एशियन गेम्स सेलिंग: मनु फ्रांसिस और प्रिंस नोबल ने पुरुष स्किफ में जीता सिल्वर, भारत का 24वाँ सेलिंग मेडल
सारांश
मुख्य बातें
मनु फ्रांसिस और प्रिंस कुरिसिंकल नोबल की भारतीय जोड़ी ने 1 अक्टूबर 2026 को गामागोरि सिटी में एशियन गेम्स के पुरुष स्किफ इवेंट में सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास रचा। नौ रेस के बाद 23 नेट पॉइंट्स के साथ दूसरे स्थान पर रहते हुए, यह भारतीय सेलिंग के लिए एशियन गेम्स का 24वाँ मेडल बन गया।
रेगाटा का स्कोरकार्ड
चीन की जोड़ी वेन जाइडिंग और लियू तियान ने 16 पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल पर कब्ज़ा किया। भारतीय जोड़ी फ्रांसिस-नोबल ने 23 पॉइंट्स के साथ दूसरा और हांगकांग (चीन) के अकीरा ल्यूक सकाई एवं रसेल आयल्सवर्थ ने 24 पॉइंट्स के साथ तीसरा स्थान हासिल किया।
सेलिंग की स्कोरिंग प्रणाली अधिकांश खेलों से उलट है — रेस में पहले स्थान पर आने वाली बोट को एक पॉइंट, दूसरे को दो पॉइंट मिलते हैं और तय रेस पूरी होने के बाद सबसे खराब नतीजे को कुल स्कोर से हटा दिया जाता है। फ्रांसिस-नोबल ने नौ रेस में कुल 29 पॉइंट्स जुटाए, जिसमें से रेस 8 का छठा स्थान (6 पॉइंट्स) हटाने के बाद नेट स्कोर 23 रहा।
मुख्य प्रदर्शन
भारतीय जोड़ी का सबसे शानदार क्षण तीसरी रेस में आया, जिसे उन्होंने जीता। इसके अतिरिक्त रेस 1, 5 और 9 में वे दूसरे स्थान पर रहे, जो उनकी लगातार और संतुलित प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को दर्शाता है। चीनी जोड़ी ने नौ में से चार रेस जीतकर स्टैंडिंग में शीर्ष स्थान बरकरार रखा।
ऐतिहासिक संदर्भ
पुरुष स्किफ इवेंट में यह भारत का पहला एशियन गेम्स सिल्वर मेडल है और इस स्पर्धा में कुल मिलाकर दूसरा मेडल है। इससे पहले वरुण ठक्कर और केसी गणपति ने जकार्ता 2018 में इसी इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। गौरतलब है कि हांगझोउ 2023 में भारत ने सेलिंग में तीन मेडल जीते थे, और यह सिल्वर उस परंपरा को आगे बढ़ाता है।
दोनों खिलाड़ियों का सफर
31 वर्षीय मनु फ्रांसिस और 30 वर्षीय प्रिंस कुरिसिंकल नोबल दोनों कोच्चि के रहने वाले हैं और बचपन से एक-दूसरे को जानते हैं। शुरुआती दिनों में ही सेलिंग के प्रति उनका लगाव विकसित हो गया था। दोनों ने भोपाल के नेशनल सेलिंग स्कूल और केरल के मुजिरिस यॉटिंग क्लब में प्रशिक्षण लिया। इससे पहले वे एशियाई सेलिंग चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल भी अपने नाम कर चुके हैं।
स्किफ स्पर्धा की विशेषताएँ
स्किफ एक हल्की और छोटी सेलिंग बोट होती है, जिसमें क्रू मेंबर्स के बीच असाधारण तालमेल की जरूरत होती है। इस स्पर्धा में जीत का फैसला अक्सर सामरिक निर्णयों, सटीक पोज़िशनिंग और एकाधिक राउंड में स्थिर प्रदर्शन से होता है। फ्रांसिस और नोबल की एकजुटता उनकी सफलता की बड़ी वजह रही। यह मेडल भारतीय सेलिंग की बढ़ती ताकत का प्रमाण है और आने वाले टूर्नामेंट में इस जोड़ी से और बड़े प्रदर्शन की उम्मीद जागी है।