3 अगस्त 2026
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ईरान-अमेरिका एमओयू: राष्ट्रपति पेजेश्कियन बोले — 'दुश्मन को समझौते पर कायम रहने के लिए मजबूर करना होगा'

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ईरान-अमेरिका एमओयू: राष्ट्रपति पेजेश्कियन बोले — 'दुश्मन को समझौते पर कायम रहने के लिए मजबूर करना होगा'

सारांश

ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियन का संदेश साफ है — 18 जून का एमओयू सिर्फ कागज़ नहीं, बल्कि ईरान की विदेश नीति की धुरी है। लेकिन ट्रंप की 'तैयार हूँ, पर रुका हूँ' वाली भाषा और क्षेत्र में जारी सैन्य टकराव के बीच यह समझौता गहरे दबाव में है।

मुख्य बातें

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने 3 अगस्त 2026 को एक्स पर कहा कि अमेरिका को एमओयू की शर्तों पर कायम रहने के लिए बाध्य किया जाना चाहिए।
सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सभी सदस्य इस एमओयू पर एकमत हैं।
कार्यवाहक रक्षा मंत्री सैयद माजिद इब्न अल-रजा ने एक्स पर चेतावनी दी — ईरान हर धमकी को गंभीरता से लेता है और निष्क्रिय नहीं रहेगा।
डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर कहा कि उन्होंने मध्य पूर्वी देशों के अनुरोध पर हमला टाला; आगामी समझौते में होर्मुज स्ट्रेट खोलना और परमाणु खतरा समाप्त करना शामिल होगा।
18 जून को हस्ताक्षरित एमओयू के तहत 60 दिनों में अंतिम समझौते की समयसीमा थी, जो हालिया तनाव के कारण अधर में है।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने 3 अगस्त 2026 को स्पष्ट किया कि अमेरिका को 18 जून को हस्ताक्षरित एमओयू (समझौता ज्ञापन) की शर्तों का पालन करने के लिए बाध्य किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यह समझौता भविष्य में ईरान की विदेश नीति का केंद्रबिंदु बनेगा।

पेजेश्कियन का एक्स पोस्ट और मुख्य बयान

राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सभी सदस्य इस एमओयू पर एकमत हैं। उन्होंने कहा, 'हमें दुश्मन को उस बात पर मजबूर करने की कोशिश करनी चाहिए जिस पर उसने हस्ताक्षर किया है। इस एमओयू से देश, इलाके और हमारे साथियों की सुरक्षा बेहतर होगी।'

गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है और 60 दिनों में अंतिम समझौते तक पहुँचने की समयसीमा दबाव में है।

ईरान के कार्यवाहक रक्षा मंत्री की चेतावनी

इसी बीच ईरान के कार्यवाहक रक्षा मंत्री सैयद माजिद इब्न अल-रजा ने रविवार को एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि तेहरान हर शत्रु-धमकी को वास्तविक और गंभीर मानता है — इसे महज मनोवैज्ञानिक युद्ध कहकर खारिज नहीं किया जा सकता। उन्होंने लिखा, 'हम न तो आश्चर्यचकित होंगे और न ही निष्क्रिय रहेंगे। हम धमकियों को अपनी तैयारी बढ़ाने, अपनी रोकथाम क्षमता मजबूत करने और अपनी ताकत विकसित करने के आधार के रूप में इस्तेमाल करते हैं।'

ट्रंप का रुख: हमला टाला, लेकिन धमकी बरकरार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट में कहा कि अमेरिका द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन ईरान और अन्य मध्य पूर्वी देशों के अनुरोध पर उन्होंने फिलहाल हमला टाल दिया है। ट्रंप ने एक आगामी समझौते का उल्लेख किया, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट को तत्काल और पूरी तरह खोलना तथा ईरान के परमाणु खतरे को समाप्त करना शामिल होगा।

इससे पहले अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि अमेरिका और इजरायल ईरानी ऊर्जा अवसंरचना पर सप्ताहांत में हमले कर सकते हैं।

सैन्य टकराव की पृष्ठभूमि

अमेरिकी सेना ने पिछले महीने ईरानी ठिकानों पर कई हमले किए, जिन्हें होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर ईरानी हमलों का जवाब बताया गया। अमेरिका का कहना था कि इन कार्रवाइयों का उद्देश्य व्यावसायिक शिपिंग को बाधित करने की ईरान की क्षमता को कमज़ोर करना था। जवाब में ईरान ने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।

एमओयू और आगे की राह

18 जून को हस्ताक्षरित इस एमओयू के तहत दोनों देशों को 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते पर पहुँचना था। हालाँकि, हालिया सैन्य टकराव और बढ़ते तनाव के कारण बातचीत का परिणाम अधर में है। विश्लेषकों के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच विश्वास की खाई को पाटना ही इस प्रक्रिया की सबसे बड़ी चुनौती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन विरोधाभास यह है कि जिस एमओयू को वे ईरान की विदेश नीति का केंद्र बता रहे हैं, उसकी 60 दिन की समयसीमा पहले ही दबाव में है। ट्रंप की 'हमला टाला, पर तैयार हूँ' वाली भाषा बातचीत की मेज़ को बनाए रखती है, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट पर जारी सैन्य गतिविधियाँ यह स्पष्ट करती हैं कि दोनों पक्ष एक साथ बातचीत और टकराव में हैं। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की एकजुटता का दावा घरेलू राजनीतिक संदेश भी है — क्योंकि ईरान में एमओयू के आलोचक कम नहीं हैं।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरान-अमेरिका एमओयू क्या है और इस पर कब हस्ताक्षर हुए?
यह एक समझौता ज्ञापन है जिस पर 18 जून 2026 को ईरान और अमेरिका ने हस्ताक्षर किए। इसके तहत दोनों देशों को 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते पर पहुँचना था, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट को खोलना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों का समाधान शामिल है।
राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने अमेरिका पर दबाव बनाने की बात क्यों कही?
पेजेश्कियन का कहना है कि अमेरिका को उस एमओयू की शर्तों का पालन करने के लिए बाध्य किया जाना चाहिए जिस पर उसने खुद हस्ताक्षर किए हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी सेना ने पिछले महीने ईरानी ठिकानों पर हमले किए और बातचीत की प्रक्रिया अनिश्चितता में है।
ट्रंप ने ईरान पर हमला क्यों टाला?
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर बताया कि ईरान और अन्य मध्य पूर्वी देशों के अनुरोध पर उन्होंने हमला स्थगित किया है। उन्होंने एक आगामी समझौते का संकेत दिया जिसमें होर्मुज स्ट्रेट को तत्काल खोलना और ईरान के परमाणु खतरे को समाप्त करना शामिल होगा।
होर्मुज स्ट्रेट विवाद में अब तक क्या हुआ है?
अमेरिकी सेना ने पिछले महीने ईरानी ठिकानों पर कई हमले किए, जिन्हें होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर ईरानी हमलों का जवाब बताया गया। ईरान ने जवाब में क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
ईरान-अमेरिका बातचीत का भविष्य क्या है?
60 दिनों की समयसीमा हालिया सैन्य टकराव के कारण दबाव में है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल एमओयू पर एकमत है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच विश्वास की खाई और जारी सैन्य गतिविधियाँ अंतिम समझौते को अनिश्चित बनाती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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