12 अगस्त 2026
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ब्रिक्स देशों में CBDC और फास्ट पेमेंट लिंकेज पर चर्चा, RBI गवर्नर मल्होत्रा ने मुंबई में दिए संकेत

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ब्रिक्स देशों में CBDC और फास्ट पेमेंट लिंकेज पर चर्चा, RBI गवर्नर मल्होत्रा ने मुंबई में दिए संकेत

सारांश

ब्रिक्स देशों के बीच CBDC और फास्ट पेमेंट सिस्टम को जोड़ने की चर्चा महज तकनीकी नहीं — यह डॉलर-केंद्रित वैश्विक वित्त व्यवस्था को चुनौती देने की रणनीतिक कोशिश है। RBI गवर्नर मल्होत्रा का FIBAC में यह संदेश सितंबर 2026 के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले भारत की वित्तीय कूटनीति की दिशा साफ़ करता है।

मुख्य बातें

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 12 अगस्त 2026 को मुंबई में FIBAC सम्मेलन में ब्रिक्स CBDC और फास्ट पेमेंट लिंकेज पर चर्चा की पुष्टि की।
चर्चा अभी प्रारंभिक चरण में है; CBDC उपयोग और फास्ट पेमेंट इंटरऑपरेबिलिटी — दोनों विकल्प विचाराधीन।
भारत पहले से इंडोनेशिया, मालदीव, मॉरीशस और UAE के साथ स्थानीय मुद्रा व्यवस्थाएँ लागू कर चुका है।
मल्होत्रा ने भारतीय बैंकों को AI गवर्नेंस नीति और AI मॉडल इन्वेंटरी तैयार करने का निर्देश दिया।
भारत सितंबर 2026 में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेज़बानी करेगा, जहाँ भुगतान एकीकरण एजेंडे में रहने की संभावना।
RBI के अनुसार भारतीय बैंकिंग प्रणाली मज़बूत पूँजी, कम NPA के साथ वैश्विक अनिश्चितताओं से निपटने में सक्षम।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 12 अगस्त 2026 को मुंबई में आयोजित FIBAC सम्मेलन में कहा कि ब्रिक्स (BRICS) सदस्य देशों के बीच सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) और फास्ट पेमेंट सिस्टम को परस्पर जोड़ने की संभावनाओं पर सक्रिय चर्चा जारी है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सीमा-पार भुगतान को तेज़, सस्ता और अधिक कुशल बनाना है। यह चर्चा ऐसे समय में हो रही है जब भारत सितंबर 2026 में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेज़बानी की तैयारी में जुटा है।

मुख्य घटनाक्रम

मल्होत्रा ने FIBAC मंच से स्पष्ट किया कि सीमा-पार भुगतान ब्रिक्स देशों की साझा प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा, "सीमा-पार भुगतान ऐसा क्षेत्र है जिसमें हम सभी, विशेषकर ब्रिक्स देश, गहरी रुचि रखते हैं। हमें लगता है कि यहाँ ट्रांज़ैक्शन लागत कम करने की व्यापक संभावना है। विभिन्न विकल्पों पर विचार किया जा रहा है, लेकिन अभी यह प्रक्रिया चर्चा के चरण में है।" ब्रिक्स समूह में ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका सहित अन्य सदस्य देश शामिल हैं।

CBDC और फास्ट पेमेंट: क्या हैं विकल्प

RBI गवर्नर के अनुसार, खुदरा भुगतान को तेज़ और किफ़ायती बनाने के लिए दो प्रमुख विकल्पों पर विचार हो रहा है — CBDC का सीमा-पार उपयोग और विभिन्न देशों के फास्ट पेमेंट सिस्टम के बीच सीधी कनेक्टिविटी। गौरतलब है कि भारत का UPI पहले से कई देशों में स्वीकार किया जा रहा है, और यह नई चर्चा उस नींव को ब्रिक्स स्तर पर विस्तार देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

रुपये के अंतरराष्ट्रीयकरण पर ज़ोर

मल्होत्रा ने बताया कि RBI भारतीय रुपये के अंतरराष्ट्रीयकरण और व्यापार में स्थानीय मुद्राओं के उपयोग को बढ़ावा देने के प्रयास जारी रखे हुए है। भारत पहले से इंडोनेशिया, मालदीव, मॉरीशस और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ द्विपक्षीय स्थानीय मुद्रा व्यवस्थाएँ लागू कर चुका है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इन लेनदेनों की मात्रा बढ़ाने से डॉलर पर निर्भरता घटेगी और व्यापार लागत में कमी आएगी।

