एमओयू और 60 दिन की वार्ता अवधि का संकट

तेहरान और वाशिंगटन ने 18 जून को सभी मोर्चों पर युद्ध विराम के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे। हालाँकि, एमओयू के तहत 60 दिन की बातचीत की अवधि सोमवार को समाप्त हो गई और पिछले महीने दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ा है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि वार्ता प्रक्रिया आगे किस दिशा में जाएगी।

होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की नई रणनीतिक योजना

इसी बीच, ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के सदस्य इब्राहिम रेजाई ने सरकारी प्रसारक आईआरआईबी टीवी को दिए साक्षात्कार में होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ी एक मसौदा योजना का विवरण साझा किया। समिति ने इस योजना की सामान्य रूपरेखा को इस महीने की शुरुआत में मंजूरी दी है।

रेजाई के अनुसार, इस योजना में दुश्मन माने जाने वाले या जासूसी गतिविधियों में शामिल जहाजों को स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इजरायली सैन्य और नागरिक जहाज भी इस प्रतिबंध के दायरे में होंगे। इस व्यवस्था की निगरानी ईरान के सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ द्वारा की जाएगी।

योजना में ईरानी रियाल या अन्य मुद्राओं में पारगमन शुल्क लेने और नियमों का उल्लंघन करने वाले जहाजों पर जुर्माना लगाने के प्रावधान भी शामिल हैं। रेजाई ने कहा, 'अगर दुनिया के किसी दूसरे हिस्से में कोई ईरान के हितों या हमारे नागरिकों को नुकसान पहुंचाता है, तो हम होर्मुज में उस सरकार से निपटेंगे।' इसके अलावा, ईरान के प्रति दुश्मनी भरा रुख अपनाने वाली सरकारों के खिलाफ कार्गो जब्त करने और अतिरिक्त टैरिफ लगाने जैसे उपाय भी प्रस्तावित हैं।

आगे की राह

गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल व्यापार का एक अत्यंत संवेदनशील जलमार्ग है और इस पर किसी भी प्रतिबंध का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों पर व्यापक रूप से पड़ सकता है। पेजेश्कियन की वार्ता-पक्षधर बयानबाजी और संसदीय समिति की आक्रामक होर्मुज योजना के बीच का अंतर्विरोध दर्शाता है कि तेहरान के भीतर कूटनीतिक और सुरक्षा नीति के बीच तालमेल अभी भी जटिल बना हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो किसी भी दीर्घकालिक समझौते की संभावना को कमज़ोर करती है। होर्मुज स्ट्रेट पर संसदीय समिति की योजना एक दबाव उपकरण है — लेकिन इसे लागू करने की स्थिति में वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर असर अपरिहार्य होगा। 60 दिन की एमओयू अवधि समाप्त होने के बाद जो शून्य बना है, उसे भरने के लिए दोनों पक्षों के पास अभी कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं है।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने अमेरिका से बातचीत पर क्या कहा?
पेजेश्कियन ने 20 अगस्त को तेहरान में स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ वार्ता करना आत्मसमर्पण नहीं है। उन्होंने कहा कि ईरान सम्मान, समझदारी और जरूरत को ध्यान में रखते हुए कदम-दर-कदम आगे बढ़ रहा है।
ईरान-अमेरिका एमओयू क्या है और इसकी स्थिति क्या है?
18 जून को दोनों देशों ने सभी मोर्चों पर युद्ध विराम के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत 60 दिन की वार्ता अवधि सोमवार को समाप्त हो गई और आगे की बातचीत की दिशा अभी अनिश्चित बनी हुई है।
ट्रंप ने ईरान पर 'जबरदस्त आर्थिक कार्रवाई' क्यों घोषित की?
बुधवार को ट्रंप ने ईरान पर जबरदस्त आर्थिक कार्रवाई की घोषणा की, हालाँकि उसी दिन पहले उन्होंने हालात 'बहुत अच्छे' बताए थे। एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से यह भी सामने आया कि ट्रंप ने मंगलवार को अपने शीर्ष दूतों से ईरान के साथ बातचीत रोकने को कहा था।
होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की नई योजना क्या है?
ईरान की संसदीय राष्ट्रीय सुरक्षा समिति ने एक मसौदा योजना की रूपरेखा को मंजूरी दी है जिसके तहत दुश्मन माने जाने वाले या जासूसी जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने से रोका जाएगा। इजरायली सैन्य और नागरिक जहाज भी इस प्रतिबंध के दायरे में होंगे और पारगमन शुल्क व जुर्माने के प्रावधान भी शामिल हैं।
ईरान-अमेरिका वार्ता में आगे क्या होने की संभावना है?
60 दिन की एमओयू अवधि समाप्त होने और दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ने के बाद वार्ता की दिशा अस्पष्ट है। ट्रंप के विरोधाभासी संकेतों और ईरान की होर्मुज योजना को देखते हुए निकट भविष्य में किसी ठोस समझौते की संभावना सीमित नज़र आती है।
राष्ट्र प्रेस
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