निर्जला एकादशी 2025: त्रिवेणी संगम पर हजारों श्रद्धालुओं ने किया पवित्र स्नान, हरिद्वार में भी उमड़ी भीड़
सारांश
मुख्य बातें
प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर 25 जून 2025 को निर्जला एकादशी के अवसर पर आस्था का विराट दृश्य उपस्थित हुआ, जब हजारों श्रद्धालु भोर से ही गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पवित्र संगम में डुबकी लगाने पहुँचे। श्रद्धालुओं ने स्नान के बाद भगवान विष्णु की आराधना करते हुए सुख-समृद्धि, पारिवारिक खुशहाली और विश्व शांति की कामना की। हरिद्वार में भी इस पर्व को लेकर व्यापक धार्मिक उत्साह देखा गया।
संगम तट पर भक्ति का वातावरण
सुबह के पहले पहर से ही प्रयागराज के घाटों और मंदिरों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। संगम में स्नान करने पहुँचे एक श्रद्धालु ने बताया, 'आज निर्जला एकादशी का पवित्र पर्व है। हम त्रिवेणी संगम में स्नान करने आए हैं। स्नान के बाद पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान भी किए हैं। यह दिन बेहद पुण्यदायी माना जाता है।' एक अन्य श्रद्धालु ने कहा कि एकादशी के दिन फल, जल, पंखे और अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करने से आध्यात्मिक पुण्य और आशीर्वाद की प्राप्ति होती है।
निर्जला एकादशी का धार्मिक महत्व
निर्जला एकादशी, जिसे भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म की सर्वाधिक महत्वपूर्ण एकादशियों में गिनी जाती है। इस व्रत में श्रद्धालु बिना जल और अन्न ग्रहण किए उपवास रखते हैं और भगवान नारायण का ध्यान, पूजन व जप करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान नारायण का निवास जल में माना गया है, इसीलिए इस दिन स्नान और जल का विशेष महत्व है।
पुरोहित गोपाल दास जी महाराज ने इस पर्व की महिमा बताते हुए कहा, 'आज भीमसेनी एकादशी यानी निर्जला एकादशी है। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को रखने से पूरे वर्ष की सभी एकादशियों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।'
हरिद्वार से अखाड़ा परिषद का संदेश
हरिद्वार में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने बताया कि महाभारत के अनुसार महर्षि वेदव्यास ने भीम को निर्जला एकादशी का व्रत रखने की सलाह दी थी। उन्होंने यह भी बताया कि इस वर्ष इस पर्व का महत्व और अधिक बढ़ गया है, क्योंकि हिंदू पंचांग में एक अतिरिक्त माह होने के कारण सामान्य 24 के बजाय 26 एकादशियाँ पड़ रही हैं। महंत पुरी ने श्रद्धालुओं से पवित्र नदी में या घर पर स्नान कर भगवान नारायण का ध्यान और पूजन करने का आह्वान किया।
सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन
एएसपी अनुष्का बडोला ने बताया, 'शाम की गंगा आरती तक सुरक्षा व्यवस्था बनी रहेगी। ड्यूटी पर तैनात सभी कर्मचारी मौजूद हैं और हालाँकि श्रद्धालुओं का लगातार आना-जाना जारी है, फिर भी भीड़ अभी नियंत्रण में है।' घाटों पर पुलिस बल की पर्याप्त तैनाती सुनिश्चित की गई थी ताकि बड़ी संख्या में आए श्रद्धालुओं का सुचारु प्रबंधन हो सके।
आगे की स्थिति
शाम को गंगा आरती के साथ इस पावन पर्व का समापन होना था, जिसमें भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना थी। प्रयागराज और हरिद्वार दोनों स्थानों पर प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए। निर्जला एकादशी के इस महापर्व ने एक बार फिर यह दर्शाया कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराएँ आज भी करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र हैं।