25 सितंबर 2026
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अनंत चतुर्दशी 2026: प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर उमड़ा लाखों श्रद्धालुओं का जनसैलाब

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अनंत चतुर्दशी 2026: प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर उमड़ा लाखों श्रद्धालुओं का जनसैलाब

सारांश

अनंत चतुर्दशी पर प्रयागराज का त्रिवेणी संगम एक बार फिर आस्था का केंद्र बना। गंगा-यमुना-सरस्वती के पवित्र संगम पर श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई और 14 गांठों वाला अनंत सूत्र बांधकर भगवान विष्णु की आराधना की — तीर्थराज की धार्मिक परंपरा जीवंत रही।

मुख्य बातें

25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी पर प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्रित हुए।
श्रद्धालुओं ने गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में पवित्र स्नान कर भगवान विष्णु की आराधना की।
पूजा के बाद कलाई पर 14 गांठों वाला 'अनंत सूत्र' बांधने की परंपरा निभाई गई।
धर्माचार्य गोपाल गुरु ने बताया कि यह व्रत सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति के लिए किया जाता है।
भीड़ को देखते हुए घाट पर प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे।

प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर 25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर आस्था का असाधारण दृश्य देखने को मिला। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी के इस पर्व पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पवित्र मिलन स्थल पर स्नान, पूजन और अनंत सूत्र धारण करने के लिए एकत्रित हुए। घाटों पर सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने लगी और समूचे संगम तट आस्था के रंग में रंगा नज़र आया।

पर्व का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अनंत चतुर्दशी पर भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की विधिवत आराधना करने से अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है। पूजा-विधि के अंत में श्रद्धालु अपनी कलाई पर 14 गांठों वाला 'अनंत सूत्र' बांधते हैं, जो भगवान की अखंड कृपा और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। यह व्रत विशेष रूप से सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति के लिए किया जाता है।

संगम घाट पर विशेषज्ञ का मत

संगम तट पर उपस्थित धर्माचार्य गोपाल गुरु ने इस पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, 'आज अनंत चतुर्दशी है, यह भगवान श्री विष्णु का प्रमुख पर्व है। इस दिन प्रातःकाल स्नान और ध्यान करने के बाद रेशम की डोरी में चौदह गांठ लगाकर उसमें भगवान विष्णु का आह्वान कर पूजा की जाती है।' उन्होंने यह भी बताया कि इस व्रत के प्रभाव से भगवान विष्णु और माता महालक्ष्मी अत्यंत प्रसन्न होते हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

प्रयागराज का तीर्थराज स्वरूप

गोपाल गुरु ने प्रयागराज की विशेष महत्ता का उल्लेख करते हुए कहा, 'प्रयागराज तीर्थों का राजा है। यहाँ आकर इस प्रकार का धार्मिक अनुष्ठान करने से अनंत गुना पुण्य की प्राप्ति होती है और स्वर्ग में भी स्थान प्राप्त होता है।' गौरतलब है कि यह वही संगम भूमि है जो प्रत्येक कुंभ और माघ मेले में करोड़ों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती है — अनंत चतुर्दशी पर भी यह परंपरा उतनी ही जीवंत दिखी।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए घाट पर प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए थे। घाटों पर पुलिस बल तैनात रहा और आवागमन की व्यवस्था सुनिश्चित की गई। यह ऐसे समय में आया है जब प्रयागराज में बड़े धार्मिक आयोजनों के लिए प्रशासनिक तैयारियाँ पहले से अधिक सुव्यवस्थित हो गई हैं।

अनंत चतुर्दशी का यह उत्सव प्रयागराज की धार्मिक विरासत को एक बार फिर रेखांकित करता है, और आने वाले पर्वों में भी यहाँ श्रद्धालुओं का आना जारी रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे अस्थायी तैयारियों से नहीं, दीर्घकालिक अवसंरचना से ही सुलझाया जा सकता है।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अनंत चतुर्दशी 2026 कब है और इसका महत्व क्या है?
अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर 2026 को भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को मनाई गई। यह भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप को समर्पित पर्व है, जिसमें विधिवत पूजा के बाद 14 गांठों वाला अनंत सूत्र बांधा जाता है।
अनंत सूत्र क्या होता है और इसे क्यों बांधा जाता है?
अनंत सूत्र रेशम की एक पवित्र डोरी होती है जिसमें 14 गांठें लगाई जाती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसमें भगवान विष्णु का आह्वान कर पूजा की जाती है और फिर इसे कलाई पर बांधा जाता है — यह अनंत काल तक ईश्वर की रक्षा और आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है।
प्रयागराज में अनंत चतुर्दशी पर स्नान का विशेष महत्व क्यों है?
प्रयागराज को 'तीर्थराज' यानी तीर्थों का राजा कहा जाता है क्योंकि यहाँ गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का त्रिवेणी संगम है। धर्माचार्यों के अनुसार, यहाँ किए गए धार्मिक अनुष्ठान का फल अन्य स्थानों की तुलना में अनंत गुना अधिक माना जाता है।
अनंत चतुर्दशी व्रत से क्या लाभ होता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नियम और श्रद्धा के साथ यह व्रत करने से भगवान विष्णु और माता महालक्ष्मी प्रसन्न होते हैं, घर में सुख-समृद्धि आती है और सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। यह भी कहा जाता है कि इस व्रत से हर प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है।
25 सितंबर 2026 को प्रयागराज संगम पर सुरक्षा के क्या इंतजाम थे?
अनंत चतुर्दशी पर भारी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए प्रशासन ने संगम घाट पर पुख्ता सुरक्षा इंतजाम किए थे। पुलिस बल की तैनाती और आवागमन की सुचारु व्यवस्था सुनिश्चित की गई।
राष्ट्र प्रेस
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