चीनी कीमतें काबू में रखने को केंद्र ने 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी शून्य शुल्क आयात की दी मंजूरी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने गुरुवार, 20 अगस्त 2026 को बढ़ती चीनी कीमतों पर लगाम लगाने के लिए एक बड़ा नीतिगत कदम उठाते हुए 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के शून्य शुल्क आयात को मंजूरी दे दी। वाणिज्य मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, यह आयात टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के तहत 31 अक्टूबर 2026 तक किया जा सकेगा। यह पिछले एक दशक में पहला अवसर है जब भारत विदेशों से चीनी का आयात करने जा रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
रिपोर्टों के अनुसार, देश में बीते दो महीनों में चीनी की कीमतों में करीब 40 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इस असाधारण मूल्यवृद्धि ने सरकार को आयात का रास्ता खोलने पर विवश किया। TRQ व्यवस्था के तहत तय सीमा तक आयात पर कोई सीमा शुल्क नहीं लगेगा, जिससे घरेलू बाज़ार में आपूर्ति बढ़ाने की उम्मीद है।
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब त्योहारी सीजन दस्तक देने वाला है — दशहरा, दीपावली और अन्य पर्वों के दौरान मिठाइयों की माँग में भारी उछाल आता है, जिससे चीनी की खपत सामान्य से कई गुना बढ़ जाती है।
स्टॉक सीमा पर नया नियम
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने एक अलग अधिसूचना में जमाखोरी पर अंकुश लगाने के लिए स्टॉक सीमा कड़ी कर दी है। नया आदेश 1 सितंबर 2026 से लागू होगा और 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा।
इस आदेश के तहत बड़े खरीदारों और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक रखने की सीमा घटाकर 15 दिन कर दी गई है। विशेष रूप से, जो भी औद्योगिक या संस्थागत उपभोक्ता प्रतिमाह 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी का उपयोग करता है, वह अपनी 15 दिनों की आवश्यकता से अधिक भंडारण नहीं कर सकेगा।
एक दशक में पहला आयात — पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि भारत सामान्यतः दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादकों और निर्यातकों में गिना जाता है। ऐसे में शून्य शुल्क पर आयात की अनुमति देना घरेलू आपूर्ति संकट की गंभीरता को रेखांकित करता है। यह ऐसे समय में आया है जब गन्ने की फसल पर अनिश्चितता और बढ़ती माँग ने मिलकर कीमतों को ऊपर धकेला है।
सरकार ने इससे पहले भी कई प्रशासनिक उपाय किए थे, जिनमें स्टॉक सीमाएँ और निर्यात पर प्रतिबंध शामिल रहे हैं। आयात की अनुमति उन उपायों की अगली कड़ी के रूप में देखी जा रही है।
आम जनता और उद्योग पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि शून्य शुल्क आयात और स्टॉक सीमा के संयुक्त प्रभाव से त्योहारी सीजन से पहले खुदरा बाज़ार में चीनी की उपलब्धता सुधरेगी। मिठाई उद्योग, पेय निर्माता और अन्य खाद्य-प्रसंस्करण इकाइयाँ, जो कच्चे माल के रूप में चीनी पर निर्भर हैं, इस निर्णय से राहत महसूस कर सकती हैं।
हालाँकि, घरेलू चीनी मिलें और गन्ना किसान इस कदम को लेकर सतर्क हैं, क्योंकि आयातित चीनी की बड़ी मात्रा घरेलू कीमतों पर दबाव डाल सकती है।
क्या होगा आगे
सरकार की नज़र अब इस बात पर होगी कि 31 अक्टूबर 2026 की समयसीमा के भीतर आयात किस गति से होता है और क्या यह मात्रा कीमतों को स्थिर करने के लिए पर्याप्त साबित होती है। स्टॉक सीमा नियम 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगा, जिसके बाद स्थिति की समीक्षा अपेक्षित है।