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यूपीआई एमडीआर बदलाव: सुरक्षा और पूंजीगत खर्च में संतुलन ज़रूरी — सीआईआई अध्यक्ष आर. मुकुंदन

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यूपीआई एमडीआर बदलाव: सुरक्षा और पूंजीगत खर्च में संतुलन ज़रूरी — सीआईआई अध्यक्ष आर. मुकुंदन

सारांश

सीआईआई अध्यक्ष आर. मुकुंदन का संदेश सीधा है — यूपीआई एमडीआर पर फैसला वित्त विशेषज्ञों पर छोड़ा, लेकिन सुरक्षा से समझौता नहीं। साथ ही ब्रिक्स पर कहा कि 40% वैश्विक जीडीपी के बावजूद सिर्फ 26% व्यापार हिस्सेदारी — यह अंतर पाटने की ज़िम्मेदारी अब नीति-निर्माताओं पर है।

मुख्य बातें

मुकुंदन ने 17 सितंबर 2026 को कहा कि यूपीआई एमडीआर बदलावों में सुरक्षा और पूंजीगत खर्च के बीच संतुलन ज़रूरी है।
मुकुंदन ने स्पष्ट किया कि डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम में लेनदेन सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
ब्रिक्स देश वैश्विक जीडीपी में ~40% योगदान करते हैं, लेकिन वैश्विक व्यापार में हिस्सेदारी केवल ~26% है।
ब्रिक्स बिजनेस फोरम में कृषि से उच्च तकनीक तक चार क्षेत्रों में सकारात्मक भागीदारी दर्ज की गई।
मुकुंदन ने भारत की महत्वपूर्ण खनिजों की माँग और लैटिन अमेरिकी ब्रिक्स देशों के खनिज संसाधनों के बीच पूरकता को निवेश अवसर बताया।

भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के अध्यक्ष आर. मुकुंदन ने 17 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि यूपीआई (UPI) लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) से जुड़े हालिया बदलावों में सुरक्षित डिजिटल भुगतान व्यवस्था बनाए रखने और इस प्रणाली को संचालित रखने के लिए आवश्यक बढ़े हुए पूंजीगत खर्च के बीच सावधानीपूर्वक संतुलन बनाना होगा। मुकुंदन ने स्पष्ट किया कि जैसे-जैसे डिजिटल भुगतान का इकोसिस्टम विस्तार पा रहा है, लेनदेन की सुरक्षा से किसी भी स्थिति में समझौता नहीं किया जा सकता।

एमडीआर पर मुकुंदन का रुख

मुकुंदन ने कहा कि वह एमडीआर के तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं हैं, क्योंकि वित्त विशेषज्ञ आगे का उचित रास्ता तय करने के लिए बेहतर स्थिति में हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि एक सार्थक और व्यावहारिक समाधान ज़रूर सामने आएगा। उनके अनुसार, मुख्य चुनौती यही है कि लेनदेन की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए अतिरिक्त पूंजीगत खर्च की माँग को भी पूरा किया जाए।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर नज़रिया

मुकुंदन ने ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के बारे में कहा कि इस बैठक ने सदस्य देशों को एकजुट किया और चर्चाओं में अधिक गर्मजोशी एवं बेहतर तालमेल का माहौल तैयार हुआ। उन्होंने रेखांकित किया कि ब्रिक्स अब अपने मूल सदस्य देशों से काफी आगे विस्तार कर चुका है और ब्रिक्स बिजनेस फोरम में कृषि से लेकर उच्च तकनीक तक चार प्रमुख क्षेत्रों में सकारात्मक भागीदारी देखने को मिली।

व्यापार-निवेश में 'इरादे से नतीजों की ओर'

मुकुंदन के अनुसार, ब्रिक्स बिजनेस फोरम से निकलने वाला केंद्रीय संदेश 'इरादे से नतीजों की ओर बढ़ने' की आवश्यकता थी — विशेष रूप से व्यापार और निवेश के क्षेत्र में। उन्होंने बताया कि ब्रिक्स देश वैश्विक जीडीपी में करीब 40 प्रतिशत का योगदान देते हैं, लेकिन वैश्विक व्यापार में उनकी हिस्सेदारी अभी केवल लगभग 26 प्रतिशत है। यह अंतर ब्रिक्स देशों के बीच आपसी व्यापार बढ़ाने की व्यापक संभावनाओं को रेखांकित करता है।

