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25 सितंबर 2026 पंचांग: अनंत चतुर्दशी व्रत से मिलेगी धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष की प्राप्ति, अमृतकाल रात 3:23 से 5:00 बजे तक

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25 सितंबर 2026 पंचांग: अनंत चतुर्दशी व्रत से मिलेगी धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष की प्राप्ति, अमृतकाल रात 3:23 से 5:00 बजे तक

सारांश

25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी पर भगवान विष्णु की विशेष पूजा और अनंत सूत्र धारण का विधान है। तड़के 3:23 से 5:00 बजे तक अमृतकाल और सुबह 11:54 से दोपहर 12:42 बजे तक अभिजीत मुहूर्त — शुभ कार्यों के लिए ये दो सर्वोत्तम समय हैं। राहुकाल और शूल योग में नए कार्यों से बचें।

मुख्य बातें

25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी मनाई जाएगी; भगवान विष्णु की पूजा और अनंत सूत्र धारण का विधान है।
चतुर्दशी तिथि रात 11:07 बजे तक; इसके बाद पूर्णिमा आरंभ होगी।
अमृतकाल तड़के 3:23 से 5:00 बजे तक; अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:54 से 12:42 बजे तक।
राहुकाल सुबह 10:49 से 12:18 बजे ; शूल योग दोपहर 2:49 बजे तक अशुभ।
गुलिक काल सुबह 7:49–9:19 बजे ; यमगंड काल दोपहर 3:17–4:47 बजे — नए कार्य वर्जित।
दिशाशूल पश्चिम दिशा में; सूर्य कन्या राशि व चंद्रमा कुंभ राशि में स्थित।

शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि रात 11:07 बजे तक रहेगी, जिसके बाद पूर्णिमा तिथि आरंभ हो जाएगी। इस दिन अनंत चतुर्दशी का पावन पर्व मनाया जाएगा, जिसमें भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत के पालन से साधक को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष — चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है।

तिथि, सूर्योदय एवं चंद्रमा की स्थिति

पंचांग के अनुसार शुक्रवार को सूर्योदय सुबह 6:20 बजे और सूर्यास्त शाम 5:16 बजे होगा। चंद्रोदय शाम 5:27 बजे तथा चंद्रास्त तड़के 5:42 बजे होगा। इस दिन सूर्य कन्या राशि में और चंद्रमा कुंभ राशि में स्थित रहेंगे। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार सूर्य का कन्या राशि में रहना व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता एवं व्यावहारिकता को प्रबल करता है, जबकि चंद्रमा का कुंभ राशि में विराजमान होना आत्मविश्वास और कार्यक्षमता में वृद्धि का संकेत है।

अनंत चतुर्दशी का महत्व और व्रत विधि

इस पर्व पर भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा की जाती है और संकटों से रक्षा हेतु हाथ में अनंत सूत्र (पवित्र धागा) बाँधा जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस व्रत के फलस्वरूप अंत में साधक को बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है। इस दिन उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र रहेगा, जो आकाश मंडल का 12वाँ नक्षत्र है और सिंह राशि के 26 डिग्री 40 मिनट से कन्या राशि के 10 डिग्री 00 मिनट तक विस्तृत है। इस नक्षत्र के स्वामी सूर्य देव तथा देवता अर्यमा हैं। ज्योतिष मत के अनुसार उत्तराफाल्गुनी में जन्मे जातक तेजस्वी, महत्वाकांक्षी और परोपकारी होते हैं।

शुभ मुहूर्त: अमृतकाल और अभिजीत मुहूर्त

शुक्रवार को अमृतकाल तड़के 3:23 बजे से 5:00 बजे तक रहेगा। पंचांग के अनुसार अमृतकाल अत्यंत मंगलकारी एवं सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण मुहूर्त माना जाता है — नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए यह समय श्रेष्ठ है। इसके अतिरिक्त अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:54 बजे से दोपहर 12:42 बजे तक रहेगा। यह दिन का सर्वाधिक शुभ और फलदाई काल माना जाता है, जब सूर्य ठीक मस्तक के ऊपर स्थित होते हैं और इसमें किए गए कार्यों से अशुभ प्रभाव स्वतः नष्ट होते हैं।

