क्या इंदिरा एकादशी पर जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति संभव है? जानें शुभ मुहूर्त और उपाय

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क्या इंदिरा एकादशी पर जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति संभव है? जानें शुभ मुहूर्त और उपाय

सारांश

इंदिरा एकादशी का व्रत न केवल पितरों की आत्मा को शांति देता है, बल्कि जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति का मार्ग भी प्रशस्त करता है। इस विशेष दिन के महत्व और उपायों के बारे में जानें।

मुख्य बातें

इंदिरा एकादशी का व्रत विशेष महत्व रखता है।
इस दिन पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान करना महत्वपूर्ण है।
उपायों से पितरों को प्रसन्न किया जा सकता है।
व्रत से प्राप्त पुण्य मोक्ष के मार्ग पर ले जाता है।
श्रद्धा से व्रत करने से जीवन में सुख और शांति आती है।

नई दिल्ली, 16 सितंबर (राष्ट्र प्रेस)। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की इंदिरा एकादशी इस बार बुधवार को मनाई जाएगी। इस दिन सूर्य कन्या राशि और चंद्रमा कर्क राशि में विराजमान रहेंगे।

दृक पंचांग के अनुसार, इस दिन अभिजीत मुहूर्त नहीं होगा, जबकि राहुकाल दोपहर 12:15 बजे से 1:47 बजे तक रहेगा। इस समयावधि में शुभ कार्यों से बचना चाहिए।

गरुड़ पुराण के अनुसार, इंदिरा एकादशी का व्रत जन्म-जन्मांतर के पापों को नष्ट करता है और मृत्यु के बाद आत्मा को उच्च लोक में स्थान दिलाता है। यह व्रत पितरों को नरक से मुक्ति दिलाकर वैकुंठ लोक की प्राप्ति कराता है। इस दिन पितरों का तर्पण और पिंडदान करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है।

पद्म पुराण में कहा गया है कि इस व्रत को करने से कन्यादान और हजारों वर्षों की तपस्या से भी अधिक पुण्य प्राप्त होता है, जो व्रती को मोक्ष के मार्ग पर ले जाता है।

इंदिरा एकादशी पर पितरों को प्रसन्न करने के लिए कई सरल और प्रभावी उपाय किए जा सकते हैं, जिनमें दक्षिण दिशा में सरसों के तेल का दीपक जलाने से पितृ प्रसन्न होते हैं। एक काले कपड़े में रखकर काले तिल और दाल गाय को खिलाना पितरों को तृप्त करता है। पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाकर परिक्रमा करने से भी विशेष फल की प्राप्ति होती है।

विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र का पाठ और 'ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नमः' मंत्र का जाप पितरों की आत्मा को शांति देता है। इसके अतिरिक्त, जरूरतमंदों को घी, दूध, दही और चावल का दान करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे जीवन में सुख, समृद्धि और शांति आती है।

यह पवित्र दिन पितरों के प्रति श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है। इस व्रत को श्रद्धापूर्वक करने से न केवल पूर्वजों को मुक्ति मिलती है, बल्कि व्रती का जीवन भी कल्याणमय बनता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पितृ ऋण से मुक्ति का मार्ग भी प्रशस्त करता है। एक राष्ट्रीय संपादक के रूप में, मैं मानता हूँ कि इस व्रत के माध्यम से हम अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हैं और अपने जीवन में सकारात्मकता लाते हैं।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंदिरा एकादशी का व्रत कब मनाया जाता है?
इंदिरा एकादशी इस वर्ष 16 सितंबर को मनाई जाएगी।
इस दिन किन उपायों का पालन करना चाहिए?
इस दिन सरसों के तेल का दीपक जलाना, काले तिल और दाल गाय को खिलाना और पीपल के पेड़ के नीचे परिक्रमा करना शुभ होता है।
इंदिरा एकादशी का महत्व क्या है?
यह व्रत जन्म-जन्मांतर के पापों को समाप्त करता है और पितरों को मोक्ष दिलाता है।
राष्ट्र प्रेस
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