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क्या अनंत चतुर्दशी पर भगवान विष्णु की पूजा और गणेश विसर्जन का पावन पर्व है?

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क्या अनंत चतुर्दशी पर भगवान विष्णु की पूजा और गणेश विसर्जन का पावन पर्व है?

सारांश

अनंत चतुर्दशी एक महत्वपूर्ण पर्व है, जहाँ भगवान विष्णु की पूजा और गणेश की विदाई होती है। जानिए इस दिन का महत्व और धार्मिक अनुष्ठान।

मुख्य बातें

अनंत चतुर्दशी भगवान विष्णु की पूजा का दिन है।
यह दिन गणेशोत्सव का समापन भी है।
भक्त इस दिन अनंत सूत्र धारण करते हैं।
यह पर्व सुख और समृद्धि का प्रतीक है।
भक्ति और आस्था का अद्भुत मेल है।

मुंबई, 5 सितंबर (राष्ट्र प्रेस)। भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि (शनिवार) को अनंत चतुर्दशी मनाई जाती है। यह दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा और गणेशोत्सव के समापन का अद्वितीय संगम है।

हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व है, क्योंकि यह सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति के साथ-साथ जीवन के कष्टों को दूर करने वाला माना जाता है।

पुराणों के अनुसार, अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा और व्रत का विधान है।

भक्त इस दिन अनंत सूत्र धारण करते हैं, जिसमें 14 गांठें होती हैं। ये गांठें भगवान विष्णु के 14 लोकों-भुवन, भुवर, स्व, मह, जन, तप, सत्य, अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल और पाताल का प्रतीक हैं।

यह पवित्र धागा सुरक्षा का प्रतीक है, जो व्यक्ति को हर संकट से बचाता है। इसे पुरुष 'दाहिने' और महिलाएं 'बाएं' हाथ में बांधती हैं।

मान्यता है कि इस धागे को धारण करने से जीवन में सकारात्मकता और शांति बनी रहती है।

अनंत चतुर्दशी का दिन गणेशोत्सव का समापन भी होता है। गणेश चतुर्थी के दिन स्थापित की गई भगवान गणेश की मूर्तियों का इस दिन विसर्जन किया जाता है। भक्तगण ढोल-नगाड़ों, भक्ति भजनों और ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयघोष के साथ गणेश जी को विदा करते हैं। इस विश्वास के साथ कि वे अगले वर्ष फिर आएंगे।

इस तरह यह दिन भगवान विष्णु की पूजा और भगवान गणेश की विदाई दोनों का संगम है, जो इसे और भी विशेष बनाता है। अनंत चतुर्दशी का यह पर्व भक्ति और आस्था का अनूठा मेल है, जो भगवान विष्णु की कृपा और गणेश जी की विदाई के साथ जीवन में नई ऊर्जा और समृद्धि लाता है।

दृक पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्य सिंह राशि में रहेंगे और चंद्रमा सुबह के 11 बजकर 21 मिनट तक मकर राशि में रहेंगे। इसके बाद कुंभ राशि में गोचर करेंगे। इसके साथ ही इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 54 मिनट से शुरू होकर दोपहर के 12 बजकर 44 मिनट तक रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह समाज में एकता और सहयोग का संदेश भी देता है। इस दिन की पूजा और अनुष्ठान से भक्तजन न केवल अपने जीवन में सुख-समृद्धि लाने का प्रयास करते हैं, बल्कि यह पर्व हमें अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक भी करता है।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अनंत चतुर्दशी क्या है?
अनंत चतुर्दशी एक हिंदू पर्व है जो भगवान विष्णु की पूजा और गणेशोत्सव के समापन का प्रतीक है।
इस दिन क्या किया जाता है?
इस दिन भक्त अनंत सूत्र धारण करते हैं और भगवान गणेश की मूर्तियों का विसर्जन करते हैं।
अनंत चतुर्दशी का महत्व क्या है?
यह दिन सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति का प्रतीक है।
इस दिन कौन से मुहूर्त होते हैं?
दृक पंचांग के अनुसार, इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:54 से 12:44 बजे तक रहेगा।
राष्ट्र प्रेस
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