ईरान-अमेरिका शांति एमओयू: राष्ट्रपति पेजेश्कियन बोले — 'सम्मान और ताकत' से हुआ समझौता
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने 17 अगस्त 2026 को स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ हस्ताक्षरित शांति समझौता ज्ञापन (एमओयू) पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई द्वारा निर्धारित सिद्धांतों के अनुरूप 'सम्मान' और 'ताकत' के साथ आगे बढ़ाया गया है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब 60 दिनों की वार्ता अवधि सोमवार को समाप्त होने वाली है और दोनों देशों के बीच तनाव फिर से बढ़ने की खबरें आ रही हैं।
राष्ट्रपति का बचाव और मुख्य बयान
शिक्षा मंत्री अलीरेजा काजेमी की मौजूदगी में हुई एक बैठक में पेजेश्कियन ने एमओयू का कड़ा बचाव किया। उनके कार्यालय से जारी बयान के अनुसार, राष्ट्रपति ने कहा, "हमने हालिया समझौते को मजबूती से आगे बढ़ाया और अपने दुश्मनों के सामने घुटने नहीं टेके। यह एमओयू विशेषज्ञों के साथ सोच-समझकर और विस्तार से चर्चा करने के बाद तैयार किया गया था।" यह बयान घरेलू आलोचकों को जवाब देने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
संसद स्पीकर ने बताया 'ईरान की जीत'
ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, शनिवार को संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर कालीबाफ ने इस शांति एमओयू को "ईरान की शान और जीत" का प्रमाण बताया। कालीबाफ ने कहा कि यह कदम कूटनीति के क्षेत्र में देश की सफलता को और मजबूत करता है। गौरतलब है कि ईरान और अमेरिका ने यह एमओयू 18 जून को क्षेत्र में चल रहे युद्ध को समाप्त करने के उद्देश्य से हस्ताक्षरित किया था।
वार्ता का भविष्य अनिश्चित
एमओयू की शर्तों के अनुसार, दोनों देशों को 60 दिनों की निर्धारित अवधि में किसी अंतिम समझौते पर पहुँचना था, जो सोमवार को समाप्त हो रही है। हालाँकि, हाल के हफ्तों में दोनों देशों के बीच तनाव में वृद्धि के कारण वार्ता का भविष्य अनिश्चित हो गया है। यह ऐसे समय में आया है जब पूरे क्षेत्र में स्थिरता की उम्मीदें टिकी हुई हैं।
अमेरिकी सीनेटर की तीखी आलोचना
इस बीच, अमेरिकी डेमोक्रेटिक सीनेटर रूबेन गैलेगो ने रविवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन पर निशाना साधा। इराक युद्ध के अनुभवी और मरीन कॉर्प्स में सेवा दे चुके एरिजोना के सीनेटर गैलेगो ने एबीसी न्यूज से कहा, "इस प्रशासन ने इस युद्ध के लिए कोई योजना नहीं बनाई थी। उन्होंने यह योजना नहीं बनाई कि इस युद्ध से कैसे बाहर निकला जाए और न ही वे वास्तव में यह समझ पाए कि यह युद्ध कैसे बढ़ेगा।" आलोचकों का कहना है कि यह संघर्ष पेंटागन की योजना और नेतृत्व में गंभीर कमियों को उजागर करता है।
अमेरिकी सैनिकों की स्थिति पर चिंता
सीनेटर गैलेगो यूएसएस अब्राहम लिंकन पर तैनात अमेरिकी सैनिकों में थकान, गिरते मनोबल और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं की खबरों पर प्रतिक्रिया दे रहे थे। उनका कहना था कि बिना स्पष्ट योजना, बाहर निकलने की रणनीति या तय मिशन के इस युद्ध में शामिल होने का खामियाजा अमेरिकी सैनिकों को भुगतना पड़ रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या दोनों पक्ष 60 दिनों की समयसीमा के बाद भी वार्ता जारी रखते हैं।