मंदिरों में चढ़ावा चोरी पर कांग्रेस का BJP पर हमला, सुरेंद्र राजपूत बोले — करोड़ों हिंदुओं की आस्था आहत
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने 14 जुलाई 2026 को लखनऊ में उत्तर प्रदेश की बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में मंदिरों से चढ़ावा चोरी की घटनाएँ लगातार सामने आ रही हैं, जो करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाती हैं और सरकार की विफलता को उजागर करती हैं।
मंदिर चोरी और कानून-व्यवस्था पर आरोप
राजपूत ने कहा कि उत्तर प्रदेश में हाल के दिनों में मंदिरों से चढ़ावा चोरी की घटनाएँ एक गंभीर प्रवृत्ति बन चुकी हैं। उनके अनुसार, ऐसी घटनाएँ न केवल प्रदेश की छवि को धूमिल करती हैं, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था को भी गहरी चोट पहुँचाती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP सरकार इन मामलों में प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रही है।
महिलाओं और बच्चियों पर बढ़ते अपराध
कांग्रेस प्रवक्ता ने दावा किया कि प्रदेश में महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ अपराधों का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस दिशा में अपेक्षित कदम नहीं उठा रही और जनता के वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए सांप्रदायिक विषयों को बार-बार उठाया जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष राज्य में महिला सुरक्षा के मुद्दे पर सरकार को लगातार घेर रहा है।
'एक देश, एक चुनाव' पर कांग्रेस का रुख
'एक देश, एक चुनाव' के केंद्र सरकार के प्रस्ताव पर राजपूत ने कहा कि मौजूदा संवैधानिक और कानूनी व्यवस्था के तहत इस प्रणाली को लागू करना संभव नहीं दिखता। उन्होंने तर्क दिया कि यदि केंद्र सरकार वास्तव में एक साथ चुनाव कराना चाहती है, तो पहले उन सभी राज्यों की सरकारों से इस्तीफा दिलाया जाए जहाँ BJP या उसके सहयोगी दलों की सरकारें हैं। गौरतलब है कि यह प्रस्ताव संसद में पेश होने के बाद से ही विवादों के घेरे में रहा है।
BJP पर 'ध्यान भटकाने' का आरोप
राजपूत ने आरोप लगाया कि BJP अपनी नीतिगत विफलताओं को छिपाने के लिए समय-समय पर ऐसे मुद्दे उठाती है, जिनसे जनता का ध्यान कानून-व्यवस्था, रोजगार और विकास जैसी बुनियादी समस्याओं से हट जाए। उन्होंने दावा किया कि अब देश की जनता सरकार की इस रणनीति को भली-भाँति समझ चुकी है।
आगे क्या
कांग्रेस के इन आरोपों पर अभी तक BJP की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावी तैयारियों के मद्देनज़र कानून-व्यवस्था और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा का मुद्दा विपक्ष के लिए एक प्रमुख चुनावी हथियार बन सकता है।