बैंकों को AI अपनाने की सलाह

अपने संबोधन में मल्होत्रा ने भारतीय बैंकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को केवल जोखिम नहीं, बल्कि एक अवसर के रूप में देखने की सलाह दी। उन्होंने कहा, "भारतीय बैंक केवल किनारे बैठकर बदलाव का इंतज़ार नहीं कर सकते। उन्हें AI को अपनाना होगा और इसके बेहतर उपयोग के लिए मज़बूत नीतियाँ बनानी होंगी।" उन्होंने बैंकों को सभी AI मॉडलों की सूची तैयार करने और बोर्ड-स्वीकृत AI गवर्नेंस नीतियाँ लागू करने का निर्देश दिया।

वैश्विक जोखिम और भारतीय बैंकिंग की मज़बूती

वैश्विक आर्थिक परिदृश्य पर बोलते हुए RBI गवर्नर ने स्वीकार किया कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और भू-राजनीतिक घटनाक्रम निकट भविष्य में भारत की आर्थिक वृद्धि के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं। हालाँकि उन्होंने कहा कि ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण, एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा और मुक्त व्यापार समझौते (FTA) जैसे कदम दीर्घकालिक आर्थिक मज़बूती सुनिश्चित करेंगे। मल्होत्रा ने यह भी रेखांकित किया कि भारतीय बैंकों के पास फ़िलहाल मज़बूत पूँजी आधार, कम NPA और स्वस्थ लाभप्रदता है, जो उन्हें वैश्विक अनिश्चितताओं से निपटने में सक्षम बनाती है। ब्रिक्स भुगतान एकीकरण की यह पहल भारत की व्यापक वैश्विक वित्तीय रणनीति का अभिन्न हिस्सा बनती जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि ब्रिक्स सदस्यों के बीच डेटा संप्रभुता, मुद्रा विनिमय दर नीति और नियामक ढाँचे में गहरे मतभेद हैं। भारत का UPI वैश्विक स्तर पर विस्तार पा रहा है, लेकिन चीन के साथ CBDC इंटरऑपरेबिलिटी राजनीतिक रूप से संवेदनशील रहेगी। मल्होत्रा का बयान सितंबर शिखर सम्मेलन से पहले भारत की वार्ताकार स्थिति को मज़बूत करने की कोशिश भी है — असली परीक्षा वहाँ होगी।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रिक्स देशों में CBDC और फास्ट पेमेंट सिस्टम को जोड़ने का क्या मतलब है?
इसका अर्थ है कि ब्रिक्स सदस्य देश अपनी-अपनी डिजिटल मुद्राओं (CBDC) और तत्काल भुगतान प्रणालियों को आपस में इस तरह जोड़ें कि एक देश से दूसरे देश में भुगतान बिना डॉलर की मध्यस्थता के, कम लागत और तेज़ गति से हो सके। RBI गवर्नर के अनुसार यह अभी चर्चा के चरण में है।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने यह बात कहाँ और कब कही?
संजय मल्होत्रा ने 12 अगस्त 2026 को मुंबई में आयोजित FIBAC (फेडरेशन ऑफ इंडियन बैंक्स एसोसिएशन कॉन्फ्रेंस) सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने सीमा-पार भुगतान, रुपये के अंतरराष्ट्रीयकरण और बैंकों में AI अपनाने पर भी विस्तार से बोला।
भारत ने किन देशों के साथ स्थानीय मुद्रा व्यवस्था लागू की है?
भारत ने इंडोनेशिया, मालदीव, मॉरीशस और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ द्विपक्षीय स्थानीय मुद्रा व्यवस्थाएँ लागू की हैं। RBI गवर्नर ने कहा कि इन लेनदेनों की मात्रा बढ़ाने से डॉलर पर निर्भरता घटेगी।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 कब और कहाँ होगा?
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन सितंबर 2026 में होने की संभावना है और इस बार भारत इसकी मेज़बानी करेगा। इसी पृष्ठभूमि में CBDC और फास्ट पेमेंट लिंकेज पर चर्चा को महत्व मिल रहा है।
RBI गवर्नर ने भारतीय बैंकों को AI के बारे में क्या सलाह दी?
मल्होत्रा ने बैंकों को AI को जोखिम नहीं बल्कि अवसर मानने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि बैंकों को अपने सभी AI मॉडलों की सूची तैयार करनी चाहिए और बोर्ड-स्वीकृत AI गवर्नेंस नीतियाँ लागू करनी चाहिए, क्योंकि डिजिटल बदलाव में निष्क्रिय रहना संभव नहीं।
राष्ट्र प्रेस
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