अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर को: पूजन मुहूर्त सुबह 6:28 बजे से, जानें अनंत सूत्र और व्रत विधि
सारांश
मुख्य बातें
हिंदू धर्म में अनंत चतुर्दशी का पर्व अत्यंत महत्त्वपूर्ण माना जाता है। इस वर्ष यह पावन तिथि 25 सितंबर 2026 (शुक्रवार) को पड़ रही है। पूजन के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 06:28 बजे से रात्रि 11:06 बजे तक रहेगा। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की आराधना की जाती है और दस दिवसीय गणेश उत्सव का समापन भी इसी दिन होता है।
अनंत चतुर्दशी का धार्मिक महत्त्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अनंत चतुर्दशी का व्रत करने से अनंत सुख की प्राप्ति होती है और संचित पापों का नाश होता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ अनंत सूत्र धारण करने की परंपरा है, जो संकटों से रक्षा करने वाला माना जाता है। गौरतलब है कि यह पर्व न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि परिवार में सुख-समृद्धि और एकजुटता का संदेश भी देता है।
अनंत सूत्र की मान्यता और पाण्डवों की कथा
अनंत सूत्र में 14 गांठें होनी चाहिए, जिन्हें 14 लोकों से जोड़कर देखा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब पाण्डव द्यूत क्रीड़ा में अपना समस्त राज-पाट हारकर वन में कष्ट भोग रहे थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें अनंत चतुर्दशी का व्रत करने की सलाह दी थी।
धर्मराज युधिष्ठिर ने अपने भाइयों तथा द्रौपदी के साथ पूरे विधि-विधान से यह व्रत संपन्न किया और अनंत सूत्र धारण किया। कहा जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से पाण्डव सभी संकटों से मुक्त हो गए थे।
पूजन विधि और व्रत का तरीका
अनंत चतुर्दशी पर प्रातःकाल स्नान करके व्रत का संकल्प लेना चाहिए। शास्त्रों में किसी पवित्र नदी या सरोवर के तट पर पूजन का विधान है। यदि ऐसा संभव न हो, तो घर के पूजागृह में स्वच्छ स्थान पर कलश स्थापित करें।
कलश पर शेषनाग की शैय्या पर विराजमान भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र रखें। उनके सामने 14 गांठों से युक्त अनंत सूत्र रखें और 'ॐ अनन्ताय नमः' मंत्र के उच्चारण के साथ षोडशोपचार विधि से पूजन करें। पूजन पश्चात पुरुष दाहिने हाथ में और स्त्री बाएं हाथ में मंत्रोच्चार के साथ अनंत सूत्र बांधें। तत्पश्चात किसी ब्राह्मण को नैवेद्य अर्पित करें और सपरिवार प्रसाद ग्रहण करें।
गणपति विसर्जन और उत्सव का समापन
अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश चतुर्थी से प्रारंभ होने वाले दस दिवसीय गणेश उत्सव का भी समापन होता है। 25 सितंबर को घरों और सार्वजनिक पंडालों में स्थापित गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन होगा। इस प्रकार यह दिन एक साथ भगवान विष्णु की पूजा, अनंत सूत्र धारण और गणेश विसर्जन तीनों महत्त्वपूर्ण अनुष्ठानों का संगम बन जाता है।
इस वर्ष 25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी पर श्रद्धालुओं को पूजन मुहूर्त का लाभ उठाते हुए विधिवत व्रत और अनुष्ठान संपन्न करने का सुअवसर मिलेगा।