29 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

गुरु पूर्णिमा 2025: प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर उमड़ी लाखों श्रद्धालुओं की भीड़, पवित्र स्नान के साथ हुई गुरु वंदना

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
गुरु पूर्णिमा 2025: प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर उमड़ी लाखों श्रद्धालुओं की भीड़, पवित्र स्नान के साथ हुई गुरु वंदना

सारांश

गुरु पूर्णिमा पर प्रयागराज का त्रिवेणी संगम आस्था से भर उठा — भोर से ही श्रद्धालुओं ने गंगा-यमुना-सरस्वती में डुबकी लगाई, गुरु वंदना की और दान-पुण्य किया। अयोध्या और शिरडी में भी भक्तों का सैलाब उमड़ा, जो सनातन गुरु-शिष्य परंपरा की जीवंतता का प्रमाण है।

मुख्य बातें

गुरु पूर्णिमा पर 29 जुलाई 2025 को प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर भोर से श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ी।
श्रद्धालुओं ने गंगा, यमुना और सरस्वती के पवित्र संगम में स्नान कर गुरु पूजा, दान और धार्मिक अनुष्ठान किए।
तीर्थ पुरोहित गोपाल गुरु ने गुरु-शिष्य परंपरा का महत्व बताते हुए कहा कि सनातन संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च है।
अयोध्या में सरयू नदी और शिरडी के साईं बाबा मंदिर में भी भक्तों का जनसैलाब उमड़ा।
गुरु पूर्णिमा पर भगवान वेदव्यास, श्रीकृष्ण और शिव की विशेष पूजा की जाती है।

प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर बुधवार, 29 जुलाई की भोर से ही श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ पड़ी। गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती के पवित्र संगम में डुबकी लगाकर श्रद्धालुओं ने अपने गुरुओं के प्रति कृतज्ञता अर्पित की और पूजा-अर्चना व दान-पुण्य किया। यह दृश्य सनातन परंपरा में गुरु-शिष्य संबंध की गहरी जड़ों का जीवंत प्रमाण था।

संगम घाट पर आस्था का जनसैलाब

तड़के से ही घाटों पर श्रद्धालुओं की कतारें लग गईं। एक श्रद्धालु ने बताया, 'मैं आज सुबह जल्दी उठा और भीड़ बढ़ने से पहले पवित्र डुबकी लगाने के लिए संगम आया। डुबकी लगाने के बाद, मैंने अपने गुरु की पूजा की और धार्मिक अनुष्ठान किए। हमने दान भी किया और दुनिया की भलाई और सभी की सलामती के लिए प्रार्थना की।' यह भावना अधिकांश श्रद्धालुओं की रही, जो परिवार की सुख-शांति और समाज के कल्याण की कामना लेकर संगम तट पर पहुँचे थे।

गुरु-शिष्य परंपरा का महत्व

तीर्थ पुरोहित गोपाल गुरु ने इस अवसर पर सनातन संस्कृति में गुरु के सर्वोच्च स्थान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, 'गुरु ऐसा चाहिए जो शिष्य से कुछ न ले और शिष्य ऐसा होना चाहिए जो गुरु को सब कुछ अर्पित कर दे।' गोपाल गुरु ने संत कबीर के प्रसिद्ध दोहे — 'गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पाय, बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय' — का उल्लेख करते हुए कहा कि गुरु ही मनुष्य को ज्ञान और सही मार्ग का बोध कराते हैं। उनके अनुसार केवल पुस्तकों का अध्ययन पर्याप्त नहीं है — सही दिशा दिखाने वाले गुरु का मार्गदर्शन उतना ही आवश्यक है।

