मध्य प्रदेश में चीनी स्टॉक सीमा तय: डीलर अब 4,000 क्विंटल से अधिक नहीं रख सकेंगे — मंत्री गोविंद राजपूत
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश सरकार ने 1 सितंबर 2026 को चीनी की कालाबाजारी पर लगाम लगाने के लिए सख्त स्टॉक सीमाएँ लागू कर दी हैं। राज्य के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद राजपूत ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में कोई भी डीलर 4,000 क्विंटल से अधिक चीनी का भंडारण नहीं कर सकेगा। यह निर्देश राज्यभर के सभी जिला कलेक्टरों को तत्काल प्रभाव से भेज दिए गए हैं।
मुख्य नियम और प्रतिबंध
मंत्री राजपूत के अनुसार, डीलरों के लिए दोहरी सीमा तय की गई है — मात्रा में 4,000 क्विंटल की अधिकतम सीमा और समय में 30 दिन से अधिक भंडारण पर पाबंदी। इसके अतिरिक्त, सभी डीलरों को भारत सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के पोर्टल पर अपने स्टॉक का नियमित और अद्यतन विवरण दर्ज करना अनिवार्य होगा।
गौरतलब है कि यह व्यवस्था उन डीलरों पर लागू नहीं होगी जो राज्य सरकार या उसके किसी प्राधिकृत प्राधिकारी के निर्देश पर सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के अंतर्गत उचित मूल्य की दुकानों के लिए चीनी का भंडारण करते हैं।
थोक उपभोक्ताओं पर असर
जो थोक उपभोक्ता प्रतिमाह 10 मीट्रिक टन या उससे अधिक चीनी का उपयोग कच्चे माल के रूप में करते हैं, वे 15 दिन से अधिक का स्टॉक नहीं रख सकेंगे। इस श्रेणी में हलवाई, मिठाई विक्रेता, शीतल पेय निर्माता और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग शामिल हैं — विशेष रूप से वे जिन्होंने पिछले एक वर्ष में औसतन 100 मीट्रिक टन प्रतिमाह की खपत की है।
सरकार की प्रतिक्रिया और प्रवर्तन
मंत्री राजपूत ने बताया कि इन दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दे दिए गए हैं। यह कदम ऐसे समय में आया है जब त्योहारी सीज़न से पहले चीनी की माँग में उछाल आने की आशंका रहती है और कालाबाजारी की संभावना बढ़ जाती है।
आगे क्या होगा
राज्य सरकार के इस आदेश के बाद जिला स्तर पर प्रवर्तन अभियान शुरू होने की उम्मीद है। पोर्टल पर स्टॉक घोषणा की अनिवार्यता से आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता आएगी और उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर चीनी उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।