7 नवंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

अवनि लेखरा: पैरालंपिक में 3 पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला, आज मना रहीं 25वाँ जन्मदिन

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
अवनि लेखरा: पैरालंपिक में 3 पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला, आज मना रहीं 25वाँ जन्मदिन

सारांश

व्हीलचेयर पर बैठकर, 11 साल की उम्र में आई त्रासदी को पीछे छोड़ते हुए — अवनि लेखरा ने टोक्यो और पेरिस पैरालंपिक में 3 पदक जीतकर वह मुकाम हासिल किया जो किसी भारतीय महिला ने पहले नहीं पाया। आज 25वें जन्मदिन पर उनकी कहानी सिर्फ खेल की नहीं, अदम्य इच्छाशक्ति की भी है।

मुख्य बातें

अवनि लेखरा का जन्म 8 नवंबर 2001 को जयपुर, राजस्थान में हुआ; 11 वर्ष की उम्र में दुर्घटना से स्पाइनल कॉर्ड इंजरी हुई।
टोक्यो पैरालंपिक 2020 में 10 मीटर एयर राइफल SH1 में 249.6 अंक से गोल्ड और 50 मीटर राइफल थ्री पोज़िशन SH1 में ब्रॉन्ज जीता।
पेरिस पैरालंपिक 2024 में 249.7 अंक के साथ पैरालंपिक रिकॉर्ड बनाते हुए दूसरा गोल्ड जीता।
पैरालंपिक में 2 स्वर्ण पदक और 3 कुल पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला ।
मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार और पद्मश्री से सम्मानित।

भारतीय पैरा निशानेबाज़ अवनि लेखरा 8 नवंबर 2026 को अपना 25वाँ जन्मदिन मना रही हैं — एक ऐसी खिलाड़ी जिन्होंने व्हीलचेयर पर बैठकर वह इतिहास रचा जो पहले किसी भारतीय महिला ने पैरालंपिक मंच पर नहीं किया। जयपुर, राजस्थान की इस बेटी ने टोक्यो 2020 और पेरिस 2024 पैरालंपिक में कुल 3 पदक जीतकर भारतीय खेल इतिहास में अपना नाम स्वर्णाक्षरों में दर्ज कराया है।

संघर्ष से शिखर तक का सफ़र

अवनि लेखरा का जन्म 8 नवंबर 2001 को जयपुर में हुआ था। जब वह महज़ 11 वर्ष की थीं, एक सड़क दुर्घटना में उनकी रीढ़ की हड्डी (स्पाइनल कॉर्ड) को गंभीर चोट आई, जिससे कमर के नीचे का हिस्सा हमेशा के लिए लकवाग्रस्त हो गया। उस उम्र में जहाँ अधिकांश बच्चे खेल के मैदान में दौड़ रहे होते हैं, अवनि को व्हीलचेयर पर जीवन की नई शुरुआत करनी पड़ी।

इस विकट परिस्थिति में उनके पिता ने एक अहम भूमिका निभाई। उनका मानना था कि किसी खेल से जुड़ने पर अवनि की मानसिक स्थिति बेहतर होगी। दुर्घटना के करीब तीन साल बाद अवनि ने शूटिंग में अपना भविष्य ढूँढने का दृढ़ निश्चय किया। बीजिंग ओलंपिक 2008 के स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा उनकी प्रेरणा बने।

टोक्यो 2020: इतिहास की पहली स्वर्णिम दस्तक

टोक्यो पैरालंपिक 2020 में अवनि ने वह कर दिखाया जो उससे पहले कोई भारतीय महिला नहीं कर पाई थी। उन्होंने 10 मीटर एयर राइफल SH1 इवेंट के फाइनल में 249.6 अंक के साथ स्वर्ण पदक जीता और पैरालंपिक में गोल्ड मेडल हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला बन गईं। इसी पैरालंपिक में उन्होंने 50 मीटर राइफल थ्री पोज़िशन SH1 स्पर्धा में कांस्य पदक भी अपने नाम किया — एक ही खेलों में दो पदक, जो अपने आप में असाधारण उपलब्धि थी।

पेरिस 2024: पैरालंपिक रिकॉर्ड के साथ दूसरा स्वर्ण

पेरिस पैरालंपिक 2024 में अवनि ने टोक्यो का प्रदर्शन दोहराया — और उससे आगे निकल गईं। उन्होंने 10 मीटर एयर राइफल SH1 के फाइनल में 249.7 अंक के साथ पैरालंपिक रिकॉर्ड बनाते हुए स्वर्ण पदक जीता। इस उपलब्धि के साथ वह पैरालंपिक में 2 स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला और 3 पैरालंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गईं।