गैर-टैरिफ बाधाएँ और खनिज संसाधन

सीआईआई अध्यक्ष ने ज़ोर दिया कि गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करना, गुणवत्ता मानकों में तालमेल बनाना, मंजूरी प्रक्रियाओं को मानकीकृत करना और सीमाओं के पार वस्तुओं की आवाजाही को सुगम बनाना ब्रिक्स अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार को नई ऊँचाई देने के लिए अनिवार्य है। उन्होंने भारत की महत्वपूर्ण खनिजों की बढ़ती माँग और लैटिन अमेरिकी ब्रिक्स अर्थव्यवस्थाओं में उपलब्ध खनिज संसाधनों के बीच प्राकृतिक पूरकता का उदाहरण देते हुए कहा कि सीमा पार निवेश की इस दिशा में अपार संभावनाएँ हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी हरित ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षित करने में जुटा है।

आगे की राह

मुकुंदन के बयान से स्पष्ट है कि उद्योग जगत यूपीआई-एमडीआर बहस में किसी एक पक्ष के साथ खड़े होने के बजाय एक संतुलित नीतिगत समाधान की प्रतीक्षा कर रहा है। ब्रिक्स व्यापार के मोर्चे पर, विशेषज्ञों का मानना है कि जीडीपी और व्यापार हिस्सेदारी के बीच की यह खाई अगले कुछ वर्षों में नीतिगत सुधारों की दिशा तय कर सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न ही मुफ्त सेवा की मौजूदा व्यवस्था को बाधित करने की ज़िम्मेदारी लेना चाहती है। यूपीआई की सफलता की असली कीमत कौन चुकाए — बैंक, सरकार, या व्यापारी — यह बहस अभी अनसुलझी है और एमडीआर पर कोई भी फैसला करोड़ों छोटे व्यापारियों की लागत सीधे प्रभावित करेगा। ब्रिक्स पर जीडीपी बनाम व्यापार हिस्सेदारी का अंतर उजागर करना महत्वपूर्ण है, लेकिन गैर-टैरिफ बाधाओं और मानक-तालमेल जैसे ढाँचागत सुधार बिना राजनीतिक इच्छाशक्ति के केवल फोरम की भाषा बनकर रह जाते हैं।
RashtraPress
17 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपीआई एमडीआर (MDR) क्या है और इसमें बदलाव क्यों हो रहे हैं?
मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह शुल्क है जो डिजिटल लेनदेन पर व्यापारियों से लिया जा सकता है। हाल के बदलावों का उद्देश्य यूपीआई इकोसिस्टम को टिकाऊ बनाने के लिए पूंजीगत खर्च की भरपाई करना है, लेकिन इससे सुरक्षा और लागत संतुलन का सवाल उठ खड़ा हुआ है।
सीआईआई अध्यक्ष आर. मुकुंदन ने यूपीआई एमडीआर पर क्या कहा?
मुकुंदन ने 17 सितंबर 2026 को कहा कि एमडीआर बदलावों में सुरक्षित डिजिटल भुगतान बनाए रखने और बढ़े हुए पूंजीगत खर्च के बीच संतुलन बनाना होगा। उन्होंने तकनीकी टिप्पणी से परहेज़ करते हुए वित्त विशेषज्ञों पर समाधान की जिम्मेदारी छोड़ी और एक सार्थक हल आने का भरोसा जताया।
ब्रिक्स बिजनेस फोरम में किन क्षेत्रों में चर्चा हुई?
ब्रिक्स बिजनेस फोरम में कृषि से लेकर उच्च तकनीक तक चार प्रमुख क्षेत्रों में सकारात्मक भागीदारी हुई। मुकुंदन ने बताया कि फोरम का केंद्रीय संदेश व्यापार और निवेश में 'इरादे से नतीजों की ओर' बढ़ने का था।
ब्रिक्स देशों की वैश्विक जीडीपी और व्यापार में हिस्सेदारी कितनी है?
मुकुंदन के अनुसार, ब्रिक्स देश वैश्विक जीडीपी में करीब 40 प्रतिशत का योगदान करते हैं, लेकिन वैश्विक व्यापार में उनकी हिस्सेदारी अभी लगभग 26 प्रतिशत है। यह अंतर ब्रिक्स देशों के बीच आपसी व्यापार बढ़ाने की बड़ी संभावनाओं को दर्शाता है।
भारत और लैटिन अमेरिकी ब्रिक्स देशों के बीच खनिज संसाधनों पर क्या अवसर हैं?
मुकुंदन ने बताया कि भारत को महत्वपूर्ण खनिजों की बड़ी माँग है जबकि लैटिन अमेरिकी ब्रिक्स अर्थव्यवस्थाओं के पास इन खनिज संसाधनों की प्रचुरता है। यह प्राकृतिक पूरकता सीमा पार निवेश के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है।
राष्ट्र प्रेस
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