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महाराष्ट्र एटीएस का बड़ा ऑपरेशन: पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी नेटवर्क के 102 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी

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महाराष्ट्र एटीएस का बड़ा ऑपरेशन: पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी नेटवर्क के 102 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी

सारांश

महाराष्ट्र एटीएस ने 10 जुलाई की सुबह पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी के नेटवर्क पर अब तक का सबसे बड़ा समन्वित प्रहार किया — 14 यूनिटों की 58 टीमें, एक साथ 102 ठिकाने। सोशल मीडिया के ज़रिए युवाओं को स्लीपर सेल में भर्ती करने का कथित तंत्र निशाने पर है।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र एटीएस ने 10 जुलाई की सुबह 7 बजे पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी के नेटवर्क पर बड़ा ऑपरेशन शुरू किया।
14 यूनिटों की 58 टीमों ने एक साथ 102 ठिकानों पर तलाशी और पूछताछ अभियान चलाया।
कथित नेटवर्क में आबिद जाट , अजमल गुजर और हम्माद मेमन जैसे सहयोगी शामिल बताए जा रहे हैं।
गैंग पर फेसबुक, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और व्हाट्सएप के ज़रिए युवाओं को स्लीपर सेल्स में भर्ती करने का संदेह।
नेटवर्क के उद्देश्यों में कथित तौर पर ड्रग्स तस्करी , अवैध हथियार आपूर्ति और खुफिया जानकारी जुटाना शामिल।
एटीएस ने नागरिकों और अभिभावकों से सोशल मीडिया पर सतर्क रहने की अपील की।

महाराष्ट्र आतंकवाद विरोधी दस्ता (एटीएस) ने शुक्रवार, 10 जुलाई की सुबह 7 बजे पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी के नेटवर्क से जुड़े संदिग्धों के विरुद्ध एक बड़ा तलाशी और पूछताछ अभियान शुरू किया। एटीएस की 14 यूनिटों की 58 टीमों ने एक साथ 102 ठिकानों पर दबिश दी — जो इस तरह के किसी एकल ऑपरेशन की अब तक की सबसे बड़ी समन्वित कार्रवाइयों में से एक है।

ऑपरेशन की पृष्ठभूमि

सुरक्षा एजेंसियों को कथित तौर पर संदेह है कि शहजाद भट्टी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के ज़रिए भारतीय युवाओं को देश-विरोधी गतिविधियों में भर्ती करने की कोशिश कर रहा है। शुरुआती जाँच के अनुसार, भट्टी और उसके कथित सहयोगी — आबिद जाट, अजमल गुजर और हम्माद मेमनफेसबुक, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और व्हाट्सएप के माध्यम से युवाओं से संपर्क साधते थे।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान सीमा पर तनाव और सोशल मीडिया के ज़रिए कट्टरपंथीकरण को लेकर सुरक्षा एजेंसियाँ पहले से सतर्क हैं।

नेटवर्क का कथित तरीका

जाँच एजेंसियों के अनुसार, यह गैंग धार्मिक और सामाजिक रूप से संवेदनशील मुद्दों का इस्तेमाल कर युवाओं को मानसिक रूप से प्रभावित करने की कोशिश करता था। बेरोज़गार और आर्थिक रूप से कमज़ोर युवाओं को पैसों का प्रलोभन देकर देश-विरोधी नेटवर्क और स्लीपर सेल्स में भर्ती करने का प्रयास किया जाता था।

अधिकारियों के अनुसार, इस नेटवर्क के मुख्य उद्देश्यों में स्थानीय स्तर पर एजेंट तैयार करना, खुफिया जानकारी जुटाना, ड्रग्स की तस्करी और अवैध हथियारों की आपूर्ति शामिल है।

