एशियन पैरा गेम्स 2026: मोना अग्रवाल ने रिकॉर्ड 250 स्कोर से गोल्ड, अवनि लेखरा ने जीता सिल्वर
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय पैरा शूटर मोना अग्रवाल ने 19 अक्टूबर 2026 को टोयोटा स्थित ऐची प्रीफेक्चर जनरल शूटिंग गैलरी में महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग एसएच1 इवेंट में एशियन पैरा गेम्स रिकॉर्ड 250 का स्कोर दर्ज कर स्वर्ण पदक जीता। उनकी हमवतन अवनि लेखरा ने 249.6 अंकों के साथ रजत पदक हासिल किया। इन दोनों पदकों के साथ एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारत का पदक खाता खुल गया।
मुख्य घटनाक्रम: फाइनल का पूरा हिसाब
दक्षिण कोरिया की युनरी ली ने 227.9 के स्कोर के साथ कांस्य पदक जीता। मोना ने इस जीत के साथ अवनि का ही वह एशियन पैरा गेम्स रिकॉर्ड तोड़ा जो 249.6 का था। हालांकि वह स्लोवाकिया की इरीना शचेतनिक के 252 के विश्व रिकॉर्ड को तोड़ने से चूक गईं — यह अंतर मात्र 2 अंकों का रहा।
क्वालीफिकेशन राउंड में भी रहा भारत का दबदबा
फाइनल से पहले क्वालीफिकेशन राउंड में भी दोनों भारतीय निशानेबाज़ों ने शीर्ष दो स्थान अपने नाम किए। मोना ने छह सीरीज़ के बाद 629.1 पॉइंट्स के साथ पहला स्थान हासिल किया और चीन की झांग कुइपिंग का पुराना क्वालीफिकेशन रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया। अवनि ने 626.4 पॉइंट्स के साथ दूसरा स्थान पक्का किया, जिससे मेडल राउंड में भारत की 1-2 पोजीशन पहले से तय हो गई थी।
2028 लॉस एंजिल्स पैरालंपिक के लिए कोटा भी हासिल
अवनि लेखरा ने इस रजत पदक के साथ 2028 लॉस एंजिल्स पैरालंपिक गेम्स के लिए भारत का कोटा भी अपने नाम कर लिया। मोना अग्रवाल ने यह कोटा इससे पहले, पिछले महीने चांगवोन में आयोजित डब्ल्यूएसपीएस वर्ल्ड चैंपियनशिप के दौरान हासिल किया था। गौरतलब है कि उसी चांगवोन विश्व चैंपियनशिप में मोना 250 के स्कोर के साथ दूसरे स्थान पर रही थीं और अवनि ने 229.4 अंकों के साथ कांस्य पदक जीता था।
दोनों खिलाड़ियों का पैरालंपिक इतिहास
मोना अग्रवाल के पास 2024 पेरिस पैरालंपिक का कांस्य पदक है, जो उनके करियर की बड़ी उपलब्धि रही है। वहीं अवनि लेखरा पैरालंपिक खेलों में अब तक तीन पदक जीत चुकी हैं — टोक्यो पैरालंपिक में उन्होंने 10 मीटर एयर राइफल एसएच1 में स्वर्ण और 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन एसएच1 में कांस्य पदक जीता था। इसके बाद पेरिस पैरालंपिक 2024 में उन्होंने 10 मीटर एयर राइफल एसएच1 में एक बार फिर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
आगे की राह
यह ऐतिहासिक 1-2 फिनिश भारतीय पैरा शूटिंग की बढ़ती ताकत का स्पष्ट संकेत है। यह जीत ऐसे समय में आई है जब भारत 2028 लॉस एंजिल्स पैरालंपिक की तैयारियों में जुटा है। दोनों निशानेबाज़ों के कोटा पहले से सुरक्षित होने के साथ, अब नज़रें उनके प्रदर्शन की निरंतरता और टीम के अन्य सदस्यों के पदक अभियान पर टिकी रहेंगी।