ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026: भारत वैश्विक एआई केंद्र के रूप में उभरा, UPI मॉडल बना विश्व के लिए मिसाल
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में 12 सितंबर 2026 को आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पहले दिन देश-विदेश के विशेषज्ञों ने एकमत से कहा कि एआई और डिजिटल नवाचार के क्षेत्र में भारत तेज़ी से एक वैश्विक एआई केंद्र के रूप में स्थापित हो रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रिक्स देशों के बीच तकनीकी साझेदारी की संभावनाएँ असाधारण रूप से व्यापक हैं और भारत का डिजिटल भुगतान मॉडल — विशेष रूप से UPI — आज दुनियाभर के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण बन चुका है।
विशेषज्ञों की प्रमुख राय
मिस्र के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विशेषज्ञ अहमद गमाल ने कहा कि उनके दृष्टिकोण से यह सम्मेलन विशेष रूप से भारत और मिस्र के बीच एआई क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक मज़बूत शुरुआत है। उन्होंने कहा, 'भारत तेज़ी से वैश्विक एआई केंद्र के रूप में उभर रहा है और दोनों देशों के बीच तकनीकी साझेदारी की संभावनाएँ काफी व्यापक हैं।'
गमाल ने यह भी रेखांकित किया कि ब्रिक्स देशों के बीच इस प्रकार का संवाद भविष्य में संयुक्त परियोजनाओं और ज्ञान-साझाकरण के लिए एक मज़बूत आधार तैयार करेगा। उनके अनुसार, ब्रिक्स मंच उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच तकनीकी सहयोग और नवाचार को बढ़ावा देने का एक महत्त्वपूर्ण अवसर है।
एजेंटिक एआई: रोज़गार और कार्यसंस्कृति में बड़ा बदलाव
अहमद गमाल ने चेताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आने वाले वर्षों में रोज़गार और कार्यसंस्कृति में बड़े बदलाव लाएगा। उन्होंने कहा, 'एआई बहुत सारी नौकरियों की प्रकृति और कार्यप्रणाली को बदल देगा। आज दुनिया जनरेटिव एआई से आगे बढ़कर एजेंटिक एआई की ओर जा रही है। यदि सरकारें और उद्योग क्षेत्र इन तकनीकों का प्रभावी उपयोग करते हैं, तो इससे उनकी उत्पादकता में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।'
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर एआई के आर्थिक प्रभाव को लेकर बहस तेज़ हो रही है और कई देश एआई नीति-निर्माण में तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं।
ब्रिक्स पे: वैश्विक भुगतान प्रणालियों को जोड़ने की पहल
ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल के प्रमुख आंद्रे मिखायलिशिन ने बताया कि ब्रिक्स पे का उद्देश्य सदस्य देशों की राष्ट्रीय भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ना है। उन्होंने कहा, 'ब्रिक्स पे विभिन्न देशों की भुगतान प्रणालियों के बीच एक पुल का काम करता है, जिससे यात्रियों और कंपनियों को अपने-अपने देशों की भुगतान व्यवस्था का उपयोग करते हुए लेनदेन करने की सुविधा मिल सकती है।' उन्होंने यह भी कहा कि यह पहल सदस्य देशों के बीच व्यापार और वित्तीय संपर्क को और अधिक सुगम बना सकती है।
UPI और भारत-रूस सहयोग पर विशेष जोर
ब्रिक्स पे इंडिया के प्रमुख डॉ. पवन जोश ने भारत और रूस के संबंधों को ऐतिहासिक और विश्वास-आधारित बताया। उन्होंने कहा, 'रक्षा क्षेत्र की बात करें तो रूस के साथ हमारा संबंध बेहद विशेष और ऐतिहासिक है। भारत और रूस एक-दूसरे पर उसी प्रकार भरोसा करते हैं जैसे दो भाई करते हैं। 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' के हमारे लक्ष्य को हासिल करने में रूस महत्त्वपूर्ण योगदान दे सकता है।'
डॉ. जोश ने यह भी कहा कि भारत ने विदेशी तकनीकों को समझकर उन्हें स्थानीय ज़रूरतों के अनुसार विकसित किया है और इसका सबसे बड़ा उदाहरण यूपीआई (UPI) है। उनके अनुसार, भारत का डिजिटल भुगतान मॉडल आज पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल बन चुका है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'वसुधैव कुटुम्बकम' के दृष्टिकोण की सराहना करते हुए कहा कि यह ब्रिक्स के मूल दर्शन से काफी हद तक मेल खाता है।
आगे की राह
गौरतलब है कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन इस वर्ष ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा अपने चरम पर है और ग्लोबल साउथ के देश एआई और डिजिटल अवसंरचना में अपनी स्वायत्त क्षमता विकसित करने की दिशा में सक्रिय हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सम्मेलन के दौरान हुई चर्चाओं और समझौतों से भविष्य में संयुक्त तकनीकी परियोजनाओं और ब्रिक्स-स्तरीय डिजिटल सहयोग को नई गति मिलेगी।