एटीएस की नागरिकों से अपील

एटीएस ने नागरिकों और अभिभावकों से आग्रह किया है कि वे सोशल मीडिया पर किसी भी अजनबी या संदिग्ध व्यक्ति से संपर्क न बढ़ाएँ। अभिभावकों को विशेष रूप से सलाह दी गई है कि वे अपने बच्चों की इंटरनेट गतिविधियों पर नज़र रखें और व्यवहार में कोई असामान्य बदलाव दिखने पर तुरंत सूचित करें।

एटीएस ने युवाओं को सोशल मीडिया पर कम समय में अधिक पैसे कमाने के प्रलोभन से दूर रहने की चेतावनी दी है, क्योंकि ऐसे ऑफर किसी बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकते हैं।

पुलिस का कड़ा संदेश

महाराष्ट्र पुलिस और एटीएस ने स्पष्ट किया है कि राज्य की शांति और सुरक्षा से समझौता करने वाले किसी भी देश-विरोधी तत्व को बख्शा नहीं जाएगा। लोगों से अपील की गई है कि वे देश की कानून-व्यवस्था और अखंडता को नुकसान पहुँचाने वाली किसी भी अफवाह पर विश्वास न करें और उसे आगे न फैलाएँ।

इस ऑपरेशन के नतीजे और संभावित गिरफ्तारियाँ आने वाले घंटों में सामने आने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या इससे नेटवर्क की जड़ें कटेंगी या केवल परिधि पर चोट होगी। सोशल मीडिया के ज़रिए कट्टरपंथीकरण की यह समस्या केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं — देशभर में ऐसे मामले सामने आते रहे हैं, जो दर्शाते हैं कि डिजिटल भर्ती तंत्र तेज़ी से विकसित हो रहा है। बेरोज़गारी और आर्थिक असुरक्षा को भर्ती के हथियार के रूप में इस्तेमाल करना एक गहरी सामाजिक खामी की ओर इशारा करता है जिसे केवल छापेमारी से नहीं, बल्कि दीर्घकालिक नीतिगत हस्तक्षेप से भी संबोधित करना होगा।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र एटीएस का यह ऑपरेशन किसके खिलाफ था?
यह ऑपरेशन पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी के नेटवर्क से जुड़े संदिग्धों के खिलाफ था। एटीएस को संदेह है कि यह नेटवर्क सोशल मीडिया के ज़रिए भारतीय युवाओं को देश-विरोधी गतिविधियों और स्लीपर सेल्स में भर्ती कर रहा था।
10 जुलाई को कितने ठिकानों पर छापेमारी हुई?
10 जुलाई की सुबह 7 बजे एटीएस की 14 यूनिटों की 58 टीमों ने एक साथ 102 ठिकानों पर तलाशी और पूछताछ अभियान चलाया। यह एक बड़ी समन्वित कार्रवाई थी।
शहजाद भट्टी का नेटवर्क युवाओं को कैसे निशाना बनाता था?
जाँच के अनुसार, नेटवर्क फेसबुक, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और व्हाट्सएप के ज़रिए युवाओं से संपर्क करता था। बेरोज़गार और आर्थिक रूप से कमज़ोर युवाओं को पैसों का लालच देकर और धार्मिक-सामाजिक संवेदनशील मुद्दों का इस्तेमाल कर उन्हें प्रभावित करने की कोशिश की जाती थी।
इस नेटवर्क के कथित मुख्य उद्देश्य क्या थे?
अधिकारियों के अनुसार, नेटवर्क के मुख्य उद्देश्यों में स्थानीय स्तर पर एजेंट तैयार करना, खुफिया जानकारी जुटाना, ड्रग्स की तस्करी और अवैध हथियारों की आपूर्ति शामिल है।
एटीएस ने नागरिकों को क्या सलाह दी है?
एटीएस ने नागरिकों और अभिभावकों से सोशल मीडिया पर अजनबियों से संपर्क न बढ़ाने, बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नज़र रखने और कम समय में अधिक पैसे कमाने के प्रलोभन से दूर रहने की अपील की है। देश-विरोधी अफवाहों को आगे न फैलाने की भी चेतावनी दी गई है।
राष्ट्र प्रेस
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