ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियन बोले — शक्ति की स्थिति में युद्ध खत्म करना बेहतर, अमेरिका पर लगाए गंभीर आरोप
सारांश
मुख्य बातें
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने 21 अगस्त को तेहरान में स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ चल रहे संघर्ष को अभी समाप्त करना इसलिए उचित है क्योंकि ईरान इस समय शक्ति और सम्मान की स्थिति में है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों की कूटनीतिक समयसीमा पूरी हो चुकी है और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर कड़े प्रतिबंध लागू करने की बात दोहरा रहे हैं।
मुख्य बयान और संदर्भ
राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने तेहरान में ईरानी मेडिकल सोसाइटी के इस्लामिक एसोसिएशन की 31वीं महासभा को संबोधित करते हुए यह बात कही। उनके कार्यालय की वेबसाइट पर जारी बयान के अनुसार, उन्होंने कहा: "बेहतर है कि हम आज ही युद्ध समाप्त कर दें जब हम शक्ति और सम्मान की स्थिति में हैं और पूरी दुनिया हमारी जीत को स्वीकार कर रही है।" उन्होंने आगे आरोप लगाया कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करते हुए ईरान के स्कूलों, अस्पतालों और बुनियादी ढाँचे पर हमला किया, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय समुदाय अमेरिका की आलोचना कर रहा है।
जून समझौते पर ईरान का रुख
पेजेश्कियन ने जून में ईरान और अमेरिका के बीच हस्ताक्षरित ज्ञापन समझौते को "सम्मानजनक और मूल्यवान" बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस समझौते का कोई भी प्रावधान आत्मसमर्पण का संकेत नहीं देता और सभी दायित्व दूसरे पक्ष पर हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत में जो हासिल हुआ वह एक बड़ी उपलब्धि थी, जिसे ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने एकमत से स्वीकृति दी।
आत्मसमर्पण नहीं — कड़ी चेतावनी भी
शांति की बात करने के साथ-साथ पेजेश्कियन ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि फिर से हमला हुआ तो ईरान झुकेगा नहीं। उन्होंने कहा: "हम किसी भी परिस्थिति में हमलों के सामने नहीं झुकेंगे। हम आखिरी सांस तक उनके खिलाफ खड़े रहेंगे और उन्हें करारा जवाब देंगे।" उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के सैन्य कमांडर और सशस्त्र बल पूरे दिल से देश की रक्षा के लिए तैयार हैं।
कानूनी मोर्चे पर भी सक्रिय ईरान
नई दिल्ली स्थित ईरान कल्चरल हाउस के निदेशक फरीद फरीदासर ने गुब्बी फोरम में आयोजित एक सेमिनार — 'अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत ईरान पर अमेरिकी हमला: आक्रामकता या आत्मरक्षा' — के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि इस चर्चा में ईरानी वकीलों का एक उच्च-स्तरीय समूह, पत्रकार, शिक्षाविद और भारतीय अधिकारी शामिल थे। फरीदासर ने कहा: "कानूनी दृष्टिकोण से, ईरान के खिलाफ आक्रामकता का कृत्य किया गया है। अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत ईरान को आत्मरक्षा का और इस मामले को अंतरराष्ट्रीय अदालतों के माध्यम से आगे बढ़ाने का अधिकार है।"
आगे क्या होगा
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका-ईरान संबंधों में तनाव चरम पर है और 60 दिनों की समयसीमा बीत जाने के बाद दोनों देशों के बीच अगले कदम पर दुनिया की नजर टिकी है। ट्रंप प्रशासन की ओर से प्रतिबंधों को और कड़ा करने के संकेत मिल रहे हैं, जबकि ईरान कूटनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटा है।