7 अक्टूबर 2026
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इंदिरा एकादशी 2026: प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर उमड़े लाखों श्रद्धालु, पितरों के लिए तर्पण-पिंडदान

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इंदिरा एकादशी 2026: प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर उमड़े लाखों श्रद्धालु, पितरों के लिए तर्पण-पिंडदान

सारांश

आश्विन कृष्ण पक्ष की इंदिरा एकादशी और पितृपक्ष के अनूठे संयोग पर प्रयागराज का त्रिवेणी संगम आस्था का केंद्र बन गया। श्रद्धालुओं ने पवित्र डुबकी लगाकर पितरों के लिए तर्पण-पिंडदान किए और भगवान विष्णु की पूजा की।

मुख्य बातें

6 अक्टूबर 2026 को इंदिरा एकादशी के अवसर पर प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्र हुए।
पितृपक्ष के दौरान पड़ने वाली इंदिरा एकादशी पर पिंडदान और तर्पण का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।
श्रद्धालु प्रदीप यादव ने गंगा स्नान कर देश की सुख-समृद्धि और सभी जीवों के कल्याण की कामना की।
तीर्थ पुरोहित गोपाल गुरु ने बताया कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
पितृपक्ष समाप्ति तक प्रयागराज संगम पर श्रद्धालुओं के आने का क्रम जारी रहने की संभावना है।

प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर 6 अक्टूबर 2026 को इंदिरा एकादशी के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की इस विशेष एकादशी पर भक्तों ने सुबह से ही गंगा, यमुना और सरस्वती के पवित्र संगम में स्नान किया तथा अपने पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान किए। पितृपक्ष के बीच पड़ने वाली इंदिरा एकादशी को धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, यही कारण रहा कि संगम तट पर श्रद्धालुओं का निरंतर तांता लगा रहा।

इंदिरा एकादशी का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृपक्ष के दौरान पड़ने वाली इंदिरा एकादशी का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। मान्यता है कि इस दिन संगम में पवित्र स्नान कर पितरों के लिए पिंडदान और तर्पण करने से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही, भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। गौरतलब है कि प्रयागराज को हिंदू धर्म में तीर्थराज की संज्ञा दी गई है, और यहाँ हर एकादशी व पर्व पर देशभर के श्रद्धालु जुटते हैं।

श्रद्धालुओं की आस्था और मनोकामनाएँ

संगम में स्नान करने आए श्रद्धालु प्रदीप यादव ने बताया कि पितृपक्ष और इंदिरा एकादशी के संयोग में गंगा स्नान कर उन्होंने देश के कल्याण और समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा, 'हम लोगों ने गंगा स्नान कर भगवान से मनोकामना की कि देश का कल्याण हो। भारतवर्ष सुख और समृद्धि के मार्ग पर आगे बढ़े और सभी जीवों का कल्याण हो।' उन्होंने यह भी आह्वान किया कि सभी को एकादशी का व्रत रखना चाहिए और दान करना चाहिए।

तीर्थ पुरोहित की व्याख्या

तीर्थ पुरोहित गोपाल गुरु ने इस अवसर पर बताया कि इंदिरा एकादशी और पितृपक्ष का एक साथ पड़ना इस दिन को असाधारण रूप से शुभ बनाता है। उनके अनुसार, जो व्यक्ति संगम में स्नान कर पितरों के लिए पिंडदान व तर्पण करता है और भगवान विष्णु की उपासना करता है, उसके घर में सुख-शांति, समृद्धि और ऐश्वर्य की वृद्धि होती है। गोपाल गुरु ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि इस पूजा से विशेषकर महिलाओं का सुहाग, सुख और कीर्ति अक्षुण्ण बनी रहती है।

संगम तट का माहौल

भोर से ही संगम घाट पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। मां गंगा के तट पर बड़ी संख्या में परिवार एकत्र हुए, जिन्होंने पूजन सामग्री के साथ पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थनाएँ कीं। यह ऐसे समय में आया है जब पितृपक्ष का पखवाड़ा पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है तथा प्रयागराज एक बार फिर आस्था के केंद्र के रूप में उभरा है। आने वाले दिनों में पितृपक्ष की समाप्ति पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के संगम पहुँचने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस सांस्कृतिक निरंतरता की है जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी भारतीय समाज को जोड़ती है। पितृपक्ष और एकादशी का एक साथ पड़ना इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि का बड़ा कारण बना। उल्लेखनीय है कि महाकुंभ 2025 के बाद से प्रयागराज में धार्मिक पर्यटन और तीर्थाटन में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढाँचे पर भी दबाव बढ़ा है।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंदिरा एकादशी क्या है और इसका क्या महत्व है?
इंदिरा एकादशी आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है और यह पितृपक्ष के दौरान पड़ती है। मान्यता है कि इस दिन संगम में स्नान, पिंडदान और भगवान विष्णु की पूजा से पितरों को मोक्ष मिलता है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।
2026 में इंदिरा एकादशी पर प्रयागराज संगम में क्या हुआ?
6 अक्टूबर 2026 को प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्र हुए। उन्होंने पवित्र स्नान किया, पितरों के लिए तर्पण-पिंडदान किए और मां गंगा तथा भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की।
पितृपक्ष में इंदिरा एकादशी का महत्व क्यों अधिक होता है?
तीर्थ पुरोहितों के अनुसार, पितृपक्ष और इंदिरा एकादशी का संयोग इस दिन को असाधारण रूप से शुभ बनाता है। इस दिन किए गए तर्पण और पिंडदान से पूर्वजों की आत्मा को विशेष शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है, ऐसा धार्मिक मान्यता है।
इंदिरा एकादशी का व्रत और पूजा किसके लिए लाभकारी मानी जाती है?
तीर्थ पुरोहित गोपाल गुरु के अनुसार, इंदिरा एकादशी की पूजा से समस्त परिवार को सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से महिलाओं के सुहाग, सुख और कीर्ति की रक्षा के लिए यह पूजा महत्वपूर्ण मानी जाती है।
प्रयागराज में इंदिरा एकादशी पर स्नान का विशेष महत्व क्यों है?
प्रयागराज को तीर्थराज कहा जाता है क्योंकि यहाँ गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का संगम है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, त्रिवेणी संगम में स्नान का पुण्यफल अन्य तीर्थों की तुलना में कई गुना अधिक माना जाता है, खासकर पितृपक्ष जैसे विशेष अवसरों पर।
राष्ट्र प्रेस
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