पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी पर जांच एजेंसियों का शिकंजा, सोशल मीडिया से युवाओं को फंसाने के दर्जन भर मामले दर्ज
पाकिस्तान में रहने वाले गैंगस्टर शहजाद भट्टी का नाम पिछले कुछ महीनों में भारत में आतंकियों की भर्ती, कट्टरपंथ फैलाने और जासूसी से जुड़े कई मामलों में बार-बार सामने आया है। सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, अलग-अलग जांच एजेंसियों ने उसके खिलाफ एक दर्जन से अधिक मामले दर्ज किए हैं और उसे भारत लाकर मुकदमा चलाने की कोशिशें तेज हो गई हैं।
कौन है शहजाद भट्टी
लाहौर का रहने वाला भट्टी कथित तौर पर पिछले कई वर्षों से दुबई से अपना नेटवर्क संचालित कर रहा है। जांच एजेंसियों के अनुसार, वह पाकिस्तान, यूएई और मध्य पूर्व के अन्य देशों के बीच लगातार आवाजाही करता रहा है। एक भारतीय सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि भट्टी ने कानूनी और न्यायिक क्षेत्राधिकार से जुड़ी खामियों का फायदा उठाकर खुद को भारतीय जांच एजेंसियों की पहुंच से दूर रखा हुआ है।
अधिकारी ने स्पष्ट किया कि भट्टी भारतीय नागरिक नहीं है और उसने कभी भारत की धरती पर कदम भी नहीं रखा, जिससे उसका प्रत्यर्पण और भी जटिल हो जाता है। हालांकि एक अन्य अधिकारी ने कहा कि यह प्रक्रिया मुश्किल जरूर है, लेकिन नामुमकिन नहीं — एजेंसियां उन देशों के साथ मिलकर काम करेंगी जहां भट्टी के होने की आशंका है।
आईएसआई का संरक्षण और प्रत्यर्पण की चुनौती
सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि भट्टी को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का संरक्षण मिला हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि अगर भारत की कोशिशें और तेज हुईं, तो वह वापस पाकिस्तान लौट सकता है, जिससे उसे पकड़ना और मुश्किल हो जाएगा।
अधिकारियों ने पुराने आतंकवाद से जुड़े मामलों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे प्रत्यर्पण पहले भी हो चुके हैं। 26/11 मुंबई हमलों के एक अहम आरोपी को अमेरिकी अदालतों में सभी कानूनी रास्ते बंद होने के बाद भारत लाया गया था। वहीं डेविड हेडली के मामले में प्रत्यर्पण संभव नहीं हो पाया था, क्योंकि उसने अमेरिकी अधिकारियों के साथ एक समझौते के तहत अमेरिका में रहने की अनुमति हासिल कर ली थी — हालांकि भारतीय एजेंसियों को उससे पूछताछ की इजाजत दी गई थी और बाद में उसने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालती कार्यवाही में भाग लिया।
सोशल मीडिया के जरिए भर्ती का नेटवर्क
इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी ने कहा कि फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता भट्टी के भर्ती नेटवर्क को तोड़ना है। जांचकर्ताओं का मानना है कि यह नेटवर्क मुख्य रूप से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए संचालित किया जा रहा था। भट्टी और उसके पाकिस्तान में मौजूद साथी ऑनलाइन माध्यमों का उपयोग करके लक्षित लोगों को ढूंढते और उन्हें भर्ती करते थे।
जांचकर्ताओं के अनुसार, देश के अलग-अलग राज्यों के युवाओं को पैसे, ताकत और पहचान का लालच देकर निशाना बनाया जाता था। उन्हें यह भरोसा दिलाया जाता था कि वे