चीनी के खुदरा दाम अगस्त उच्च से 15% घटे, एक्स-मिल कीमतें 28% नीचे: केंद्र सरकार
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 1 अक्टूबर 2026 को जानकारी दी कि खुदरा बाज़ार में चीनी की कीमतें अगस्त 2026 के उच्चतम स्तर से करीब 15 प्रतिशत नीचे आ चुकी हैं, जबकि मिल से निकलने वाली चीनी यानी एक्स-मिल की दरें शीर्ष स्तर से लगभग 28 प्रतिशत गिरकर पिछले तीन हफ्तों से स्थिर बनी हुई हैं। सरकार के अनुसार, आपूर्ति शृंखला में सुधार और नीतिगत हस्तक्षेपों के चलते यह राहत मिली है।
कीमतों में गिरावट का कारण
सरकारी बयान के मुताबिक, चीनी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और बाज़ार में इसकी सुचारू आवाजाही को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए विभिन्न प्रशासनिक कदमों का यह सीधा परिणाम है। सरकार ने कहा कि एक्स-मिल कीमतों में आई गिरावट का फायदा धीरे-धीरे आपूर्ति शृंखला के ज़रिए उपभोक्ताओं तक पहुँचेगा, जिससे खुदरा दामों में और कमी आने की उम्मीद है।
नए स्टॉक सीमा नियम
जमाखोरी रोकने और बाज़ार में चीनी की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने चीनी डीलरों के लिए स्टॉक रखने की अवधि घटाकर 15 दिन कर दी है और अधिकतम भंडारण सीमा 1,000 क्विंटल निर्धारित की है। ये नियम 15 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेंगे।
नए प्रावधानों के तहत डीलर चीनी प्राप्त होने की तारीख से 15 दिन से अधिक समय तक उसे भंडारित नहीं कर सकेंगे। इसके अलावा देश में किसी भी स्थान पर किसी भी समय 1,000 क्विंटल से अधिक चीनी का स्टॉक रखना प्रतिबंधित होगा।
कोलकाता और असम के लिए विशेष छूट
क्षेत्रीय बाज़ार की विशेष आवश्यकताओं को देखते हुए कोलकाता और उसके महानगरीय क्षेत्र तथा असम राज्य के लिए स्टॉक सीमा 2,000 क्विंटल रखी गई है। सरकार ने स्पष्ट किया कि कोलकाता उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक से चीनी आयात कर पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर क्षेत्र में उसकी आपूर्ति करता है।
असम के लिए ऊँची सीमा भौगोलिक चुनौतियों, परिवहन लॉजिस्टिक्स और पूर्वोत्तर के उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखकर तय की गई है। यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि दूरदराज़ के उपभोक्ताओं तक आपूर्ति बाधित न हो।
नीतिगत उद्देश्य
सरकार का कहना है कि स्टॉक मात्रा और अवधि दोनों को सीमित करने का मकसद आपूर्ति शृंखला में चीनी की व्यवस्थित आवाजाही सुनिश्चित करना है। इससे जमाखोरी, सट्टेबाज़ी और अनावश्यक भंडारण पर लगाम लगेगी और उचित कीमतों पर चीनी की नियमित उपलब्धता बनी रहेगी।
गौरतलब है कि यह कदम ऐसे समय में आया है जब त्योहारी सीज़न के चलते चीनी की माँग में उछाल आ सकता है। नए नियमों के ज़रिए सरकार का लक्ष्य है कि मिल से उपभोक्ता तक की आपूर्ति शृंखला में कोई व्यवधान न आए और आम जनता को राहत मिलती रहे।