अवनि लेखरा: पैरालंपिक में 3 पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला, आज मना रहीं 25वाँ जन्मदिन
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय पैरा निशानेबाज़ अवनि लेखरा 8 नवंबर 2026 को अपना 25वाँ जन्मदिन मना रही हैं — एक ऐसी खिलाड़ी जिन्होंने व्हीलचेयर पर बैठकर वह इतिहास रचा जो पहले किसी भारतीय महिला ने पैरालंपिक मंच पर नहीं किया। जयपुर, राजस्थान की इस बेटी ने टोक्यो 2020 और पेरिस 2024 पैरालंपिक में कुल 3 पदक जीतकर भारतीय खेल इतिहास में अपना नाम स्वर्णाक्षरों में दर्ज कराया है।
संघर्ष से शिखर तक का सफ़र
अवनि लेखरा का जन्म 8 नवंबर 2001 को जयपुर में हुआ था। जब वह महज़ 11 वर्ष की थीं, एक सड़क दुर्घटना में उनकी रीढ़ की हड्डी (स्पाइनल कॉर्ड) को गंभीर चोट आई, जिससे कमर के नीचे का हिस्सा हमेशा के लिए लकवाग्रस्त हो गया। उस उम्र में जहाँ अधिकांश बच्चे खेल के मैदान में दौड़ रहे होते हैं, अवनि को व्हीलचेयर पर जीवन की नई शुरुआत करनी पड़ी।
इस विकट परिस्थिति में उनके पिता ने एक अहम भूमिका निभाई। उनका मानना था कि किसी खेल से जुड़ने पर अवनि की मानसिक स्थिति बेहतर होगी। दुर्घटना के करीब तीन साल बाद अवनि ने शूटिंग में अपना भविष्य ढूँढने का दृढ़ निश्चय किया। बीजिंग ओलंपिक 2008 के स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा उनकी प्रेरणा बने।
टोक्यो 2020: इतिहास की पहली स्वर्णिम दस्तक
टोक्यो पैरालंपिक 2020 में अवनि ने वह कर दिखाया जो उससे पहले कोई भारतीय महिला नहीं कर पाई थी। उन्होंने 10 मीटर एयर राइफल SH1 इवेंट के फाइनल में 249.6 अंक के साथ स्वर्ण पदक जीता और पैरालंपिक में गोल्ड मेडल हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला बन गईं। इसी पैरालंपिक में उन्होंने 50 मीटर राइफल थ्री पोज़िशन SH1 स्पर्धा में कांस्य पदक भी अपने नाम किया — एक ही खेलों में दो पदक, जो अपने आप में असाधारण उपलब्धि थी।
पेरिस 2024: पैरालंपिक रिकॉर्ड के साथ दूसरा स्वर्ण
पेरिस पैरालंपिक 2024 में अवनि ने टोक्यो का प्रदर्शन दोहराया — और उससे आगे निकल गईं। उन्होंने 10 मीटर एयर राइफल SH1 के फाइनल में 249.7 अंक के साथ पैरालंपिक रिकॉर्ड बनाते हुए स्वर्ण पदक जीता। इस उपलब्धि के साथ वह पैरालंपिक में 2 स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला और 3 पैरालंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गईं।
गौरतलब है कि टोक्यो से पेरिस के बीच का यह सफ़र सिर्फ़ एक और पदक का नहीं था — यह भारतीय पैरा खेल आंदोलन की परिपक्वता का प्रमाण था। अवनि ने साबित किया कि उनका टोक्यो प्रदर्शन कोई संयोग नहीं, बल्कि निरंतर मेहनत और समर्पण का नतीजा था।
एशियन पैरा गेम्स और अन्य उपलब्धियाँ
पैरालंपिक के अतिरिक्त अवनि ने जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में रजत पदक जीतकर एशियाई स्तर पर भी अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में उनके सातत्य ने उन्हें भारतीय पैरा निशानेबाज़ी का चेहरा बना दिया है।
सम्मान और आगे की राह
शूटिंग में असाधारण योगदान के लिए अवनि को भारत के सर्वोच्च खेल सम्मान मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार और पद्मश्री से नवाज़ा जा चुका है। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय पैरा खेल अंतरराष्ट्रीय मंच पर तेज़ी से पहचान बना रहे हैं।
आज 25 वर्ष की उम्र में अवनि लेखरा अपने करियर के सर्वश्रेष्ठ दौर में हैं। लॉस एंजेलेस पैरालंपिक 2028 तक देश को उनसे और भी बड़े मंचों पर तिरंगे की शान बढ़ाने की उम्मीद है।