29 जून 2026 पंचांग: ज्येष्ठ पूर्णिमा पर विष्णु-लक्ष्मी पूजा, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:03–12:57 बजे
सारांश
मुख्य बातें
रविवार, 29 जून 2026 को ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है, जो सुबह 5:26 बजे तक प्रभावी रहेगी। वैदिक पंचांग के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना, पवित्र नदियों में स्नान तथा दान-पुण्य करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। पूर्णिमा के बाद प्रतिपदा तिथि का आरंभ होगा।
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र-समय
इस दिन सूर्योदय सुबह 5:48 बजे और सूर्यास्त शाम 7:12 बजे होगा। चन्द्रोदय शाम 7:02 बजे तथा चन्द्रास्त सुबह 5:41 बजे निर्धारित है। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:12 से 5:00 बजे तक रहेगा, जो ध्यान, योग और मंत्र-जप के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है।
नक्षत्र, राशि और योग
पंचांग के अनुसार 29 जून 2026 को सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में विराजमान रहेंगे, जिनके स्वामी राहु हैं। चंद्रमा मूल नक्षत्र में रहेंगे और अगले दिन 30 जून की सुबह 4:04 बजे तक इसी नक्षत्र में गोचर करेंगे। राशि की दृष्टि से सूर्य मिथुन राशि में और चंद्रमा धनु राशि में भ्रमण करेंगे। योग की बात करें तो इस दिन शुक्ल योग प्रभावी रहेगा, जिसके पश्चात ब्रह्म योग आरंभ होगा। वैदिक पंचांग के अनुसार इस दिन कोई वज्र योग नहीं है।
अभिजित मुहूर्त और अमृत काल
किसी भी महत्वपूर्ण कार्य — नया व्यवसाय, गृह-प्रवेश, अनुबंध या पूजा — की शुरुआत के लिए अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:03 से 12:57 बजे तक सर्वश्रेष्ठ रहेगा। यह दिन का सबसे शक्तिशाली और शुभ काल माना जाता है। इसके अतिरिक्त अमृत काल रात 8:57 से 10:45 बजे तक रहेगा, जो पूजा-पाठ और आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष रूप से फलदायी है।
अशुभ काल — राहुकाल, गुलिक और यमघण्टक
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार 29 जून को तीन अशुभ कालखंड रहेंगे, जिनमें नए कार्यों का शुभारंभ वर्जित माना जाता है। राहुकाल सुबह 7:43 से 9:22 बजे तक, गुलिक काल सुबह 7:12 से 8:56 बजे तक और यमघण्टकाल सुबह 10:41 से दोपहर 12:25 बजे तक प्रभावी रहेगा। इन अवधियों में महत्वपूर्ण निर्णय और यात्राएँ टालना उचित रहेगा।
दिशाशूल और यात्रा-सावधानी
इस सोमवार को पूर्व दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार इस दिन पूर्व दिशा में यात्रा से बचना चाहिए। यदि यात्रा अनिवार्य हो, तो ज्योतिषीय उपायों का पालन करने की सलाह दी जाती है। पूर्णिमा का यह पावन दिन आस्था, साधना और पुण्य-संचय का अवसर है — सही मुहूर्त में किया गया हर कार्य अधिक फलदायी माना जाता है।