10 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

निर्जला एकादशी 2025: त्रिवेणी संगम पर हजारों श्रद्धालुओं ने किया पवित्र स्नान, हरिद्वार में भी उमड़ी भीड़

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
निर्जला एकादशी 2025: त्रिवेणी संगम पर हजारों श्रद्धालुओं ने किया पवित्र स्नान, हरिद्वार में भी उमड़ी भीड़

सारांश

निर्जला एकादशी पर प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर हजारों श्रद्धालुओं की आस्था उमड़ी। इस वर्ष पर्व का महत्व दोगुना है — हिंदू पंचांग में अतिरिक्त माह के कारण सामान्य 24 के बजाय 26 एकादशियाँ पड़ रही हैं। हरिद्वार में अखाड़ा परिषद ने भी भक्तों को पूजन और स्नान का आह्वान किया।

मुख्य बातें

25 जून 2025 को निर्जला एकादशी पर प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में हजारों श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान किया।
इस व्रत को भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है; मान्यता है कि इससे वर्षभर की सभी एकादशियों के बराबर पुण्य मिलता है।
इस वर्ष हिंदू पंचांग में अतिरिक्त माह के कारण सामान्य 24 के बजाय 26 एकादशियाँ पड़ रही हैं — यह जानकारी महंत रवींद्र पुरी ने दी।
हरिद्वार में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने महाभारत के संदर्भ से इस व्रत की पौराणिक पृष्ठभूमि बताई।
एएसपी अनुष्का बडोला के अनुसार शाम की गंगा आरती तक सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी गई और भीड़ नियंत्रण में रही।

प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर 25 जून 2025 को निर्जला एकादशी के अवसर पर आस्था का विराट दृश्य उपस्थित हुआ, जब हजारों श्रद्धालु भोर से ही गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पवित्र संगम में डुबकी लगाने पहुँचे। श्रद्धालुओं ने स्नान के बाद भगवान विष्णु की आराधना करते हुए सुख-समृद्धि, पारिवारिक खुशहाली और विश्व शांति की कामना की। हरिद्वार में भी इस पर्व को लेकर व्यापक धार्मिक उत्साह देखा गया।

संगम तट पर भक्ति का वातावरण

सुबह के पहले पहर से ही प्रयागराज के घाटों और मंदिरों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। संगम में स्नान करने पहुँचे एक श्रद्धालु ने बताया, 'आज निर्जला एकादशी का पवित्र पर्व है। हम त्रिवेणी संगम में स्नान करने आए हैं। स्नान के बाद पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान भी किए हैं। यह दिन बेहद पुण्यदायी माना जाता है।' एक अन्य श्रद्धालु ने कहा कि एकादशी के दिन फल, जल, पंखे और अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करने से आध्यात्मिक पुण्य और आशीर्वाद की प्राप्ति होती है।

निर्जला एकादशी का धार्मिक महत्व

निर्जला एकादशी, जिसे भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म की सर्वाधिक महत्वपूर्ण एकादशियों में गिनी जाती है। इस व्रत में श्रद्धालु बिना जल और अन्न ग्रहण किए उपवास रखते हैं और भगवान नारायण का ध्यान, पूजन व जप करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान नारायण का निवास जल में माना गया है, इसीलिए इस दिन स्नान और जल का विशेष महत्व है।

पुरोहित गोपाल दास जी महाराज ने इस पर्व की महिमा बताते हुए कहा, 'आज भीमसेनी एकादशी यानी निर्जला एकादशी है। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को रखने से पूरे वर्ष की सभी एकादशियों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।'

हरिद्वार से अखाड़ा परिषद का संदेश

हरिद्वार में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने बताया कि महाभारत के अनुसार महर्षि वेदव्यास ने भीम को निर्जला एकादशी का व्रत रखने की सलाह दी थी। उन्होंने यह भी बताया कि इस वर्ष इस पर्व का महत्व और अधिक बढ़ गया है, क्योंकि हिंदू पंचांग में एक अतिरिक्त माह होने के कारण सामान्य 24 के बजाय 26 एकादशियाँ पड़ रही हैं। महंत पुरी ने श्रद्धालुओं से पवित्र नदी में या घर पर स्नान कर भगवान नारायण का ध्यान और पूजन करने का आह्वान किया।

सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन

एएसपी अनुष्का बडोला ने बताया, 'शाम की गंगा आरती तक सुरक्षा व्यवस्था बनी रहेगी। ड्यूटी पर तैनात सभी कर्मचारी मौजूद हैं और हालाँकि श्रद्धालुओं का लगातार आना-जाना जारी है, फिर भी भीड़ अभी नियंत्रण में है।' घाटों पर पुलिस बल की पर्याप्त तैनाती सुनिश्चित की गई थी ताकि बड़ी संख्या में आए श्रद्धालुओं का सुचारु प्रबंधन हो सके।

आगे की स्थिति

शाम को गंगा आरती के साथ इस पावन पर्व का समापन होना था, जिसमें भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना थी। प्रयागराज और हरिद्वार दोनों स्थानों पर प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए। निर्जला एकादशी के इस महापर्व ने एक बार फिर यह दर्शाया कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराएँ आज भी करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह नहीं बताती कि इतनी बड़ी भीड़ के लिए घाटों पर स्थायी अवसंरचना और चिकित्सा सुविधाएँ कितनी पर्याप्त हैं। प्रशासन का 'भीड़ नियंत्रण में है' का बयान आश्वस्त करने वाला है, लेकिन महाकुंभ जैसे अनुभवों के बाद भीड़ प्रबंधन की जवाबदेही की माँग और प्रासंगिक हो जाती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

निर्जला एकादशी 2025 कब है और इसे भीमसेनी एकादशी क्यों कहते हैं?
निर्जला एकादशी 2025 में 25 जून को मनाई गई। इसे भीमसेनी एकादशी इसलिए कहते हैं क्योंकि महाभारत के अनुसार महर्षि वेदव्यास ने भीम को यह व्रत रखने की सलाह दी थी, जो बिना जल और अन्न के व्रत नहीं कर पाते थे।
निर्जला एकादशी का व्रत रखने से क्या फल मिलता है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार निर्जला एकादशी का व्रत रखने से पूरे वर्ष की सभी एकादशियों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है। इस दिन जल, फल, पंखे और उपयोगी वस्तुओं का दान करने से भी विशेष आध्यात्मिक लाभ माना जाता है।
इस वर्ष 26 एकादशियाँ क्यों पड़ रही हैं?
हिंदू पंचांग में इस वर्ष एक अतिरिक्त माह (अधिक मास) होने के कारण सामान्य 24 एकादशियों के स्थान पर 26 एकादशियाँ पड़ रही हैं। यह जानकारी अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने दी।
प्रयागराज त्रिवेणी संगम पर निर्जला एकादशी के दिन सुरक्षा व्यवस्था कैसी थी?
एएसपी अनुष्का बडोला के अनुसार शाम की गंगा आरती तक सुरक्षा बल तैनात रहे और भीड़ नियंत्रण में बनी रही। सभी ड्यूटी कर्मचारी मौजूद थे और श्रद्धालुओं का आवागमन सुचारु रूप से जारी रहा।
निर्जला एकादशी पर त्रिवेणी संगम में स्नान का क्या महत्व है?
धार्मिक मान्यता है कि भगवान नारायण का निवास जल में है, इसलिए इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने का विशेष महत्व है। प्रयागराज का त्रिवेणी संगम — गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का मिलन स्थल — इस दिन के लिए सर्वाधिक पवित्र तीर्थ माना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले