दीपावली पर जलने से बचाव: PGI चंडीगढ़ तैयार, प्रो. अतुल पाराशर की ज़रूरी सलाह
सारांश
मुख्य बातें
पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGI), चंडीगढ़ के सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रो. अतुल पाराशर ने 7 नवंबर 2026 को बताया कि दीपावली के दौरान पटाखों और दीयों से होने वाली जलन की चोटों के उपचार के लिए अस्पताल पूरी तरह सज्ज है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि 'उपचार से बेहतर बचाव' — और इसके लिए कुछ सरल सावधानियाँ अपनाना ही खुशियों के इस पर्व को सुरक्षित बना सकता है।
PGI की तैयारी: बेड से लेकर 24×7 टीम तक
प्रो. पाराशर ने कहा, 'जैसा कि दीपावली पर अक्सर देखा जाता है, काफी लोग जलने की चोट के बाद हमारे पास आते हैं। इसके लिए हम पूरी तरह से तैयार हैं। हमने पर्याप्त बेड आरक्षित रखे हुए हैं, ताकि यदि कोई ऐसा मरीज़ आता है, तो उसका उचित इलाज किया जा सके।' उन्होंने बताया कि डॉक्टरों की टीम 24×7 उपलब्ध रहेगी और ड्रेसिंग सामग्री सहित सभी आवश्यक चिकित्सा व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की गई हैं।
सही कपड़े पहनें: ढीले कपड़े बन सकते हैं खतरा
प्लास्टिक सर्जरी विभाग के विशेषज्ञ प्रो. पाराशर ने सलाह दी कि जब घर में मोमबत्तियाँ, दीये या पटाखे जलाए जाएँ, तो सूती (कॉटन) और शरीर से फिट रहने वाले कपड़े पहनें। उन्होंने ढीले पारंपरिक परिधानों — विशेषकर लंबी चुन्नी या दुपट्टे — से दूरी बनाने की हिदायत दी, क्योंकि ऐसे कपड़ों में अनजाने में आग लगने की आशंका अधिक रहती है।
बच्चों और किशोरों के लिए विशेष चेतावनी
प्रो. पाराशर ने कहा कि अक्सर कम उम्र के बच्चों और किशोरों में पटाखों को हाथ में पकड़कर जलाने का खतरनाक चलन देखा जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया, 'यह कोई बहादुरी या आकर्षक दिखने का तरीका नहीं है।' उनके अनुसार इससे ऐसी गंभीर चोटें हो सकती हैं जिनमें दो, तीन या चार सर्जरी के बाद भी हाथ की पूरी कार्यक्षमता वापस नहीं आ पाती — जो पढ़ाई और भविष्य-निर्माण की उम्र में जीवन पर बड़ा असर डाल सकती हैं।
आपातकालीन स्थिति में क्या करें
यदि गलती से कोई व्यक्ति जल जाए, तो प्रो. पाराशर ने सुझाया कि प्रभावित हिस्से को तुरंत बहते साफ पानी के नीचे तब तक रखें जब तक जलन कम न हो जाए। उन्होंने कहा कि इस साधारण उपाय से जलने की गंभीरता सीमित होती है, उपचार आसान हो जाता है और बाद में निशान पड़ने की संभावना भी घटती है।
कपड़ों में आग लगने की स्थिति में 'स्टॉप, ड्रॉप एंड रोल' का पालन करें — यानी तुरंत रुक जाएँ, जमीन पर लेट जाएँ और लुढ़कें। भागने से ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है और आग तेज़ी से फैल सकती है। यदि पास में कंबल या मोटी चादर हो, तो उससे शरीर को ढक दें। न फूटे हुए पटाखे के पास दोबारा न जाएँ — वह अचानक फट सकता है और हाथ, चेहरे या आँखों को गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है।
आँखों में चोट: तुरंत विशेषज्ञ के पास जाएँ
प्रो. पाराशर ने बताया कि पटाखा फटने पर हाथ, चेहरा और आँखें सबसे अधिक प्रभावित होती हैं। यदि आँख में चोट लगे या जलन महसूस हो, तो आँखें बिल्कुल न मलें और तुरंत किसी नेत्र रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें अथवा PGI जैसे अस्पताल में जाँच कराएँ। उन्होंने अंत में कहा कि पर्व की खुशियाँ सुरक्षित रहें, इसीलिए 'उपचार से बेहतर बचाव' का सिद्धांत अपनाना सबसे ज़रूरी है — और फिर भी यदि चोट हो, तो PGI का पूरा विभाग हर सुविधा के साथ तत्पर है।