5 नवंबर 2026
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रमा एकादशी 2026: प्रयागराज में यमुना घाटों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, कार्तिक स्नान का विशेष महत्व

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रमा एकादशी 2026: प्रयागराज में यमुना घाटों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, कार्तिक स्नान का विशेष महत्व

सारांश

रमा एकादशी पर प्रयागराज के यमुना घाट आस्था से सराबोर रहे। तीर्थ पुरोहितों के अनुसार कार्तिक में एक माह यमुना स्नान का फल बारह माह गंगा स्नान के बराबर है — यही मान्यता हर साल हज़ारों श्रद्धालुओं को इस तीर्थनगरी खींच लाती है।

मुख्य बातें

5 नवंबर 2026 को रमा एकादशी के अवसर पर प्रयागराज के यमुना घाटों पर हज़ारों श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान किया।
तीर्थ पुरोहित पंडित महेंद्र मिश्रा के अनुसार सुबह 10:30 बजे के बाद द्वादशी तिथि लग गई।
शास्त्रों के अनुसार कार्तिक मास में एक महीने यमुना स्नान का पुण्य बारह महीने गंगा स्नान के बराबर माना जाता है।
जो श्रद्धालु पहले संकल्प नहीं ले पाए थे, उन्होंने आज से कार्तिक स्नान की शुरुआत की।
देवउठनी एकादशी और कार्तिक पूर्णिमा पर और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना है।

प्रयागराज में रमा एकादशी के पावन अवसर पर 5 नवंबर 2026 को यमुना नदी के घाटों पर हज़ारों श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान किया और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की इस एकादशी पर सुबह से ही घाटों पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और चारों ओर भक्ति व आस्था का वातावरण छाया रहा।

घाटों पर भक्ति का माहौल

भोर होते ही श्रद्धालु यमुना के घाटों पर पहुँचने लगे। महिलाओं ने समूह में बैठकर भजन-कीर्तन किया, जबकि बच्चों से लेकर वृद्धों तक सभी ने श्रद्धापूर्वक यमुना में डुबकी लगाई। घाटों पर फूल, फल और पूजन सामग्री के साथ यमुना की आराधना की गई। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर अपने परिजनों के कल्याण की प्रार्थना की।

तीर्थ पुरोहित ने बताया धार्मिक महत्व

तीर्थ पुरोहित पंडित महेंद्र मिश्रा ने बताया कि आज कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की एकादशी है और सुबह 10 बजकर 30 मिनट के बाद द्वादशी तिथि आरंभ हो जाएगी। उन्होंने कहा कि जो श्रद्धालु पूरे महीने के स्नान का संकल्प ले चुके थे, वे पहले से ही घाट पर मौजूद थे। वहीं जो किसी कारणवश संकल्प नहीं ले पाए थे, वे भी आज से कार्तिक स्नान की शुरुआत कर रहे हैं।

पंडित मिश्रा ने शास्त्रों का उल्लेख करते हुए बताया कि कार्तिक मास में भगवान कृष्ण और यमुना का विशेष आध्यात्मिक संबंध माना जाता है। उनके अनुसार, शास्त्रों में उल्लेख है कि जो पुण्य बारह महीने गंगा में स्नान करने से प्राप्त होता है, वही फल केवल एक महीने कार्तिक में यमुना स्नान करने से मिल जाता है।

श्रद्धालुओं की आस्था

यमुना स्नान के लिए पहुँचीं श्रद्धालु अंजू सिंह ने बताया कि वे एकादशी के पावन अवसर पर यमुना में स्नान करने आई हैं और इस दौरान उन्होंने अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। उनकी तरह ही अनेक अन्य श्रद्धालुओं ने भी स्नान और ध्यान के बाद पूजा-अर्चना की। गौरतलब है कि कार्तिक मास में बड़ी संख्या में श्रद्धालु एक महीने के संकल्प के साथ प्रतिदिन यमुना स्नान करते हैं।

कार्तिक मास का विशेष संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब प्रयागराज धार्मिक आयोजनों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। कार्तिक मास में इस तीर्थनगरी में देश के विभिन्न कोनों से श्रद्धालु पहुँचते हैं। तीर्थ पुरोहितों के अनुसार, इस वर्ष भी कार्तिक महीने में यमुना घाटों पर श्रद्धालुओं की संख्या उत्साहजनक रही है।

आगे का कार्यक्रम

कार्तिक मास के शेष दिनों में भी यमुना घाटों पर स्नान और पूजन का सिलसिला जारी रहेगा। देवउठनी एकादशी और कार्तिक पूर्णिमा पर और भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के प्रयागराज पहुँचने की संभावना है, जिससे घाटों पर भक्ति का माहौल और गहरा होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस सांस्कृतिक निरंतरता का प्रमाण है जो वर्षों की सामाजिक उथल-पुथल के बाद भी भारत के तीर्थस्थलों को जीवंत रखती है। हालाँकि, यमुना नदी की स्वच्छता का प्रश्न हर बड़े स्नान पर्व के साथ उठता है — श्रद्धालुओं की आस्था और नदी की दशा के बीच यह विरोधाभास नीति-निर्माताओं के लिए अनुत्तरित चुनौती बना हुआ है। कार्तिक मास में इस स्तर की सहभागिता यह भी दर्शाती है कि महाकुंभ के बाद प्रयागराज की धार्मिक पहचान और मज़बूत हुई है।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रमा एकादशी क्या है और इसका महत्व क्यों है?
रमा एकादशी कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है और इसे अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। तीर्थ पुरोहितों के अनुसार इस दिन यमुना स्नान और भगवान विष्णु की पूजा से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
कार्तिक मास में यमुना स्नान का विशेष महत्व क्यों है?
शास्त्रों के अनुसार कार्तिक मास में एक महीने तक यमुना में स्नान करने से वही पुण्य मिलता है जो बारह महीने गंगा में स्नान करने से प्राप्त होता है। तीर्थ पुरोहित पंडित महेंद्र मिश्रा के अनुसार, कार्तिक में भगवान कृष्ण और यमुना का विशेष आध्यात्मिक संबंध माना जाता है।
5 नवंबर 2026 को प्रयागराज में एकादशी की तिथि कब तक थी?
तीर्थ पुरोहित पंडित महेंद्र मिश्रा के अनुसार 5 नवंबर को सुबह 10 बजकर 30 मिनट के बाद एकादशी समाप्त होकर द्वादशी तिथि आरंभ हो गई। इसीलिए अधिकांश श्रद्धालुओं ने सुबह के प्रारंभिक घंटों में ही स्नान किया।
जो श्रद्धालु कार्तिक संकल्प पहले नहीं ले पाए, क्या वे अब स्नान शुरू कर सकते हैं?
हाँ, तीर्थ पुरोहितों के अनुसार जो श्रद्धालु पहले किसी कारण से संकल्प नहीं ले पाए, वे रमा एकादशी से अपने कार्यों से निवृत्त होकर कार्तिक स्नान की शुरुआत कर सकते हैं। यह व्यवस्था उन भक्तों को भी कार्तिक महात्म्य का लाभ देती है जो महीने की शुरुआत में उपस्थित नहीं हो सके।
प्रयागराज में आगे कौन से प्रमुख धार्मिक अवसर आने वाले हैं?
कार्तिक मास में देवउठनी एकादशी और कार्तिक पूर्णिमा प्रमुख आगामी पर्व हैं, जिन पर प्रयागराज के यमुना घाटों पर और भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुँचने की संभावना है। इन अवसरों पर घाटों पर विशेष पूजन और दीपदान के कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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