पेजेश्कियन का बड़ा बयान: खामेनेई की मंज़ूरी के बिना अमेरिका-ईरान समझौते पर कोई फैसला नहीं
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका-ईरान परमाणु समझौते से जुड़ा कोई भी निर्णय सर्वोच्च नेता खामेनेई की अनुमति और सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के ढाँचे के बाहर नहीं लिया जाएगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब 60 दिन के संघर्ष विराम की संभावित घोषणा को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में तेज़ चर्चा है।
पेजेश्कियन का स्पष्ट संदेश
पेजेश्कियन ने कहा, 'कोई भी बयान, विश्लेषण या रुख जो समाज में विभाजन पैदा करता है, वास्तव में दुश्मन को फायदा पहुँचाने जैसा होता है।' उन्होंने आगे जोड़ा, 'देश का संचालन एकीकृत निर्णय और सामूहिक अनुशासन की माँग करता है।' यह बयान ईरान की आंतरिक राजनीतिक एकता पर ज़ोर देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
संघर्ष विराम की अटकलें और अमेरिकी दावे
अमेरिकी वेबसाइट एक्सियोस ने एक अमेरिकी सैन्य अधिकारी के हवाले से दावा किया है कि 60 दिन के संघर्ष विराम की घोषणा जल्द हो सकती है। कथित तौर पर इस बातचीत में होर्मुज़ जलडमरूमध्य, ईरान के परमाणु कार्यक्रम और कुछ आर्थिक पाबंदियाँ हटाने की शर्तें शामिल हैं। हालाँकि ईरानी पक्ष ने इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
एक्स पोस्ट में खोर्रमशहर का ऐतिहासिक संदर्भ
इससे पहले पेजेश्कियन ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के ज़रिए ईरान के प्रतिरोध की ऐतिहासिक विरासत का हवाला देते हुए अमेरिका को संदेश दिया। उन्होंने लिखा, 'हमारा देश आज भी, बिना हारे डटा हुआ है — ठीक बहादुर खोर्रमशहर के लोगों की तरह, जो हमलावर सेना के खिलाफ कई दिनों तक डटे रहे ताकि दुनिया को ईरानी लोगों की ताकत का अंदाज़ा लग सके।'
खोर्रमशहर, ईरान के खुजेस्तान प्रांत में शत्त अल-अरब और कारुन नदियों के संगम पर स्थित एक ऐतिहासिक बंदरगाह शहर है, जो 1980 के दशक में ईरान-इराक युद्ध के दौरान भीषण तबाही का गवाह बना था। युद्ध के बाद इसे पुनर्निर्मित किया गया और ईरान ने अपनी एक उन्नत बैलिस्टिक मिसाइल का नाम भी 'खोर्रमशहर' रखा, जिसे तेहरान की सैन्य परेडों में प्रदर्शित किया जाता है।
व्यापक संदर्भ: ईरान की वार्ता-नीति
गौरतलब है कि ईरान में सर्वोच्च नेता का पद राष्ट्रपति से ऊपर होता है और विदेश नीति के अंतिम निर्णय उन्हीं के पास होते हैं। पेजेश्कियन का यह बयान इस संवैधानिक वास्तविकता को रेखांकित करता है और साथ ही यह संकेत भी देता है कि वार्ता की प्रक्रिया में आंतरिक मतभेदों को सार्वजनिक न करने का दबाव है। यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय दबाव और घरेलू आर्थिक संकट दोनों एक साथ ईरान पर असर डाल रहे हैं।
आगे क्या
विश्लेषकों के अनुसार, यदि 60 दिन के संघर्ष विराम की घोषणा होती है तो यह ईरान-अमेरिका संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ हो सकता है। हालाँकि परमाणु कार्यक्रम और पाबंदियों पर किसी ठोस सहमति की पुष्टि अभी बाकी है। दोनों पक्षों की आगामी प्रतिक्रियाएँ यह तय करेंगी कि यह कूटनीतिक प्रयास किस दिशा में जाता है।