चीनी की एक्स-मिल कीमतों में 20% गिरावट, सरकार ने जमाखोरी रोकने को लागू किया पखवाड़ा कोटा
सारांश
मुख्य बातें
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने 28 अगस्त 2026 को पुष्टि की कि देशभर में एक्स-मिल चीनी कीमतों में लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है और खुदरा बाज़ार में भी दाम नीचे आने शुरू हो गए हैं। मंत्रालय के अनुसार, आपूर्ति शृंखला में मूल्य परिवर्तन का असर क्रमिक रूप से पहुँचता है, इसलिए आने वाले हफ्तों में खुदरा स्तर पर और नरमी की संभावना है।
कीमतें क्यों बढ़ी थीं और अब क्यों घट रही हैं
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि हालिया मूल्य वृद्धि का मुख्य कारण वास्तविक आपूर्ति की कमी नहीं, बल्कि जमाखोरी और सट्टेबाज़ी थी। सरकार ने देशभर की चीनी मिलों में भंडार का भौतिक सत्यापन अभियान चलाया, जिसमें कई मिलों के पास घोषित आँकड़ों से अधिक चीनी का भंडार पाया गया। इस अभियान ने यह साबित किया कि देश में चीनी की कोई वास्तविक कमी नहीं है।
इसके अलावा, कुछ चीनी मिलें 'शॉर्ट सेलिंग' का सहारा ले रही थीं — अर्थात मासिक कोटे के तहत निर्धारित मात्रा से कम चीनी बाज़ार में जारी की जा रही थी। इससे पर्याप्त भंडार होने के बावजूद बाज़ार में कृत्रिम कमी का माहौल बनता था और कीमतों पर अनावश्यक दबाव पड़ता था।
सरकार के हस्तक्षेप और नई व्यवस्था
स्थिति को सुधारने के लिए सरकार ने सितंबर 2026 से मासिक कोटा प्रणाली की जगह पखवाड़ा-आधारित चीनी आवंटन प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है। नई व्यवस्था के तहत चीनी मिलों को आवंटित मात्रा का कम से कम 40 प्रतिशत पहले सप्ताह में और शेष मात्रा अगले सप्ताह में बाज़ार में जारी करनी होगी।
इसके साथ ही, मंत्रालय ने यह भी अनिवार्य किया है कि बिक्री के बाद चीनी को सात दिनों के भीतर मिल परिसर से भेजना होगा। यह कदम उस स्थिति को रोकने के लिए उठाया गया है जहाँ खरीदार महीने की शुरुआत में चीनी खरीद लेते थे लेकिन महीने के अंत तक मिल से नहीं उठाते थे, जिससे बाज़ार में कृत्रिम अभाव का आभास होता था।
नए पेराई सत्र से आपूर्ति और मज़बूत होगी
मंत्रालय ने बताया कि नया पेराई सत्र 15 अक्टूबर से शुरू होने जा रहा है। अक्टूबर में ही 10 लाख मीट्रिक टन से अधिक चीनी उत्पादन होने का अनुमान है। सरकार ने अक्टूबर में उत्पादित चीनी को बिना किसी अतिरिक्त प्रतिबंध के बेचने की अनुमति दे दी है, ताकि नए सत्र की चीनी शीघ्र घरेलू बाज़ार में उपलब्ध हो सके।
नवंबर 2026 में लगभग 45 लाख मीट्रिक टन चीनी उत्पादन होने की संभावना है, जिससे बाज़ार में आपूर्ति और सुदृढ़ होगी तथा कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलेगी। यह ऐसे समय में आया है जब त्योहारी सीज़न के मद्देनज़र चीनी की माँग बढ़ने की आशंका थी।
उपभोक्ताओं के लिए संदेश
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि देश में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता है और उपभोक्ताओं को घबराहट में अतिरिक्त खरीदारी करने की कोई आवश्यकता नहीं है। बड़े उपभोक्ताओं को भी अपनी वास्तविक आवश्यकता से अधिक भंडार न रखने की सलाह दी गई है। सरकार बाज़ार पर निगरानी बनाए हुए है और आवश्यकता पड़ने पर आगे भी हस्तक्षेप करेगी।