दिल्ली पुलिस ने शहजाद भट्टी के सहयोगी को गिरफ्तार कर एक बड़े आतंकी नेटवर्क का किया पर्दाफाश
सारांश
Key Takeaways
- दिल्ली पुलिस ने शहजाद भट्टी के सहयोगी को गिरफ्तार किया।
- गिरफ्तारी ने एक बड़े आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश किया।
- हरमनदीप सिंह का संबंध पाकिस्तान में आतंकियों से था।
- गिरफ्तार व्यक्ति के पास से सबूत बरामद हुए।
- यह ऑपरेशन स्पेशल सेल की टीम ने किया।
नई दिल्ली, 23 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पाकिस्तान में सक्रिय गैंगस्टर से आतंकवादी बने शहजाद भट्टी के एक महत्वपूर्ण सहयोगी को गिरफ्तार किया है, जिससे एक बड़े आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश हुआ है।
यह उपलब्धि पूर्वी रेंज की एक समर्पित टीम ने हासिल की, जिसमें इंस्पेक्टर राहुल कुमार, विनीत कुमार तेवतिया और अजीत कुमार शामिल थे। इस ऑपरेशन की निगरानी एसीपी कैलाश सिंह बिष्ट कर रहे थे। इस कार्रवाई से भट्टी और उसके विदेशी सहयोगियों द्वारा चलाए जा रहे एक खतरनाक टेरर सिंडिकेट को बड़ा झटका लगा है।
गिरफ्तार किए गए व्यक्ति का नाम हरमनदीप सिंह उर्फ हरमन है, जो प्रदीप का बेटा है और उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले का निवासी है। उसके पास से एक काली स्प्रे पेंट की बोतल मिली, जिसका उपयोग पंजाब के होशियारपुर जिले के तलवारा इलाके में तीन स्थानों पर "टीटीएच" ग्रैफिटी लिखने के लिए किया गया था। इसके अलावा, उसके मोबाइल फोन में शहजाद भट्टी और पाकिस्तान में स्थित हैंडलर्स के साथ आपत्तिजनक चैट, ग्रैफिटी की तस्वीरें और वीडियो पाए गए हैं।
स्पेशल सेल की टीम लंबे समय से शहजाद भट्टी पर निगरानी रख रही थी, जो पाकिस्तान से भारत में आतंकवादी गतिविधियों का संचालन कर रहा है। जांच से पता चला कि हरमन विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के माध्यम से भट्टी और उसके विदेशी सहयोगियों से नियमित संपर्क में था। हरमन ने दावा किया था कि उसके साथी दिल्ली के कश्मीरी गेट पर हुई गोलीबारी में शामिल थे। भट्टी के पाकिस्तानी सहयोगियों ने भी सोशल मीडिया पर इस घटना की जिम्मेदारी ली थी। भट्टी के निर्देश पर हरमन ने तलवारा में "टीटीएच" ग्रैफिटी बनाई और उनकी फोटो-वीडियो साझा किए। उसने उत्तर प्रदेश के रामपुर में भी दूसरों को ऐसी ग्रैफिटी करने के लिए प्रेरित किया।
शहजाद भट्टी और उसके पाकिस्तानी हैंडलर्स सोशल मीडिया के माध्यम से भारत के युवाओं को निशाना बनाते हैं। वे युवाओं के प्रोफाइल का विश्लेषण कर उन्हें गैंग में शामिल करते हैं और दूर से पूरे ऑपरेशन को नियंत्रित करते हैं। इसमें जासूसी, वित्तीय लेन-देन, लॉजिस्टिक्स और लक्ष्यों का चयन शामिल होता है। पूछताछ में यह स्पष्ट हुआ कि यह एक सुनियोजित विदेशी टेरर मॉड्यूल है, जो सार्वजनिक स्थानों पर ग्रेनेड हमलों जैसी घटनाओं की साजिश रचता था। इसमें पैसे के लालच, दूर से निर्देश और अस्थायी युवा ऑपरेटिव्स का उपयोग किया जाता है।
शुरुआत में नए सदस्यों को कम जोखिम वाले कार्य सौंपे जाते थे, जैसे नकदी स्थानांतरण, ठिकाने का प्रबंधन, संवेदनशील स्थलों की रेकी और वीडियो बनाना, या ग्रैफिटी लिखकर लोगों का ध्यान आकर्षित करना। एक-दो ऐसे कार्य पूरे होने के बाद हैंडलर्स ग्रेनेड हमले या गोलीबारी जैसे बड़े कार्य सौंपते थे।
हरमनदीप सिंह का जन्म और पालन-पोषण रामपुर के शादी नगर में हुआ। उसके पिता को शराब और ड्रग्स की लत थी, जिसके कारण उसकी मां मटखेड़ा में मायके चली गईं। हरमन ने गांव में प्रारंभिक पढ़ाई की, लेकिन रुचि न होने के कारण स्कूल छोड़ दिया। बाद में, उसने कई स्थानों पर काम किया। मोबाइल फोन खरीदने के बाद, वह सोशल मीडिया पर सक्रिय हो गया और फॉलोअर्स बढ़ाने के लिए रील्स पोस्ट करने लगा।
2023 में, पिता से मारपीट के बाद वह घर छोड़कर ट्रेन से अमृतसर पहुंचा। वहां एक व्यक्ति से मिला, जिसने खुद को आपराधिक गैंग से जोड़ा बताया। गैंगस्टरों की भव्य जीवनशैली देखकर प्रभावित होकर हरमन ने इंस्टाग्राम पर ऐसे ग्रुप्स को फॉलो किया और बातचीत शुरू की।
बाद में उसने शहजाद भट्टी को फॉलो किया और उसकी जीवनशैली से आकर्षित हुआ। धीरज उर्फ धीरू नामक व्यक्ति से संपर्क हुआ, जिसने 25 नवंबर 2025 को हरियाणा के सिरसा में महिला थाने पर ग्रेनेड हमला किया था और गिरफ्तार हो चुका है। हरमन ने धीरज को वित्तीय मदद दी और भट्टी से जोड़ा। भट्टी ने उसे अनस नामक व्यक्ति से मिलवाया और ड्रोन के माध्यम से हथियारों की तस्करी का वादा किया। काम पूरे करने पर दुबई में शिफ्ट होने और अच्छे पैसे देने का लालच दिया।