24 सितंबर 2026
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दशहरा-दिवाली पर चीनी की कीमतें काबू में रहेंगी, एक्स-मिल दर ₹4,450 प्रति क्विंटल: आईएसएमए

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दशहरा-दिवाली पर चीनी की कीमतें काबू में रहेंगी, एक्स-मिल दर ₹4,450 प्रति क्विंटल: आईएसएमए

सारांश

त्योहारी सीजन से पहले आईएसएमए ने बड़ा आश्वासन दिया है — एक्स-मिल चीनी कीमतों में 25-30% की गिरावट के साथ औसत ₹4,450 प्रति क्विंटल पर आ चुकी हैं। सरकार और उद्योग दशहरा-दिवाली पर किफायती चीनी सुनिश्चित करने के लिए एकजुट हैं।

मुख्य बातें

आईएसएमए के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने 24 सितंबर 2026 को पुष्टि की कि सरकार और चीनी उद्योग दशहरा व दिवाली पर उपभोक्ताओं को किफायती दरों पर चीनी उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
देशभर में एक्स-मिल चीनी की कीमतों में 25 से 30 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है।
पूरे भारत में एक्स-मिल कीमत का वर्तमान औसत ₹4,450 प्रति क्विंटल है।
खुदरा कीमतों में पहले से नरमी शुरू है, आने वाले हफ्तों में और गिरावट संभावित है।
थोक से खुदरा तक राहत पहुँचने में आपूर्ति श्रृंखला के कारण कुछ समय का अंतराल अपेक्षित है।

त्योहारी सीजन से ठीक पहले इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (आईएसएमए) के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने 24 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार और चीनी उद्योग दोनों मिलकर दशहरा तथा दिवाली के दौरान उपभोक्ताओं को किफायती दरों पर चीनी उपलब्ध कराने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। उनके अनुसार घरेलू बाज़ार में चीनी की आपूर्ति पर्याप्त बनी हुई है और खुदरा कीमतों में पहले से नरमी शुरू हो चुकी है।

मौजूदा कीमतों की स्थिति

बल्लानी ने बताया कि एक्स-मिल चीनी की कीमतों में पहले ही लगभग 25 से 30 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की जा चुकी है। इस समय पूरे भारत में एक्स-मिल कीमत का औसत करीब ₹4,450 प्रति क्विंटल है। उन्होंने कहा, 'खुदरा कीमतें पहले ही कम हो चुकी हैं और आने वाले हफ्तों में इनमें और गिरावट आने की संभावना है।'

खुदरा कीमतों तक राहत पहुँचने में समय क्यों लगता है

बल्लानी ने स्पष्ट किया कि एक्स-मिल और खुदरा कीमतों के बीच बदलाव में आमतौर पर एक समयांतराल होता है। थोक स्तर पर हुई कमी का लाभ आपूर्ति श्रृंखला के ज़रिये उपभोक्ताओं तक पहुँचने में कुछ सप्ताह लग सकते हैं। उनके मुताबिक, 'अब जब एक्स-मिल कीमतों में 25 से 30 प्रतिशत तक कमी आ चुकी है, तो बाज़ार में कम लागत के स्तर के अनुरूप खुदरा कीमतों में भी धीरे-धीरे कमी आएगी।'

सरकार और उद्योग की साझा प्रतिबद्धता

बल्लानी ने जोर देकर कहा कि सरकार और उद्योग दोनों उपभोक्ताओं को त्योहारी माँग के दौरान बहुत उचित दर पर चीनी उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह ऐसे समय में आया है जब दशहरा बेहद करीब है और उसके बाद दिवाली समेत कई अन्य त्योहार आने वाले हैं, जिनमें मिठाई की माँग परंपरागत रूप से तेज़ी से बढ़ती है।

आपूर्ति की स्थिति और आगे की राह

घरेलू बाज़ार में चीनी की पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने के प्रयास जारी हैं। गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में त्योहारी सीजन से पहले चीनी की कीमतों में तेज़ी की शिकायतें आती रही हैं, इसलिए इस बार उद्योग और सरकार की ओर से समय पर दिया गया यह आश्वासन उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है। आने वाले हफ्तों में खुदरा बाज़ार में कीमतों की दिशा यह तय करेगी कि ये वादे कितने कारगर साबित होते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि यह राहत थोक से खुदरा काउंटर तक पहुँचने में कितना वक्त लेती है — और क्या वह त्योहारी माँग के चरम से पहले मिलती है। पिछले कई त्योहारी सीजन में यही समयांतराल उपभोक्ताओं की जेब पर भारी पड़ा है। सरकार और उद्योग के संयुक्त आश्वासन मूल्यवान हैं, पर आपूर्ति श्रृंखला की अकुशलताओं को संबोधित किए बिना ये वादे अधूरे रह सकते हैं।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दशहरा और दिवाली पर चीनी की कीमतें बढ़ेंगी या घटेंगी?
आईएसएमए के महानिदेशक दीपक बल्लानी के अनुसार, खुदरा चीनी की कीमतों में पहले ही नरमी शुरू हो चुकी है और आने वाले हफ्तों में इनमें और गिरावट आने की संभावना है। सरकार और उद्योग दोनों त्योहारी सीजन के दौरान किफायती दरें सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
इस समय एक्स-मिल चीनी की कीमत कितनी है?
वर्तमान में पूरे भारत में एक्स-मिल चीनी की औसत कीमत करीब ₹4,450 प्रति क्विंटल है। आईएसएमए के अनुसार एक्स-मिल कीमतों में पहले ही लगभग 25 से 30 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हो चुकी है।
एक्स-मिल कीमत में गिरावट के बाद भी खुदरा में राहत क्यों देर से मिलती है?
बल्लानी ने स्पष्ट किया कि थोक यानी एक्स-मिल कीमतों में कमी का लाभ आपूर्ति श्रृंखला के माध्यम से उपभोक्ताओं तक पहुँचने में कुछ समय लगता है। इस वजह से खुदरा बाज़ार में कीमतों में बदलाव में देरी स्वाभाविक है।
चीनी की उचित आपूर्ति सुनिश्चित करने में सरकार की क्या भूमिका है?
सरकार और चीनी उद्योग मिलकर घरेलू बाज़ार में चीनी की पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रित रखने के प्रयास कर रहे हैं। आईएसएमए के अनुसार यह सहयोग विशेष रूप से त्योहारी सीजन में माँग की बढ़ोतरी को देखते हुए किया जा रहा है।
आईएसएमए क्या है और चीनी उद्योग में इसकी क्या भूमिका है?
इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (आईएसएमए) भारत के चीनी उद्योग का प्रमुख उद्योग संगठन है। यह उद्योग और सरकार के बीच नीति समन्वय, मूल्य निगरानी और आपूर्ति प्रबंधन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
राष्ट्र प्रेस
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