25 सितंबर 2026 पंचांग: अनंत चतुर्दशी व्रत से मिलेगी धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष की प्राप्ति, अमृतकाल रात 3:23 से 5:00 बजे तक
सारांश
मुख्य बातें
शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि रात 11:07 बजे तक रहेगी, जिसके बाद पूर्णिमा तिथि आरंभ हो जाएगी। इस दिन अनंत चतुर्दशी का पावन पर्व मनाया जाएगा, जिसमें भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत के पालन से साधक को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष — चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है।
तिथि, सूर्योदय एवं चंद्रमा की स्थिति
पंचांग के अनुसार शुक्रवार को सूर्योदय सुबह 6:20 बजे और सूर्यास्त शाम 5:16 बजे होगा। चंद्रोदय शाम 5:27 बजे तथा चंद्रास्त तड़के 5:42 बजे होगा। इस दिन सूर्य कन्या राशि में और चंद्रमा कुंभ राशि में स्थित रहेंगे। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार सूर्य का कन्या राशि में रहना व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता एवं व्यावहारिकता को प्रबल करता है, जबकि चंद्रमा का कुंभ राशि में विराजमान होना आत्मविश्वास और कार्यक्षमता में वृद्धि का संकेत है।
अनंत चतुर्दशी का महत्व और व्रत विधि
इस पर्व पर भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा की जाती है और संकटों से रक्षा हेतु हाथ में अनंत सूत्र (पवित्र धागा) बाँधा जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस व्रत के फलस्वरूप अंत में साधक को बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है। इस दिन उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र रहेगा, जो आकाश मंडल का 12वाँ नक्षत्र है और सिंह राशि के 26 डिग्री 40 मिनट से कन्या राशि के 10 डिग्री 00 मिनट तक विस्तृत है। इस नक्षत्र के स्वामी सूर्य देव तथा देवता अर्यमा हैं। ज्योतिष मत के अनुसार उत्तराफाल्गुनी में जन्मे जातक तेजस्वी, महत्वाकांक्षी और परोपकारी होते हैं।
शुभ मुहूर्त: अमृतकाल और अभिजीत मुहूर्त
शुक्रवार को अमृतकाल तड़के 3:23 बजे से 5:00 बजे तक रहेगा। पंचांग के अनुसार अमृतकाल अत्यंत मंगलकारी एवं सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण मुहूर्त माना जाता है — नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए यह समय श्रेष्ठ है। इसके अतिरिक्त अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:54 बजे से दोपहर 12:42 बजे तक रहेगा। यह दिन का सर्वाधिक शुभ और फलदाई काल माना जाता है, जब सूर्य ठीक मस्तक के ऊपर स्थित होते हैं और इसमें किए गए कार्यों से अशुभ प्रभाव स्वतः नष्ट होते हैं।
अशुभ काल: राहुकाल, शूल योग, गुलिक काल और यमगंड
शुक्रवार दोपहर लगभग 2:49 बजे तक शूल योग रहेगा। पंचांग के 27 नित्य योगों में यह नौवाँ योग है, जिसे सामान्यतः अशुभ माना जाता है — इस अवधि में कोई भी शुभ कार्य न करने की सलाह दी जाती है। राहुकाल सुबह 10:49 बजे से दोपहर 12:18 बजे तक रहेगा; इस काल में नया कार्य प्रारंभ करना वर्जित माना जाता है। गुलिक काल सुबह 7:49 बजे से 9:19 बजे तक रहेगा, जिसे 'विषैला समय' भी कहा जाता है — यद्यपि बैंक में धन जमा करना, दान देना या निवेश करना इस काल में अनुकूल माना जाता है। यमगंड काल दोपहर 3:17 बजे से 4:47 बजे तक रहेगा, जो मृत्यु के देवता यमराज से संबद्ध है; इस दौरान यात्रा, नए कार्य और आर्थिक लेनदेन से बचने की सलाह दी जाती है।
दिशाशूल एवं विशेष सुझाव
शुक्रवार को दिशाशूल पश्चिम दिशा में रहेगा। ज्योतिष एवं वास्तु शास्त्र के अनुसार दिशाशूल उस अशुभ दिशा को इंगित करता है जिसमें उस दिन यात्रा करना प्रतिकूल फल देता है। अतः पश्चिम दिशा की यात्रा शुक्रवार के लिए वर्जित मानी जाएगी। कुल मिलाकर अनंत चतुर्दशी का यह दिन आध्यात्मिक साधना और भगवान विष्णु की उपासना के लिए विशेष रूप से फलदाई रहेगा।