ईरान-अमेरिका शांति एमओयू देश और क्षेत्र के हित में: राष्ट्रपति पेजेश्कियन
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने 30 अगस्त 2026 को तेहरान में आयोजित एक समारोह में कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच हस्ताक्षरित शांति समझौता ज्ञापन (एमओयू) न केवल ईरान, बल्कि पश्चिम एशिया और पूरी दुनिया के व्यापक हित में है। राष्ट्रपति कार्यालय की वेबसाइट पर जारी बयान के अनुसार, पेजेश्कियन ने इस समझौते को क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में एक अहम कदम बताया।
समझौते पर राष्ट्रपति का रुख
पेजेश्कियन ने कहा कि इस एमओयू के प्रभावी होने के बाद अमेरिका और इजरायल पश्चिम एशिया में अराजकता, आक्रामकता और असुरक्षा का माहौल बनाने में सक्षम नहीं रहेंगे। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इससे क्षेत्र के देशों को स्थिरता और विकास के पथ पर अग्रसर होने का अवसर प्राप्त होगा।
उन्होंने मुस्लिम देशों के बीच एकता और सहयोग को बढ़ावा देने की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए कहा कि इसी से 'दुश्मनों की साजिशों' को नाकाम किया जा सकता है। पेजेश्कियन ने स्पष्ट किया, 'ईरान ने कभी किसी युद्ध की शुरुआत नहीं की है। हम युद्ध का स्वागत नहीं करते, लेकिन किसी भी हमलावर के खिलाफ मजबूती से खड़े रहेंगे। कोई भी ताकत ऐसे देश को झुकाने के लिए मजबूर नहीं कर सकती जो पूरी ताकत और इच्छाशक्ति के साथ खड़ा हो।'
विदेश मंत्री की चेतावनी
इसी बीच, शनिवार को ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के ज़रिए आगाह किया कि वैश्विक ऊर्जा बाजारों को निजी लाभ के लिए प्रभावित करने और ईरान के विरुद्ध अमेरिका के युद्ध को लंबा खींचने के लिए 'बड़े स्तर पर' प्रयास किए जा रहे हैं।
आईआरजीसी की बड़ी कार्रवाई
एक अलग बयान में, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने बताया कि सुरक्षा एजेंसियों ने दक्षिण-पूर्वी सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत में अमेरिका और इजरायल से कथित तौर पर जुड़े एक 'आतंकी' समूह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। इस अभियान में समूह के एक सदस्य को मार गिराया गया, जबकि छह अन्य को गिरफ्तार किया गया।
संघर्ष की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने मिलकर तेहरान सहित ईरान के कई शहरों पर हमले किए थे। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, साथ ही होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी निगरानी और नियंत्रण कड़ा कर दिया।
इसके बाद 18 जून को दोनों देशों ने क्षेत्र में सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करने के उद्देश्य से एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत दोनों पक्षों को 60 दिनों के भीतर बातचीत कर अंतिम समझौते तक पहुँचना था, जिसकी समयसीमा 17 अगस्त को समाप्त हो चुकी है।
वार्ताओं का अनिश्चित भविष्य
पिछले महीने दोनों देशों के बीच तनाव फिर से बढ़ने के बाद इन वार्ताओं की दिशा अभी भी स्पष्ट नहीं है। विश्लेषकों के अनुसार, यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक समीकरण तेज़ी से बदल रहे हैं और किसी भी अंतिम समझौते की राह में कई बाधाएँ बनी हुई हैं।