ईरान-अमेरिका वार्ता: राष्ट्रपति पेजेश्कियन बोले — बातचीत हाँ, आत्मसमर्पण कभी नहीं
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने 8 अगस्त 2026 को स्पष्ट किया कि तेहरान अमेरिका के साथ राजनयिक वार्ता के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन किसी भी परिस्थिति में देश को आत्मसमर्पण के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। उन्होंने अपने कार्यालय की वेबसाइट पर प्रकाशित एक साक्षात्कार में यह बात कही, जो ईरानी नेतृत्व में आंतरिक मतभेद की अटकलों के बीच आई।
MOU का बचाव और शर्तें
पेजेश्कियन ने जून 2026 में दोनों देशों के बीच हस्ताक्षरित मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MOU) का खुलकर बचाव किया। इस समझौते के तहत दोनों पक्षों को 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुँचने के लिए बातचीत करनी थी। उन्होंने कहा, "जब तक अमेरिका MOU के तहत अपने वादे पूरे करता है, ईरान अपनी जिम्मेदारियों के लिए प्रतिबद्ध है। जहाँ भी वे अपना वादा पूरा करने में विफल होते हैं, तो हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं कि हम काम जारी रखें।"
गौरतलब है कि इस हफ्ते की शुरुआत में पेजेश्कियन ने उन अफवाहों को भी सिरे से खारिज किया था जिनमें कहा जा रहा था कि वह पद छोड़ने वाले हैं। उन्होंने कहा कि वह पूरी तरह अपने दायित्वों का निर्वहन जारी रखेंगे।
केश्म द्वीप पर धमाके — तनाव का नया आयाम
इसी बीच, ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम के अनुसार, गुरुवार रात करीब 9:40 बजे (स्थानीय समय) होर्मोजगान प्रांत के केश्म द्वीप पर दो धमाके सुने गए। एजेंसी ने बताया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के प्रवेश द्वार पर 'शत्रुतापूर्ण लक्ष्यों' से ईरानी सशस्त्र बलों की भिड़ंत के कारण ये विस्फोट हुए।
हालाँकि, होर्मोजगान प्रांत के राजनीतिक, सुरक्षा और सामाजिक मामलों के उप-राज्यपाल अहमद नफीसी ने कहा कि केश्म द्वीप और प्रांतीय राजधानी बंदर अब्बास में किसी हमले या घटना की कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। संबंधित अधिकारी विस्फोटों के कारणों की जाँच कर रहे हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फिर खोलने की रूपरेखा
सऊदी समाचार चैनलों अल हदथ और अल अरबिया ने उच्च पदस्थ सूत्रों के हवाले से बताया कि ईरान और ओमान के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को 60 दिनों के लिए फिर से खोलने की रूपरेखा पर सहमति बन गई है। रिपोर्टों के अनुसार, इस समझौते को अभी ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल से मंजूरी मिलनी बाकी है और कुछ ही दिनों में इसकी आधिकारिक घोषणा हो सकती है। इसका मकसद इस रणनीतिक जलमार्ग में नेविगेशन फिर से बहाल करना है।
वार्ता की अनिश्चितता और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब ईरान-अमेरिका संबंधों में नए तनाव ने MOU के तहत बातचीत के नतीजे को अनिश्चित बना दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि केश्म द्वीप की घटना और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर समानांतर कूटनीतिक गतिविधियाँ इस क्षेत्र में एक नाजुक संतुलन की ओर इशारा करती हैं। पेजेश्कियन की दो-टूक भाषा बताती है कि तेहरान वार्ता की मेज पर तो बैठेगा, लेकिन दबाव में झुकने को तैयार नहीं है।