पद्मा एकादशी पर प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, गंगा स्नान से पुण्य लाभ की आस
सारांश
मुख्य बातें
प्रयागराज के त्रिवेणी संगम और गंगा घाटों पर 22 सितंबर 2026 को पद्मा एकादशी के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की इस एकादशी पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु भोर से ही संगम तट पर पहुँचे और पवित्र डुबकी लगाकर पूजा-अर्चना की। इस बार मंगलवार के साथ एकादशी का दुर्लभ संयोग होने से इस दिन का धार्मिक महत्व और भी बढ़ गया।
पद्मा एकादशी का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पद्मा एकादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के वामन स्वरूप की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। एक श्रद्धालु ने बताया कि वर्तमान में चातुर्मास चल रहा है और मान्यता है कि इस काल में भगवान विष्णु करवट बदलते हैं, जिससे इस एकादशी का महत्व और भी अधिक हो जाता है।
उन्होंने कहा कि इस दिन गंगा स्नान करने से अनंत पुण्य फल की प्राप्ति होती है और व्रत, पूजा तथा अनुष्ठान से मनोकामनाएँ पूरी होने की आस्था है। उन्होंने माँ गंगा से संसार के सभी प्राणियों की सुख-समृद्धि की कामना की।
मंगलवार और गया यात्रा का दुर्लभ संयोग
तीर्थ पुरोहित गोपाल जी ने बताया कि इस वर्ष पद्मा एकादशी मंगलवार को पड़ने से हनुमान जी की पूजा का भी विशेष महत्व जुड़ गया है। यही नहीं, गया यात्रा के लिए निकलने वाले श्रद्धालुओं की यात्रा भी आज से ही प्रारंभ हो रही है। पुरोहित जी के अनुसार, पद्मा एकादशी, मंगलवार और गया एकादशी — इन तीनों का एकसाथ पड़ना इस दिन को अत्यंत शुभ और विरल बना देता है।
संगम तट पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब
गोपाल जी ने बताया कि प्रयागराज में इस समय उमड़ी भीड़ सामान्य दिनों की तुलना में कहीं अधिक है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु दूर-दूर से आकर संगम तट पर स्नान, पूजन और ध्यान कर रहे हैं। प्रशासन ने घाटों पर व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक तैयारियाँ की हैं।
प्रयागराज में स्नान-पूजन का अनंत फल
पुरोहित के अनुसार, प्रयागराज में स्नान, पूजन, ध्यान और पिंडदान जैसे समस्त धार्मिक कार्यों का अनंत गुना पुण्य फल प्राप्त होता है। मान्यता है कि यहाँ स्नान करने से घर में सुख-समृद्धि आती है, धन-धान्य में वृद्धि होती है और मन-आत्मा दोनों पवित्र होते हैं। यह आस्था सदियों से लाखों श्रद्धालुओं को संगम तट की ओर खींचती आई है।
गौरतलब है कि प्रयागराज पहले से ही महाकुंभ के बाद देश के सबसे चर्चित तीर्थस्थलों में से एक बना हुआ है और एकादशी जैसे विशेष पर्वों पर यहाँ की भीड़ इस आस्था की निरंतरता को दर्शाती है। आने वाले दिनों में गया यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं की संख्या में और वृद्धि की संभावना है।