गौरतलब है कि टोक्यो से पेरिस के बीच का यह सफ़र सिर्फ़ एक और पदक का नहीं था — यह भारतीय पैरा खेल आंदोलन की परिपक्वता का प्रमाण था। अवनि ने साबित किया कि उनका टोक्यो प्रदर्शन कोई संयोग नहीं, बल्कि निरंतर मेहनत और समर्पण का नतीजा था।

एशियन पैरा गेम्स और अन्य उपलब्धियाँ

पैरालंपिक के अतिरिक्त अवनि ने जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में रजत पदक जीतकर एशियाई स्तर पर भी अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में उनके सातत्य ने उन्हें भारतीय पैरा निशानेबाज़ी का चेहरा बना दिया है।

सम्मान और आगे की राह

शूटिंग में असाधारण योगदान के लिए अवनि को भारत के सर्वोच्च खेल सम्मान मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार और पद्मश्री से नवाज़ा जा चुका है। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय पैरा खेल अंतरराष्ट्रीय मंच पर तेज़ी से पहचान बना रहे हैं।

आज 25 वर्ष की उम्र में अवनि लेखरा अपने करियर के सर्वश्रेष्ठ दौर में हैं। लॉस एंजेलेस पैरालंपिक 2028 तक देश को उनसे और भी बड़े मंचों पर तिरंगे की शान बढ़ाने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस व्यवस्था की भी परीक्षा है जो दिव्यांग खिलाड़ियों को कितना समर्थन देती है। पेरिस में पैरालंपिक रिकॉर्ड तोड़ना यह साबित करता है कि उनका टोक्यो स्वर्ण कोई एकबारगी चमत्कार नहीं था। लेकिन यह भी सच है कि उनके जैसे प्रतिभाशाली पैरा एथलीट अपवाद हैं, नियम नहीं — भारत में पैरा खेल बुनियादी ढाँचे और कोचिंग तंत्र में निवेश अभी भी उस स्तर पर नहीं है जो इस प्रतिभा की माँग करती है। अवनि की उपलब्धियाँ व्यक्तिगत संकल्प की जीत हैं, लेकिन असली सफलता तब होगी जब यह संस्थागत समर्थन की भी जीत बने।
RashtraPress
7 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अवनि लेखरा ने पैरालंपिक में कितने पदक जीते हैं?
अवनि लेखरा ने पैरालंपिक में कुल 3 पदक जीते हैं — टोक्यो 2020 में 1 स्वर्ण और 1 कांस्य, तथा पेरिस 2024 में 1 स्वर्ण। वह पैरालंपिक में 3 पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला हैं।
अवनि लेखरा को व्हीलचेयर पर क्यों रहना पड़ता है?
11 वर्ष की आयु में एक सड़क दुर्घटना में अवनि की रीढ़ की हड्डी (स्पाइनल कॉर्ड) को गंभीर चोट आई, जिससे उनके कमर के नीचे का हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया। तब से वह व्हीलचेयर का उपयोग करती हैं।
अवनि लेखरा को कौन-से पुरस्कार मिले हैं?
अवनि लेखरा को भारत का सर्वोच्च खेल सम्मान मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार और नागरिक सम्मान पद्मश्री प्रदान किया जा चुका है। ये दोनों पुरस्कार पैरालंपिक और अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए दिए गए।
पेरिस पैरालंपिक 2024 में अवनि लेखरा का स्कोर क्या रहा?
पेरिस पैरालंपिक 2024 में अवनि लेखरा ने 10 मीटर एयर राइफल SH1 इवेंट के फाइनल में 249.7 अंक हासिल कर पैरालंपिक रिकॉर्ड बनाया और स्वर्ण पदक जीता। यह टोक्यो 2020 के उनके 249.6 अंक से भी बेहतर था।
अवनि लेखरा को शूटिंग की प्रेरणा कहाँ से मिली?
अवनि के पिता ने उन्हें मानसिक रूप से व्यस्त रखने के लिए शूटिंग से जोड़ा। बीजिंग ओलंपिक 2008 के स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा उनके आदर्श रहे, और दुर्घटना के तीन साल बाद उन्होंने शूटिंग में करियर बनाने का दृढ़ संकल्प लिया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 दिन पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 2 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 11 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले