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28 जून 2026 पंचांग: चतुर्दशी तिथि पितृ कार्य व मोक्ष के लिए श्रेष्ठ, शाम 5:34 से 7:10 बजे तक अमृत काल

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28 जून 2026 पंचांग: चतुर्दशी तिथि पितृ कार्य व मोक्ष के लिए श्रेष्ठ, शाम 5:34 से 7:10 बजे तक अमृत काल

सारांश

28 जून 2026 को ज्येष्ठ शुक्ल चतुर्दशी तिथि पितृ कार्य और मोक्ष प्राप्ति के लिए श्रेष्ठ मानी जाती है। अमृत काल शाम 5:34 से 7:10 बजे तक और अभिजित मुहूर्त दोपहर 11:56 से 12:52 बजे तक रहेगा। राहुकाल और दिशाशूल से सावधानी जरूरी है।

मुख्य बातें

28 जून 2026 (रविवार) को ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष चतुर्दशी तिथि रात 3:06 बजे तक रहेगी, इसके बाद पूर्णिमा आरंभ होगी।
अमृत काल शाम 5:34 से 7:10 बजे तक; ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:11 से 4:59 बजे तक।
अभिजित मुहूर्त दोपहर 11:56 से 12:52 बजे — नए कार्य व पूजा के लिए सर्वोत्तम।
राहुकाल शाम 5:38 से 7:22 बजे ; गुलिक काल दोपहर 3:53 से 5:38 बजे ; यमघण्टकाल दोपहर 12:30 से 2:10 बजे — नए कार्य वर्जित।
सूर्य मिथुन राशि में, चंद्रमा वृश्चिक राशि में; चंद्रमा दोपहर बाद ज्येष्ठा से मूल नक्षत्र में प्रवेश करेगा।
इस दिन पश्चिम दिशा में दिशाशूल — पश्चिम यात्रा से परहेज की सलाह।

हिंदू पंचांग के अनुसार 28 जून 2026 (रविवार) को ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि है, जो रात 3:06 बजे तक प्रभावी रहेगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चतुर्दशी तिथि पितृ कार्य और मोक्ष प्राप्ति के लिए विशेष रूप से उत्तम मानी जाती है। चतुर्दशी समाप्त होते ही पूर्णिमा तिथि का आरंभ हो जाएगा।

मुहूर्त और शुभ समय

इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:11 से 4:59 बजे तक रहेगा, जो ध्यान, योग और पूजा-पाठ के लिए आदर्श माना जाता है। अभिजित मुहूर्त दोपहर 11:56 से 12:52 बजे तक रहेगा — यह दिन का सर्वाधिक शुभ समय होता है, जिसमें नए कार्य की शुरुआत, महत्वपूर्ण निर्णय और पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है। अमृत काल शाम 5:34 से 7:10 बजे तक रहेगा।

सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र स्थिति

पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्योदय सुबह 5:47 बजे और सूर्यास्त शाम 7:12 बजे होगा। चंद्रोदय शाम 6:11 बजे और चंद्रास्त सुबह 4:47 बजे होगा। सूर्य मिथुन राशि में और चंद्रमा वृश्चिक राशि में गोचर करेंगे।

नक्षत्र और योग

27 जून 2026 को सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में स्थित रहेगा, जिनके स्वामी राहु हैं। चंद्रमा ज्येष्ठा नक्षत्र में गोचर करेगा और दोपहर के बाद मूल नक्षत्र में प्रवेश करेगा। इस दिन शुभ योग रात 12:59 बजे तक प्रभावी रहेगा, जिसके पश्चात शुक्ल योग आरंभ होगा। वैदिक पंचांग के अनुसार इस दिन कोई वज्र योग नहीं है।

अशुभ काल — कब करें परहेज

पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, राहुकाल शाम 5:38 से 7:22 बजे तक, गुलिक काल दोपहर 3:53 से 5:38 बजे तक और यमघण्टकाल दोपहर 12:30 से 2:10 बजे तक रहेगा। इन कालों में कोई भी नया कार्य, यात्रा या महत्वपूर्ण निर्णय लेने से बचने की सलाह दी जाती है।

दिशाशूल और यात्रा सावधानी

28 जून 2026 (रविवार) को पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र की मान्यताओं के अनुसार इस दिन पश्चिम दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि यात्रा अनिवार्य हो, तो उचित ज्योतिषीय उपायों का पालन करने की परंपरागत सलाह दी जाती है। चतुर्दशी तिथि पर पितृ तर्पण और मोक्ष-कामना से जुड़े धार्मिक अनुष्ठान विशेष फलदायी माने जाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ लाखों परिवार आज भी दिनचर्या के निर्णय — यात्रा, पूजा, निवेश — तिथि और मुहूर्त देखकर लेते हैं। यह जानकारी केवल धार्मिक नहीं, बल्कि व्यावहारिक उपयोगिता की है। हालाँकि, पाठकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि पंचांग की गणनाएँ क्षेत्रीय परंपराओं और पंचांग-ग्रंथों के अनुसार थोड़ी भिन्न हो सकती हैं — अतः किसी विशेष अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंडित या मान्यता-प्राप्त पंचांग से पुष्टि करना श्रेयस्कर है।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

28 जून 2026 को कौन-सी तिथि है?
28 जून 2026 (रविवार) को ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि है, जो रात 3:06 बजे तक रहेगी। इसके बाद पूर्णिमा तिथि आरंभ होगी।
28 जून 2026 को अमृत काल कब है?
28 जून 2026 को अमृत काल शाम 5:34 बजे से शाम 7:10 बजे तक रहेगा। यह समय शुभ कार्यों और पूजा-पाठ के लिए विशेष रूप से उपयुक्त माना जाता है।
28 जून 2026 को राहुकाल का समय क्या है?
इस दिन राहुकाल शाम 5:38 बजे से शाम 7:22 बजे तक रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार राहुकाल में कोई भी नया या महत्वपूर्ण कार्य आरंभ नहीं करना चाहिए।
28 जून 2026 को सबसे शुभ मुहूर्त कौन-सा है?
इस दिन अभिजित मुहूर्त दोपहर 11:56 से 12:52 बजे तक रहेगा, जो दिन का सर्वाधिक शुभ समय माना जाता है। इसके अलावा ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:11 से 4:59 बजे तक भी पूजा व ध्यान के लिए आदर्श है।
28 जून 2026 को किस दिशा में यात्रा से बचना चाहिए?
28 जून 2026 (रविवार) को पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र की परंपरागत मान्यताओं के अनुसार इस दिन पश्चिम दिशा में यात्रा से परहेज करना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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