इंदिरा एकादशी 2026: प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर उमड़े लाखों श्रद्धालु, पितरों के लिए तर्पण-पिंडदान
सारांश
मुख्य बातें
प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर 6 अक्टूबर 2026 को इंदिरा एकादशी के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की इस विशेष एकादशी पर भक्तों ने सुबह से ही गंगा, यमुना और सरस्वती के पवित्र संगम में स्नान किया तथा अपने पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान किए। पितृपक्ष के बीच पड़ने वाली इंदिरा एकादशी को धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, यही कारण रहा कि संगम तट पर श्रद्धालुओं का निरंतर तांता लगा रहा।
इंदिरा एकादशी का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृपक्ष के दौरान पड़ने वाली इंदिरा एकादशी का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। मान्यता है कि इस दिन संगम में पवित्र स्नान कर पितरों के लिए पिंडदान और तर्पण करने से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही, भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। गौरतलब है कि प्रयागराज को हिंदू धर्म में तीर्थराज की संज्ञा दी गई है, और यहाँ हर एकादशी व पर्व पर देशभर के श्रद्धालु जुटते हैं।
श्रद्धालुओं की आस्था और मनोकामनाएँ
संगम में स्नान करने आए श्रद्धालु प्रदीप यादव ने बताया कि पितृपक्ष और इंदिरा एकादशी के संयोग में गंगा स्नान कर उन्होंने देश के कल्याण और समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा, 'हम लोगों ने गंगा स्नान कर भगवान से मनोकामना की कि देश का कल्याण हो। भारतवर्ष सुख और समृद्धि के मार्ग पर आगे बढ़े और सभी जीवों का कल्याण हो।' उन्होंने यह भी आह्वान किया कि सभी को एकादशी का व्रत रखना चाहिए और दान करना चाहिए।
तीर्थ पुरोहित की व्याख्या
तीर्थ पुरोहित गोपाल गुरु ने इस अवसर पर बताया कि इंदिरा एकादशी और पितृपक्ष का एक साथ पड़ना इस दिन को असाधारण रूप से शुभ बनाता है। उनके अनुसार, जो व्यक्ति संगम में स्नान कर पितरों के लिए पिंडदान व तर्पण करता है और भगवान विष्णु की उपासना करता है, उसके घर में सुख-शांति, समृद्धि और ऐश्वर्य की वृद्धि होती है। गोपाल गुरु ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि इस पूजा से विशेषकर महिलाओं का सुहाग, सुख और कीर्ति अक्षुण्ण बनी रहती है।
संगम तट का माहौल
भोर से ही संगम घाट पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। मां गंगा के तट पर बड़ी संख्या में परिवार एकत्र हुए, जिन्होंने पूजन सामग्री के साथ पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थनाएँ कीं। यह ऐसे समय में आया है जब पितृपक्ष का पखवाड़ा पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है तथा प्रयागराज एक बार फिर आस्था के केंद्र के रूप में उभरा है। आने वाले दिनों में पितृपक्ष की समाप्ति पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के संगम पहुँचने की संभावना है।