किन देवताओं की होती है गुरु पूर्णिमा पर पूजा

गोपाल गुरु ने बताया कि गुरु पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धालु भगवान वेदव्यास, भगवान श्रीकृष्ण, भगवान शिव तथा अपने गुरु की पूजा करते हैं। संगम स्नान के उपरांत अनेक श्रद्धालु गुरु आश्रमों में जाकर पूजा-अर्चना करते हैं, जरूरतमंदों को भोजन कराते हैं और दान-दक्षिणा अर्पित करते हैं। उनके अनुसार इन पुण्य कार्यों से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है, समाज में सद्भाव बढ़ता है और देश की समृद्धि एवं गौरव में भी वृद्धि होती है।

अयोध्या और शिरडी में भी उत्साह

अयोध्या में भी गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष्य में श्रद्धालुओं ने सरयू नदी में पवित्र स्नान किया और मंदिरों में दर्शन-पूजन किया। वहीं, महाराष्ट्र के शिरडी स्थित साईं बाबा मंदिर में भी भक्तों का जनसैलाब उमड़ा, जो गुरु पूर्णिमा पर इस तीर्थस्थल की विशेष महत्ता को दर्शाता है। यह पर्व उत्तर प्रदेश से लेकर महाराष्ट्र तक, देशभर में एकसमान आस्था और श्रद्धा के साथ मनाया गया।

आगे की संभावनाएँ

गुरु पूर्णिमा का यह उत्सव हर वर्ष आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है और प्रयागराज जैसे तीर्थ नगरों में इसका महत्व विशेष रूप से बढ़ जाता है। महाकुंभ 2025 के बाद संगम तट पर श्रद्धालुओं की निरंतर उपस्थिति यह संकेत देती है कि धार्मिक पर्यटन और आस्था की यह धारा आने वाले वर्षों में और प्रबल होती रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सामाजिक सामंजस्य की भी धुरी है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर भीड़ के आँकड़ों पर केंद्रित रहती है, जबकि तीर्थ पुरोहितों और स्थानीय परंपराओं की भूमिका — जो इन आयोजनों को व्यवस्थित और सार्थक बनाती है — प्रायः अनदेखी रह जाती है।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुरु पूर्णिमा 2025 पर प्रयागराज में क्या हुआ?
29 जुलाई 2025 को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर भोर से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती के संगम में पवित्र स्नान के साथ गुरु पूजा, दान और धार्मिक अनुष्ठान किए गए।
गुरु पूर्णिमा पर किन देवताओं की पूजा की जाती है?
तीर्थ पुरोहित गोपाल गुरु के अनुसार, गुरु पूर्णिमा पर भगवान वेदव्यास, भगवान श्रीकृष्ण, भगवान शिव तथा अपने गुरु की विशेष पूजा की जाती है। संगम स्नान के बाद श्रद्धालु गुरु आश्रमों में भी पूजा-अर्चना करते हैं और जरूरतमंदों को भोजन कराते हैं।
गुरु पूर्णिमा का क्या महत्व है?
गुरु पूर्णिमा सनातन परंपरा में गुरु-शिष्य संबंध को सम्मानित करने का पर्व है, जो आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। गोपाल गुरु के अनुसार, गुरु ही मनुष्य को ज्ञान और सही मार्ग का बोध कराते हैं — केवल पुस्तकें पर्याप्त नहीं होतीं।
क्या अयोध्या और शिरडी में भी गुरु पूर्णिमा मनाई गई?
हाँ, अयोध्या में श्रद्धालुओं ने सरयू नदी में पवित्र स्नान किया और मंदिरों में दर्शन-पूजन किया। महाराष्ट्र के शिरडी स्थित साईं बाबा मंदिर में भी भक्तों का जनसैलाब उमड़ा।
त्रिवेणी संगम कहाँ है और इसका क्या महत्व है?
त्रिवेणी संगम उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में स्थित है, जहाँ गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती नदियों का मिलन होता है। इसे हिंदू धर्म के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में से एक माना जाता है और यहाँ प्रत्येक धार्मिक पर्व पर लाखों श्रद्धालु एकत्र होते हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 1 साल पहले