अशुभ काल: राहुकाल, शूल योग, गुलिक काल और यमगंड

शुक्रवार दोपहर लगभग 2:49 बजे तक शूल योग रहेगा। पंचांग के 27 नित्य योगों में यह नौवाँ योग है, जिसे सामान्यतः अशुभ माना जाता है — इस अवधि में कोई भी शुभ कार्य न करने की सलाह दी जाती है। राहुकाल सुबह 10:49 बजे से दोपहर 12:18 बजे तक रहेगा; इस काल में नया कार्य प्रारंभ करना वर्जित माना जाता है। गुलिक काल सुबह 7:49 बजे से 9:19 बजे तक रहेगा, जिसे 'विषैला समय' भी कहा जाता है — यद्यपि बैंक में धन जमा करना, दान देना या निवेश करना इस काल में अनुकूल माना जाता है। यमगंड काल दोपहर 3:17 बजे से 4:47 बजे तक रहेगा, जो मृत्यु के देवता यमराज से संबद्ध है; इस दौरान यात्रा, नए कार्य और आर्थिक लेनदेन से बचने की सलाह दी जाती है।

दिशाशूल एवं विशेष सुझाव

शुक्रवार को दिशाशूल पश्चिम दिशा में रहेगा। ज्योतिष एवं वास्तु शास्त्र के अनुसार दिशाशूल उस अशुभ दिशा को इंगित करता है जिसमें उस दिन यात्रा करना प्रतिकूल फल देता है। अतः पश्चिम दिशा की यात्रा शुक्रवार के लिए वर्जित मानी जाएगी। कुल मिलाकर अनंत चतुर्दशी का यह दिन आध्यात्मिक साधना और भगवान विष्णु की उपासना के लिए विशेष रूप से फलदाई रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

निवेश, विवाह और गृहप्रवेश जैसे कार्यों में मुहूर्त देखने की परंपरा सदियों पुरानी है। अनंत चतुर्दशी का यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भाद्रपद माह के समापन और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक भी है। राहुकाल और शूल योग जैसे प्रतिकूल कालों की जानकारी पाठकों को व्यावहारिक दिनचर्या में सहायता करती है। इस प्रकार की सटीक और समयबद्ध पंचांग-जानकारी गूगल पर सर्वाधिक खोजी जाने वाली सामग्री में से एक है।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी क्यों मनाई जाती है?
अनंत चतुर्दशी भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है, जो इस वर्ष 25 सितंबर को पड़ रही है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा की जाती है और संकटों से रक्षा के लिए अनंत सूत्र बाँधा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष — चारों पुरुषार्थ प्राप्त होते हैं।
25 सितंबर को अमृतकाल किस समय रहेगा?
25 सितंबर 2026 को अमृतकाल तड़के 3:23 बजे से 5:00 बजे तक रहेगा। यह अत्यंत शुभ मुहूर्त नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।
शुक्रवार 25 सितंबर को राहुकाल कब है और क्या इससे बचना चाहिए?
25 सितंबर को राहुकाल सुबह 10:49 बजे से दोपहर 12:18 बजे तक रहेगा। हिंदू ज्योतिष के अनुसार इस अवधि में कोई नया या शुभ कार्य प्रारंभ नहीं करना चाहिए, हालाँकि पहले से चल रहे कार्य जारी रखे जा सकते हैं।
25 सितंबर के पंचांग में अभिजीत मुहूर्त कब है?
इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:54 बजे से दोपहर 12:42 बजे तक रहेगा। यह दिन का सर्वाधिक शुभ काल माना जाता है, जिसमें किए गए कार्यों से सभी प्रकार के अशुभ दोष स्वतः नष्ट होते हैं।
25 सितंबर को दिशाशूल किस दिशा में है और इसका क्या अर्थ है?
25 सितंबर, शुक्रवार को दिशाशूल पश्चिम दिशा में रहेगा। ज्योतिष एवं वास्तु शास्त्र के अनुसार दिशाशूल वाली दिशा में उस दिन यात्रा करना अशुभ माना जाता है, इसलिए पश्चिम दिशा की यात्रा से इस दिन बचना उचित है।
राष्ट्र प्रेस
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